विदर्भ का सप्तधाम: 16वीं सदी का अद्भुत भंडारेश्वर देवस्थान, सूर्यकिरणों से चमकता शिवलिंग
Gadchiroli News: गड़चिरोली के वैरागड़ स्थित भंडारेश्वर मंदिर अपनी हेमाडपंथी शैली व सूर्यकिरणों से प्रकाशित शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है। महाशिवरात्रि पर यहां मेला लगता है और श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती ह
- Written By: आकाश मसने
भंडारेश्वर मंदिर (फोटो नवभारत)
Gadchiroli Bhandreshwar Temple News: गड़चिरोली जिले में अनेक प्राचीन मंदिरों का भंडार है। जिले के विभिन्न तहसीलों में प्राचीन मंदिर स्थित है। इसी में आरमोरी तहसील के वैरागड़ में स्थित भंडारेश्वर देवस्थान है। अपने अद्भूत शिल्पकला के लिए यह मंदिर जाना जाता है। इसे विदर्भ के सप्तधामों में से एक मंदिर भी माना जाता है। जिससे यहां पर नितदिन श्रद्धालु तथा पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है।
वैरागड़ के दक्षिण दिशा में एक ऊंची टेकड़ी पर प्राचीन भंडारेश्वर मंदिर है। खोब्रागडी, वैलोचना,, नाडवाही नदी के त्रिवेणी संगम पर मंदिर बसा हुआ है। दानशूर रानी हिराई देवी ने 16वीं सदी में मंदिर निर्माण करने की बात कहीं जाती है। मंदिर के दाएं ओर सूर्य, चंद्र की प्रतिमा निकाली गई है। उसके समीप शिवलिंग व नवनाथ की मूर्ति है।
मंदिर के अंदर शिवलिंग स्थापित है। विदर्भ के सप्तधामों में से एक होने वाले भंडारेश्वर देवस्थान एक जागृत देवस्थान होने की आस्था श्रद्धालुओं में है। जिससे यहां श्रद्धलुओं की भीड़ रहती है। भंडारेश्वर मंदिर हेमाडपंथी शैली में निर्माण किया गया।
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सूर्यदेव की पहली किरण शिवलिंग पर
ज्योतिलिंगों में से जिन मंदिरों का मुख्य प्रवेश द्वारा पूर्व दिशा में उस सभी शिवमंदिर के गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग पर सूरज की पहली किरण पहुंचती है। उसी शैली में वैरागड़ के भंडारेश्वर मंदिर की रचना की गई है। सूर्यदेव की पहली किरण शिवलिंग के दर्शन लेती है।
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मंदिर के निर्माण के दौरान वास्तुशास्त्र का उचित रूप से पालन किया गया। जिसके तहत मुख्य प्रवेशद्वार, मंदिरा का गर्भगृह तथा उसमें शिवलिंग की स्थापना इससे सूर्यदेवता की तेजोमय किरण सीधे शिवलिंग तक पहुंचती है।
महाशिवरात्रि पर लगता है मेला
गड़चिरोली जिले में अनेक मंदिरों में महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में मेले का आयोजन किया जाता है। इसी तरह आरमोरी तहसील के वैरागड़ में भी महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में मेला लगता है। इस मेले में परिसर के श्रद्धालु बड़ी संख्या में हिस्सा लेते है। इसी के साथ सालभर यहां श्रद्धालुओं का आवागमन लगा रहता है। वैरागड़ में भंडारेश्वर मंदिर के साथ ही अनेक प्राचीन मंदिर, किला आदि स्थल है। जिससे श्रद्धालुओं के साथ पर्यटक यहां भेंट देते है।
