Gadchiroli News: आजादी के 80 साल बाद भी अंधेरे में मुरेवाड़ा, न बिजली न पक्की सड़क, ग्रामीणों ने मांगा जवाब

Murewada Village: गड़चिरोली जिले के एटापल्ली तहसील के मुरेवाड़ा गांव में आज भी बिजली, पक्की सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। ग्रामीणों ने गांवों के सर्वेक्षण और विकास योजना की मांग की है।
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मुरेवाड़ा गांव (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Gadchiroli Village Development: देश को आजाद हुए करीब आठ दशक बीत चुके हैं। शहरों में विकास की नई इबारत लिखी जा रही है और 'हर घर बिजली', 'गांव-गांव पक्की सड़क' तथा डिजिटल सुविधाओं की बातें हो रही हैं। लेकिन गड़चिरोली जिले के एटापल्ली तहसील के दुर्गम गर्दैवाड़ा क्षेत्र का मुरेवाड़ा गांव आज भी बिजली, पक्की सड़क तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं की प्रतीक्षा कर रहा है। विकास के दावों के बीच गांव के लोगों का जीवन आज भी अंधेरे और कठिनाइयों से घिरा हुआ है।

स्वतंत्रता के इतने वर्षों बाद भी दुर्गम क्षेत्र के नागरिकों को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। गर्देवाड़ा से करीब छह किलोमीटर दूर स्थित मुरेवाड़ा गांव तक पहुंचने वाला मार्ग बेहद खराब स्थिति में है। यह मार्ग आगे छत्तीसगढ़ राज्य से जुड़ता है और क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। इसके बावजूद सड़क का पक्कीकरण तथा आवश्यक सुधार नहीं होने से ग्रामीणों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। गर्मी के दिनों में धूल और बरसात में कीचड़ तथा बड़े-बड़े गड्डों से होकर ग्रामीणों को आवागमन करना पड़ता है।

मुरेवाड़ा बना उपेक्षा का प्रतीक

मरीज, गर्भवती महिलाओं, विद्यार्थियों और बुजुर्गों को इस रास्ते से यात्रा करने में विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। आपात स्थिति में एंबुलेंस गांव तक समय पर पहुंच पाएगी या नहीं, यह भी गंभीर सवाल बना हुआ है। गर्दैवाड़ा ग्राम पंचायत के अंतर्गत गर्दैवाड़ा, मुरेवाड़ा, नैतला, कोइनवर्षी, हाजबोड़ी, रेखलमेठा, ताड़गुड़ा, देवपाड़ी, रेखाबाताल, हीकेर और मर्धाकुही सहित कुल 11 गांव आते हैं। मुरेवाड़ा से छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाला मार्ग इन गांवों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार, रोजगार और दैनिक आवागमन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

चुनाव में वादे, लेकिन समाधान नहीं

एक ओर सरकार हर घर तक बिजली पहुंचाने का दावा कर रही है, वहीं मुरेवाड़ा के ग्रामीण आज भी बिजली की प्रतीक्षा कर रहे हैं। बिजली के अभाव में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। मोबाइल चार्जिंग, संचार व्यवस्था तथा बिजली पर निर्भर अन्य आवश्यक सुविधाओं से भी ग्रामीण वंचित हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि चुनाव के दौरान दुर्गम क्षेत्रों के विकास के वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव के बाद इन गांवों की समस्याओं का समाधान क्यों नहीं होता ? मुरेवाड़ा को बिजली के लिए और कितने वर्षों तक इंतजार करना पड़ेगा।

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11 गांवों का करें सर्वेक्षण

गर्दैवाड़ा ग्राम पंचायत के 11 गांवों के लिए क्या कोई समयबद्ध विकास योजना तैयार की गई है, यह भी स्पष्ट नहीं है। ग्रामीणों की मांग है कि केवल घोषणाओं और आश्वासनों के बजाय बिजली, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और संचार जैसी बुनियादी सुविधाएं वास्तविक रूप से उपलब्ध कराई जाएं। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि दुर्गम गांवों तक पहुंचते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता।

ग्रामीणों ने मांग की है कि जनप्रतिनिधि और संबंधित अधिकारी मुरेवाड़ा गांव में एक रात ठहरकर यहां की वास्तविक परिस्थितियों और नागरिकों की समस्याओं को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव करें। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मुरेवाड़ा सहित गर्दैवाड़ा ग्राम पंचायत के सभी 11 गांवों का तत्काल सर्वेक्षण कराने की मांग की है। बिजली, पक्की सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और संचार जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विशेष एवं समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए। साथ ही मुरेवाड़ा से छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग का पक्कीकरण और आवश्यक सुधार कार्य तत्काल शुरू किया जाए, ऐसी मांग ग्रामीणों की ओर से की जा रही है।

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