Gadchiroli News: राज्य सरकार द्वारा अनेक बार मूल्यांकन करने के बाद भी खामियां दूर न करने वाले राज्य के निजी स्कूलों संदर्भ में कड़े कदम उठाए गए है. अनेक बार अवसर देकर भी अपात्र साबित हुए स्कूल और कक्षाओं को अब वेतन अनुदान के लिए स्थायी अपात्र घोषित किया गया है.
इस निर्णय का भारी नुकसान जिले के 15 माध्यमिक और 8 कक्षाओं व तीन प्राथमिक स्कूलों को हुआ है. कायम बिना अनुदानित तत्व पर मान्यता वाले स्कूलों को कायम शब्द हटाने के बाद उन्हें चरणचरण में अनुदान देने की नीति सरकार ने निश्चित की थी. लेकिन अनेक बार मूल्य मापन करने के बाद भी निकष पूर्ण नहीं कर पाए है. सर्वोच्च न्यायालय ने भी 15 नवंबर 2011 के सरकार निर्णय की शर्त पूर्ण करने वाले स्कूलों को अनुदान देने की बात को वैध साबित किया है.
जिसके अनुसार लगातर तीन वर्ष अपात्र हुए स्कूलों की मान्यता खारित करने का प्रावधान है. लेकिन शैक्षणिक नुकसान टालने के लिए कार्रवाई आगे बढ़ाई गई. अब अपात्र हुई इन स्कूलों को केवल स्वयं अर्थसहायायित स्कूल के रूप में मान्यता लेने का विकल्प बचा है. इसके लिए 30 अप्रैल 2026 तक शिक्षा संचालक पुणे के पास आवेदन करना अनिवार्य है.
इन स्कूलों को जमीन और दान निधि की कुछ जटिल शर्तों को राहत मिलने पर भी उन्हें सरकार द्वारा कोई भी अनुदान नहीं मिलेगा. वहीं जो स्कूल 30 अप्रैल तक स्वंय अर्थसाहायित मान्यता के लिए आवेदन नहीं करेंगे. उनकी मान्यता अपने आप खारिज होगी. ऐसे स्कूलों के छात्रों का शैक्षणिक नुकसान टालने के लिए उनका करीब सरकारी अथवा अनुदानित स्कूलों में 31 मई तक समायोजन करने का आदेश शिक्षाधिकारी को दिया गया है.
माध्यमिक शिक्षाधिकारी वासुदेव भुसे ने कहा कि अनुदान के लिए संबंधित स्कूलों को अनेक बार अवसर दिया गया था. लेकिन वह अनुदान के लिए पात्र साबित नहीं हुई. अब वह स्वंय अर्थसहायित के रूप में मान्यता न लेने पर इन स्कूलों की मान्यता खारिज करने का निर्णय सरकार ने लिया है. जिस पर अमल किया जाएगा.