Hindi news, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest Hindi News
X
  • देश
  • महाराष्ट्र
  • विदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • नवभारत विशेष
  • वायरल
  • धर्म
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • टेक्नॉलजी
  • यूटिलिटी न्यूज़
  • फैक्ट चेक
  • हेल्थ
  • ऑटोमोबाइल
  • वीडियो

  • वेब स्टोरीज
  • फोटो
  • होम
  • विडियो
  • फटाफट खबरें

क्या फिर दंगों की ओर बढ़ रहा धुले? खतरे में हिंदू-मुस्लिम भाईचारा, मनपा चुनाव के नतीजों से गरमाया माहौल

Dhule News: धुले मनपा चुनाव नतीजों ने शहर के बढ़ते धार्मिक ध्रुवीकरण को उजागर कर दिया है। हिंदू बहुल इलाकों में BJP और मुस्लिम इलाकों में AIMIM की जीत ने अर्थव्यवस्था और शांति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • By आकाश मसने
Updated On: Jan 19, 2026 | 01:45 PM

धुले महानगरपालिका (सोर्स: सोशल मीडिया)

Follow Us
Close
Follow Us:

Dhule Religious Polarization: धुले महानगरपालिका चुनाव अभी-अभी संपन्न हुए हैं। नतीजों ने राजनीतिक समीकरण तो साफ कर दिए, लेकिन उससे कहीं ज्यादा साफ तौर पर सामने आया है इस शहर का सामाजिक सच का चिंताजनक चेहरा। हिंदू बहुल इलाकों में भाजपा को और मुस्लिम बहुल इलाकों में एमआईएम को मिली स्पष्ट बहुमत सिर्फ राजनीतिक हकीकत नहीं, बल्कि बढ़ते धार्मिक ध्रुवीकरण के भयावह संकेत हैं। राजनीति के नाम पर शहर के हिंदू-मुस्लिम भाईचारे पर प्रहार हो रहा है और कट्टरवाद बेलगाम घूम रहा है, यह कहना गलत नहीं होगा।

धुले शहर दंगों के लिए बदनाम रहा है। हकीकत में दो बार दंगों की आग झेल चुके इस शहर को इतिहास से सबक सीखना चाहिए था। लेकिन ऐसा होता दिख नहीं रहा। उलट, कुछ स्वार्थी राजनीतिक ताकतें जानबूझकर पुरानी जख्मों को कुरेद रही हैं। वोट की फसल काटने के लिए धर्म का इस्तेमाल, समाज में अविश्वास फैलाना और ‘वे’ व ‘हम’ की खाई पैदा करना लोकतंत्र के लिए बेहद घातक है।

विशेष लोगों से खरीदारी न करने की अपील

गंभीर बात यह है कि कुछ जिम्मेदार जनप्रतिनिधि खुले आम एक विशेष धर्म के लोगों से खरीदारी न करने की अपील कर रहे हैं। यह सिर्फ सामाजिक बहिष्कार का समर्थन नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों पर सीधा हमला है। ऐसे बयानों का असर चुनाव नतीजों में साफ दिखता है। राजनीतिक स्वार्थ के लिए आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक रिश्तों को तोड़ने की यह कोशिश धुले शहर को फिर से हिंसा के मुहाने पर ला खड़ा कर सकती है।

सम्बंधित ख़बरें

Navi Mumbai Municipal: शिवसेना में विपक्षी नेता को लेकर मंथन, युवा चेहरे पर जोर

50,000 वोटर्स नहीं कर पाए मतदान! कृष्णा खोपड़े ने बताया कौन है कांग्रेस की हार का जिम्मेदार

मालेगांव में खौफनाक हादसा, बस और पिकअप में जोरदार टक्कर, 4 की मौत, हाईवे पर मची चीख-पुकार

नासिक मनपा चुनाव के चौंकाने वाले आंकड़े आए सामने, 91 हजार लोगाें ने दबाया NOTA का बटन, 211 उम्मीदवार रहे पीछे

धुले सिर्फ हिंदुओं या मुस्लिमों का शहर नहीं, यह सभी धर्मों, सभी समाजों का साझा घर है। विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे बुनियादी मुद्दों पर बहस होनी चाहिए थी। लेकिन अफसोस, धर्म आधारित राजनीति ने इन मुद्दों को किनारे कर दिया है। इसकी कीमत पूरे शहर को चुकानी पड़ेगी। अगर वक्त रहते समझदारी नहीं दिखाई गई तो धुले फिर धधकेगा, इसमें जरा भी शक नहीं।

