

सोनसरी आश्रमशाला में आठवीं की छात्रा राणू हलामी की मौत का मामला।
मंत्री डॉ. अशोक उईके ने अधीक्षिका दीपाली चांभाले पर कार्रवाई की घोषणा की।
छात्रा की तबीयत खराब होने और घर जाने की मांग को लेकर परिजनों ने लगाए आरोप।
परिवार को 6 लाख रुपये की सहायता और मां को संविदा पर नौकरी देने का ऐलान।
आश्रमशालाओं में विद्यार्थियों की सुरक्षा और समय पर उपचार को लेकर उठे सवाल।
Gadchiroli Ashram School Student Death: गड़चिरोली की कुरखेड़ा तहसील के सोनसरी स्थित सरकारी आश्रमशाला में 14 वर्षीय छात्रा राणू कृष्णा हलामी की मौत के मामले में आदिवासी विकास मंत्री डॉ. अशोक उईके ने अधीक्षिका को निलंबित करने और मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की। परिवार को 6 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और मृत छात्रा की मां को संविदा पर नौकरी देने का भी ऐलान किया गया है।
गड़चिरोली, कुरखेड़ा तहसील के सोनसरी स्थित सरकारी आश्रमशाला के छात्रावास में 14 वर्षीय छात्रा राणू कृष्णा हलामी की मौत के मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के आदिवासी विकास मंत्री डॉ. अशोक उईके ने मंगलवार को सोनसरी पहुंचकर आश्रमशाला का निरीक्षण किया और मृत छात्रा के परिजनों से मुलाकात की।
मंत्री ने आश्रमशाला की अधीक्षिका दीपाली चांभाले को तत्काल निलंबित करने तथा उनके विरुद्ध मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक तौर पर गड़चिरोली आश्रमशाला में लापरवाही, अनियमितताओं और प्रशासनिक निष्क्रियता की आशंका नजर आ रही है। हालांकि, घटना के वास्तविक कारणों और जिम्मेदार लोगों की भूमिका जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
मंत्री डॉ. उईके ने कहा कि यदि छात्रा को समय पर उचित उपचार और समुपदेशन उपलब्ध कराया जाता, तो संभवतः इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना को टाला जा सकता था। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि गड़चिरोली परियोजना के अंतर्गत आने वाली सभी सरकारी आश्रमशालाओं के प्रधानाचार्यों और अधीक्षकों के साथ परियोजना अधिकारी नियमित संपर्क बनाए रखें। भविष्य में इस तरह की घटना होने पर संबंधित परियोजना अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। लापरवाही सामने आने पर उनके विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, सोनसरी की सरकारी आश्रमशाला में आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली राणू ने 12 अक्टूबर को छात्रावास में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। घटना के बाद छात्रा के माता-पिता ने आश्रमशाला की अधीक्षिका पर गंभीर आरोप लगाए।
परिजनों का दावा है कि राणू की तबीयत ठीक नहीं थी और वह घर जाने की मांग कर रही थी। आरोप है कि उसे घर जाने देने के बजाय कमरे में बंद रखा गया था। परिजनों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच, दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई और परिवार को 25 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की है। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
मंत्री डॉ. अशोक उईके ने मृत छात्रा की मां को संविदा आधार पर नौकरी देने और परिवार को 6 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने की घोषणा की। इस दौरान विधायक डॉ. मिलिंद नरोटे सहित संबंधित अधिकारी, विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे।
राणू की मौत ने सरकारी आश्रमशालाओं में विद्यार्थियों की सुरक्षा, बीमार होने पर समय पर उपचार और प्रशासन की जवाबदेही को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अब मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।