10 साल की मेहनत रंग लाई, महाराष्ट्र केसरी कुश्ती में धुले के पहलवान तेजस का कमाल, जीता कांस्य पदक
Dhule Sports News: धुले के पहलवान तेजस अंपलकर ने महाराष्ट्र केसरी कुश्ती प्रतियोगिता के 86 किलो वर्ग में कांस्य पदक जीतकर जिले का नाम रोशन किया। लगातार जीत के बाद रिपेज राउंड में जीत से यह सफलता मिली।
- Written By: अंकिता पटेल
Maharashtra Kesari Wrestling( Source: Social Media )
Maharashtra Kesari Wrestling: धुले पहलवान तेजस गजेंद्र अंपलकर ने प्रतिष्ठित महाराष्ट्र केसरी कुस्ती प्रतियोगिता में 86 किलो वर्ग (गादी विभाग) में कांस्य पदक जीतकर जिले का नाम रोशन किया है।
कठिन परिस्थितियों के बीच हासिल की गई इस सफलता ने उन्हें राज्यभर में पहचान दिलाई है। 28 जनवरी 2026 को धुले में हुई चयन स्पर्धा में तेजस का चयन हुआ था।
इसके बाद वे दिल्ली से सीधे पुणे पहुंचकर प्रतियोगिता में उतरे। शुरुआती मुकाबलों में लगातार तीन जीत दर्ज कर उन्होंने अपनी मजबूत दावेदारी पेश की।
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हालांकि सेमीफाइनल में उन्हें 7-10 से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन रिपेज राउंड में मिले मौके को भुनाते हुए उन्होंने पांचवें मुकाबले में पवन दुबल को हराकर कांस्य पदक अपने नाम किया। 10 साल की मेहनत का मिला फल : तेजस का सफर मिसाल रहा है।
उन्होंने स्कूल स्तर पर जूनियर वर्ग में कांस्य पदक जीतकर शुरुआत की थी। इसके बाद अभ्यास, मेहनत के दम पर उन्होंने राज्य स्तर पर यह बड़ी उपलब्धि हासिल की।
चोट और बीमारी से उबरकर की दोबारा की वापसी
2023-24 में सीनियर नेशनल के दौरान तेजस के पैर में गंभीर चोट लगी थी, जिसके बाद लिगामेंट सर्जरी और लंबा आराम करना पड़ा।
2025-26 में टाइफाइड के कारण वे राष्ट्रीय स्पर्धा में हिस्सा नहीं ले सके।
बावजूद इसके उन्होंने हार नहीं मानी और शानदार वापसी करते हुए पदक जीत लिया।
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राष्ट्रीय स्तर की तैयारी, स्थानीय गुरुओं का साथ तेजस ने पिछले तीन वर्षों से गुरुग्राम स्थित वीरेंद्र कोचिंग सेंटर में कोच वीरेंद्र दहिया के मार्गदर्शन में अभ्यास किया।
धुले की हर हर महादेव व्यायाम शाला में कोच सजय पाटील सहित कई अनुभवी पहलवानों का उन्हें मार्गदर्शन मिला।
परिवार का भी उन्हें पूरा समर्थन मिला, भाजपा नेता गजेंद्र अंपळकर के पुत्र होने के बावजूद तेजस ने सादगी और अनुशासन को अपनी ताकत बनाया, उनके शांत और विनम्र स्वभाव की भी खेल जगत में सराहना हो रही है। तेजस की इस उपलब्धि को जिले के खेल इतिहास में अहम माना जा रहा है।
