महाराष्ट्र की 558 आश्रमशालाओं का होगा थर्ड पार्टी ऑडिट, मंत्री अशोक उईके का ऐलान, पारदर्शी जांच की मांग

Maharashtra Ashram Schools: महाराष्ट्र के आदिवासी विकास मंत्री अशोक उईके ने राज्य की 558 अनुदानित आश्रमशालाओं का 'थर्ड पार्टी ऑडिट' कराने की घोषणा की। व्यवस्थाओं की स्थिति पर पारदर्शी जांच होगी।
Third-party audit of 558 Ashram Schools in Maharashtra to be conducted: Minister Ashok Uike announces
अशोक उईके, अभिजीत दिपकेसोर्स- सोशल मीडिया
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Tribal Development Minister Dr Ashok Uike Third Party Audit: राज्य के आदिवासी विकास विभाग के तहत संचालित 558 अनुदानित आश्रमशालाओं का अब 'थर्ड पार्टी ऑडिट' कराया जाएगा। आदिवासी विकास मंत्री डॉ. अशोक उईके ने यह घोषणा करते हुए

दावा किया कि इनमें से 80 प्रतिशत से अधिक आश्रमशालाएं कांग्रेस नेताओं और पदाधिकारियों से जुड़ीं संस्थाओं द्वारा संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि ऑडिट के जरिए इन आश्रमशालाओं की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।

मंत्री उईके ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत दिपके के आदिवासी स्कूलों की स्थिति को लेकर चलाए जा रहे अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने दिपके से कांग्रेस नेताओं और पदाधिकारियों से जुड़ीं आश्रमशालाओं का दौरा कर वहां की वास्तविक स्थिति देखने और विद्यार्थियों से संवाद करने का आह्वान किया।

अशोक उईके ने कहा कि यदि आश्रमशालाओं की जांच करते समय कांग्रेस पदाधिकारियों से जुड़ीं संस्थाओं को छोड़ दिया जाता है तो यह पूरी तरह राजनीतिक अभियान माना जाएगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी विकास विभाग की ओर से 100 प्रतिशत अनुदान प्राप्त आश्रमशालाओं का थर्ड पार्टी ऑडिट शुरू किया जा रहा है। मंत्री ने दावा किया कि इस ऑडिट के बाद संस्था चालकों की जवाबदेही तय हो सकेगी।

आदिवासी और दुर्गम क्षेत्रों की उपेक्षा का आरोप

  • दूसरी ओर, अभिजीत दिपके इन दिनों 2 दिवसीय गड़चिरोली दौरे पर है। उन्होंने एटापल्ली तहसील के डुम्मे, कोसा आलेंगा और पायडी गांवों की जिला परिषद स्कूलों का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

  • दिपके ने आरोप लगाया कि सरकार हमेशा से आदिवासी और दुर्गम क्षेत्रों की उपेक्षा करती रही है।

  • उन्होंने कहा कि यदि गड़चिरोली जैसे इलाकों में सामने आने वाली समस्याएं मुंबई या पुणे में होतीं तो इस पर बड़ा हंगामा होता।

  • दिपके ने दावा किया कि पिछले 2 वर्षों में विभिन्न कारणों से 590 आदिवासी विद्यार्थियों की मौत हुई है।

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  • उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने पर पर्याप्त

  • ध्यान नहीं दे रही है और आदिवासी विद्यार्थियों की मौत के मामले में केवल 2 लाख रुपये की सहायता देकर जिम्मेदारी पूरी मान ली जाती है।

  • अपने दौरे के दौरान दिपके भामरागड तहसील के ताड़गांव जिला परिषद स्कूल का भी दौरा करेंगे। इसके अलावा वे स्थानीय ग्रामीणों और सफाई कर्मचारियों से बातचीत करेंगे।

नंदुरबार की आश्रमशाला की बदहाली पर भड़के दिपके

दिपके ने नंदुरबार जिले के अक्कलकुवा तहसील के दुर्गम क्षेत्र स्थित 'सरी' आदिवासी आश्रमशाला का भी दौरा किया, वहां की स्थिति देखने के बाद उन्होंने प्रशासन पर नाराजगी जताई।

उन्होंने कहा कि उन्हें यह कहते हुए शर्म महसूस होती है कि 26 वर्ष बाद नंदुरबार लौटने के बावजूद दुर्गम क्षेत्रों की स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं हुआ है।

दिपके ने कहा कि जब वह नंदुरबार में रहते थे, तब भी कई इलाकों में बिजली नहीं थी और आज भी वहां अंधेरे की स्थिति बनी हुई है। आश्रमशाला में समय पर बिजली उपलब्ध नहीं होने और विद्यार्थियों को पीने का पानी तक नहीं मिलने का दावा करते हुए उन्होंने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आदिवासी विद्यार्थियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

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