

Gadchiroli Mukka Kando Rescue: गड़चिरौली जिले के नक्सल प्रभावित और महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा से सटे मोहुर्ली गांव में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने पूरे गांव को भावुक कर दिया। करीब एक साल पहले लापता हुई 60 वर्षीय मुक्का दस्सू कांदो को परिवार ने मृत मान लिया था।
आश्रम की ओर से महिला के रेस्क्यू का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया गया। यह वीडियो मोहुर्ली के लोगों और मुक्का कांदो के भांजे तक पहुंचा। वीडियो में महिला का चेहरा और उनकी स्थिति देखकर परिवार को संदेह हुआ कि यह वही मुक्का कांदो हो सकती हैं, जो करीब एक साल से लापता थीं।
पड़ताल और संपर्क के बाद परिवार को यकीन हो गया कि वीडियो में दिखाई दे रही महिला मुक्का कांदो ही हैं। इसके बाद परिवार और आश्रम के बीच संपर्क हुआ और उन्हें घर पहुंचाने की तैयारी शुरू की गई।
उनकी तेरहवीं कर दी गई थी और आदिवासी परंपरा के अनुसार उनके कपड़ों को गड्ढे में रखकर समाधि भी बना दी गई थी। लेकिन करीब एक साल बाद मुक्का कांदो जिंदा अपने घर लौट आईं।
बताया गया कि मुक्का कांदो की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी और वह करीब एक वर्ष पहले घर से लापता हो गई थीं। परिवार ने महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में उनकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। लंबे समय तक कोई जानकारी नहीं मिलने के बाद परिवार ने उन्हें मृत मान लिया।
नागभीड़ तहसील के तलोधी-बालापुर क्षेत्र में पत्रकार गोकुल पाकमोड़े की नजर बेसुध अवस्था में भटक रही एक महिला पर पड़ी। महिला की स्थिति को देखते हुए उन्होंने नांदेड़ स्थित डोमाजी आधार फाउंडेशन से संपर्क किया।
इसके बाद आश्रम के सदस्य परमेश्वर मडावी मौके पर पहुंचे। करीब दो महीने पहले महिला को रेस्क्यू कर आश्रम ले जाया गया। वहां उनकी नियमित देखभाल की गई।
डोमाजी आधार फाउंडेशन की टीम के परमेश्वर मलावी, रजनी कुंभारे, मनीष खोब्रागडे, आशिष खोब्रागडे, आदित्य उईके और समृद्ध खोब्रागड़े वाहन से उन्हें मोहुर्ली लेकर रवाना हुए। करीब पांच घंटे के सफर के बाद जब गाड़ी गांव पहुंची तो परिवार की आंखों से आंसू छलक पड़े।
सोशल मीडिया के कारन एक साल बाद पत्नी और मां को जिंदा सामने देखकर उनके पति, बेटे और बेटी भावुक हो उठे। पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। जिस महिला की तेरहवीं हो चुकी थी और समाधि तक बना दी गई थी, उसी के जिंदा लौटने का दृश्य गांव के लोगों के लिए बेहद भावुक और अविस्मरणीय बन गया।