2027 में ऑनलाइन नहीं होगी MPSC परीक्षा; OMR से होगा एग्जाम, पुणे में टास्कफोर्स ने सुने छात्रों के सुझाव

MPSC Exam Reform: एमपीएससी और राज्य की प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़े बदलाव की तैयारी है। अगले साल परीक्षा ऑनलाइन नहीं होगी, OMR पैटर्न अपनाया जाएगा और पेपर लीक रोकने के लिए हाईटेक सिस्टम बनेगा।
MPSC Exam Changes OMR Pattern Paper Leak Prevention
पुणे में छात्रों के सुझाव सुनते परिक्षा भर्ती की टास्कफोर्स(सोर्सः सोशल मीडिया)
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MPSC Exam Changes OMR Pattern: महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) और राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित, स्थिर और उम्मीदवार-केंद्रित बनाने के लिए राज्य सरकार की ओर से गठित हाई-लेवल टास्कफोर्स ने छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और अन्य संबंधित लोगों से विस्तार से चर्चा की।

बैठक में परीक्षा कैलेंडर, प्रश्न-पत्र की गुणवत्ता, पेपर लीक रोकने, रिक्त पदों की घोषणा, आंसर-की, परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था, शिकायत निवारण और उम्मीदवारों की ‘ऑप्ट-आउट’ नीति जैसे मुद्दों पर सुझाव लिए गए। उम्मीदवारों ने सालाना परीक्षा कैलेंडर जारी कर उसका सख्ती से पालन करने तथा बार-बार नियम बदलने के बजाय प्रक्रिया में स्थिरता बनाए रखने की मांग की।

अगले साल ऑनलाइन नहीं होगी प्रतियोगी परीक्षा

टास्कफोर्स की अध्यक्ष और सामान्य प्रशासन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव (सेवाएं) वी. राधा ने बताया कि अगले साल प्रतियोगी परीक्षाएं ऑनलाइन नहीं होंगी। परीक्षाएं ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन (OMR) शीट के पैटर्न पर आयोजित की जाएंगी। इसके लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग गाइडलाइंस तैयार की जा रही हैं।

पेपर लीक रोकने के लिए प्रश्न तैयार करने से लेकर प्रिंटिंग, परिवहन और वितरण तक एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल की योजना है। कमेटी एन्क्रिप्टेड ‘ई-क्वेश्चन बैंक’ सिस्टम पर भी विचार कर रही है। इसमें प्रश्न तैयार करने वालों को भी यह जानकारी नहीं होगी कि उनके तैयार किए गए सवाल किस परीक्षा में शामिल होंगे।

एक पोर्टल, सिंगल विंडो की मांग

उम्मीदवारों ने प्रश्न-पत्र और आंसर-की में गलतियों को रोकने के लिए कड़ी क्वालिटी जांच, मूल्यांकन की एक समान प्रक्रिया और आंसर स्क्रिप्ट की समीक्षा के लिए ऑडिटर व्यवस्था की मांग की। साथ ही सभी सवालों और आपत्तियों के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल तथा राज्य की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए वन-टाइम रजिस्ट्रेशन और फीस भुगतान की सिंगल-विंडो व्यवस्था का सुझाव दिया गया।

परीक्षा केंद्रों पर बेहतर सुविधाओं की मांग

परीक्षा केंद्रों पर साफ टॉयलेट, पीने का पानी और पर्याप्त बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। चयन के बाद ‘ऑप्ट-आउट’ की स्पष्ट नीति, दिव्यांगता और खेल कोटा प्रमाणपत्रों का समय पर सत्यापन तथा खाली पदों की न्यूनतम संख्या पहले घोषित करने की मांग भी सामने आई।

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तमिलनाडु, गुजरात और UPSC के मॉडल का अध्ययन

टास्कफोर्स देश के विभिन्न लोक सेवा आयोगों की कार्यप्रणाली का अध्ययन कर रही है। इसमें विशेष रूप से तमिलनाडु, गुजरात और UPSC परीक्षा की प्रणालियों का विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि महाराष्ट्र में सफल व्यवस्थाओं को लागू किया जा सके।

MPSC पर बढ़ते काम के बोझ को देखते हुए प्रशासनिक कर्मचारियों, तकनीकी क्षमता और संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की जरूरत पर भी चर्चा हुई। पुलिस महानिदेशक सदानंद दाते ने कहा कि सरकार का उद्देश्य राज्य के लिए अधिकारियों के चयन की प्रक्रिया को तेज, अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।

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हाई-लेवल टास्कफोर्स में कौन-कौन?

इस टास्कफोर्स की अध्यक्षता GAD की अतिरिक्त मुख्य सचिव वी. राधा कर रही हैं। समिति में DGP सदानंद दाते, इलेक्ट्रॉनिक्स, IT और AI सचिव वीरेंद्र सिंह, पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य पालन सचिव एन. रामास्वामी, नासिक संभागीय आयुक्त प्रवीण गेदाम, एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) एवं UPSC के पूर्व सदस्य अजीत शंकरराव भोसले और IIT बॉम्बे के श्यामप्रसाद करगुडे शामिल हैं।

चर्चा के दौरान संभागीय आयुक्त शीतल तेली उगाले, कलेक्टर जितेंद्र दूदी, अतिरिक्त कलेक्टर सतीश राउत और रेजिडेंट डिप्टी कलेक्टर ज्योति कदम सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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