हिंदू-मुस्लिम भाईचारे को बिगाड़ने की कोशिश

समाज के सजग नागरिकों, धार्मिक नेताओं और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों को आगे आकर नफरत की इस राजनीति का विरोध करना चाहिए, वरना इतिहास फिर से खून से सना रूप लेकर खुद को दोहराएगा। चुनाव के बाद शहर में तनाव का माहौल है। हिंदू बहुल वाडों में भाजपा की जीत ने जहां एक पक्ष को मजबूत किया, वहीं मुस्लिम इलाकों में एमआईएम की कामयाबी ने ध्रुवीकरण को और गहरा किया। स्थानीय नेताओं के बयान इस आग में घी डाल रहे है।

भाजपा के कुछ नेता मुस्लिम व्यापारियों का बहिष्कार करने की बात कहते हैं, जबकि एमआईएम के कार्यकर्ता हिंदू-मुस्लिम एकता की दुहाई देते हुए भी धार्मिक लामबंदी कर रहे है। शहर की अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ रहा है। बाजारों में अविश्वास बढ़ा है, कारोबार प्रभावित हो रहा है। धुले की मिली-जुली संस्कृति, जहां त्योहार साथ मनाए जाते थे, अब खंडित हो रही है।

यह भी पढ़ें:- फडणवीस-गडकरी के करीबी नेता का चौंकाने वाला फैसला! MLC संदीप जोशी का राजनीति से किनारा, 2 पन्नों में बताया सच

पिछले दंगों की यादें अभी ताजा है। 2008 और 2018 की घटनाएं शहर को सालों पीछे धकेल गई। मौतें, संपत्ति का नुकसान, सामाजिक दरारें-सब कुछ हुआ। लेकिन राजनीतिक पार्टियां इनसे सबक लेने की बजाय इन्हें हथियार बना रही है। सेक्युलर दलों की नाकामी भी साफ है। उन्होंने मुस्लिमों को न्याय नहीं दिया, जिससे एमआईएम जैसी पार्टियां मजबूत हुई। हिंदू वोटों को एकजुट करने में भाजपा कामयाब रही, लेकिन यह जीत शहर की हार है। समाजशास्त्रियों का कहना है कि ऐसे ध्रुवीकरण से शहर का विकास रुक जाता है। निवेश आना बंद हो जाता है।

धन-बल का हुआ इस्तेमाल

शिवसेना यूबीटी के पूर्व विधायक अनिल गोटे ने कहा कि भाजपा और एमआईएम एक ही सिक्के के दो पहलू है। है। ईवीएम में छेड़छाड़ की गई और लोगों को पता न चले इसलिए धनबल का इस्तेमाल हुआ, यह लोकतंत्र के लिए घातक है। दोनों धर्मों के कुछ कट्टरवादियों को हम जरूर कम करेंगे और नफरत की राजनीति को मिट्टी में मिला देंगे,

मुस्लिमों को न्याय नहीं दिया

AIMIM नेता इरशाद जहांगीरदार सेक्युलर पार्टियों ने मुस्लिमों को न्याय नहीं दिया इसलिए उन्हें नकारा गया हिंदू बहुल इलाकों में भाजपा को रोकने में सेक्युलर पार्टियां पूरी तरह फेल रही। एमआईएम को विशिष्ट धर्म की पार्टी बताना गलत प्रचार है। दोनों धर्मों में कोई खाई नहीं है, उसे दूर करने का सवाल ही नहीं उठता।

भाजपा ने बड़े पैमाने पर की फंडिंग

शिवसेना शिंदे गुट के नेता महेश मिस्त्री ने किहा भाजपा की एमआईएम बी टीम है। भाजपा ने बड़े पैमाने पर फंडिंग की इसलिए उनकी 10 सीटें जीतीं। हिंदू-मुस्लिम में कोई खाई नहीं है, दोनों धर्मों के धर्मयोद्धा चुनाव के वक्त जागते हैं, बाद में गुण्यागोविंद से रहते हैं।

– नवभारत लाइव के लिए धुले से वाहिद काकर की रिपोर्ट

Dhule municipal election results religious polarization bjp aimim

Get Latest   Hindi News ,  Maharashtra News ,  Entertainment News ,  Election News ,  Business News ,  Tech ,  Auto ,  Career and  Religion News  only on Navbharatlive.com

Published On: Jan 19, 2026 | 01:45 PM

Topics:  

  • AIMIM
  • BJP
  • Dhule
  • Maharashtra
  • Maharashtra Local Body Elections

Popular Section

  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • वेब स्टोरीज़

States

  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्यप्रदेश
  • दिल्ली NCR
  • बिहार

Maharashtra Cities

  • मुंबई
  • पुणे
  • नागपुर
  • ठाणे
  • नासिक
  • अकोला
  • वर्धा
  • चंद्रपुर

More

  • वायरल
  • करियर
  • ऑटो
  • टेक
  • धर्म
  • वीडियो

Follow Us On

Contact Us About Us Disclaimer Privacy Policy Terms & Conditions Author
Marathi News Epaper Hindi Epaper Marathi RSS Sitemap

© Copyright Navbharatlive 2026 All rights reserved.