ओवरलोड रेत डंपर छोड़े जाने पर गड़चिरोली में सवाल, राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर उठी उंगली
Gadchiroli Transport News: गड़चिरोली में ओवरलोड रेत ले जा रहे तीन डंपरों की जांच के बाद भी कार्रवाई न होने का आरोप लगा है। इससे राजस्व विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं।
- Written By: केतकी मोडक
गड़चिरोली ओवरलोड रेत डंपर (सोर्स- फोटो नवभारत)
Gadchiroli Sand Transport Investigation: गड़चिरोली शहर में इंदिरा गांधी चौक से कुछ ही दूरी पर स्थित जिप हाईस्कूल के सामने सोमवार सुबह ओवरलोड रेत परिवहन कर रहे तीन डंपर वाहनों की राजस्व विभाग द्वारा मौके पर जांच किए जाने के बावजूद, उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई किए बिना उन्हें छोड़ दिए जाने का गंभीर आरोप सामने आया है।
इस घटना के बाद राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली, प्रशासन की पारदर्शिता तथा संभावित राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। नागरिकों ने पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तीन बड़े डंपर निर्धारित क्षमता से अधिक रेत लेकर शहर से गुजर रहे थे। वाहनों में ऊपर तक रेत भरी हुई थी तथा फटी हुई तिरपाल से ढकी होने के कारण रास्ते में रेत लगातार सड़क पर गिर रही थी। इस दौरान यातायात (ट्रैफिक) पुलिस के दो कर्मचारियों ने डंपरों को रोककर चालकों से पूछताछ की।
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धर्मकांटा ले जाने की बात, फिर वाहन गायब
चालकों के पास 8 से 10 ब्रास रेत की रॉयल्टी रसीदें मौजूद थीं, लेकिन वाहनों में अनुमति से अधिक रेत भरी होने की आशंका पर नागरिकों ने इसकी सूचना गड़चिरोली के तहसीलदार सागर कांबले तथा उपविभागीय अधिकारी (IAS) एम. अरुण को दूरभाष (फोन) के माध्यम से दी।
सूचना मिलने के बाद राजस्व विभाग की ओर से पटवारी सुभाष आडे तथा अन्य कर्मचारियों को मौके पर भेजा गया। राजस्व टीम ने रॉयल्टी रसीदों की जांच की तथा मीटर टेप से डंपरों की लंबाई, चौड़ाई और भरे हुए हिस्से का माप लिया। प्रारंभिक जांच में वाहनों में निर्धारित सीमा से अधिक रेत होने की संभावना जताई गई।
मौके पर मौजूद नागरिकों को बताया गया कि डंपरों को धर्मकांटे पर ले जाकर उनका वजन कराया जाएगा और उसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, कुछ समय बाद जब नागरिकों ने धर्मकांटा और तहसील कार्यालय परिसर में जानकारी ली, तो संबंधित वाहन कहीं दिखाई नहीं दिए। पटवारी सुभाष आडे से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि तहसीलदार के मौखिक निर्देश पर वाहनों को छोड़ दिया गया।
नागरियों का यह भी आरोप है कि वाहनों का अधिकृत तकनीकी मापन सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) से कराया जा सकता था, लेकिन इसके लिए कोई औपचारिक पत्राचार नहीं किया गया। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या नियमानुसार होने वाली कार्रवाई से जानबूझकर बचा गया।
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दबाव समूहों के हस्तक्षेप के कारण टाल दी गई कार्रवाई
इधर बाजार में यह भी चर्चा है कि गड़चिरोली जिले में विभिन्न औद्योगिक एवं निर्माण परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर रेत की आपूर्ति की जा रही है। चूंकि रेत की खरीद वजन के आधार पर होती है, इसलिए अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से कुछ ठेकेदार वाहनों में निर्धारित क्षमता से अधिक रेत भरकर परिवहन कर रहे हैं।
कुछ नागरिकों ने आशंका व्यक्त की है कि क्या प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्तियों अथवा अन्य दबाव समूहों के हस्तक्षेप के कारण इस कार्रवाई को टाल दिया गया।
