AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी, एकनाथ शिंदे व अजित पवार (डिजाइन फोटो)
Asaduddin Owaisi Dhule Rally: महाराष्ट्र के धुले में आयोजित एक रैली के दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने विपक्षी दलों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने मुंबई ट्रेन ब्लास्ट के पीड़ितों का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस के आरोपों का जवाब दिया और उपमुख्यमंत्री अजित पवार की राजनीतिक निष्ठा पर कटाक्ष किया।
धुले की जनसभा में एआईएमआईएम (AIMIM) सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कांग्रेस द्वारा उनकी पार्टी को भाजपा की ‘बी-टीम’ कहे जाने वाले आरोपों पर तल्ख प्रतिक्रिया दी। ओवैसी ने कहा कि ऐसे आरोप केवल सच्चाई से ध्यान भटकाने की एक कोशिश मात्र हैं। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने मुंबई ट्रेन धमाकों का जिक्र करते हुए न्याय प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि उन धमाकों में 185 भारतीयों की जान गई थी, जिसके आरोप में 11 मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया गया था।
असदुद्दीन ओवैसी ने जनता को झकझोरते हुए कहा कि वे 11 लोग करीब 19 साल तक जेल में बंद रहे; उन्होंने लोगों से उन युवाओं के बारे में सोचने को कहा जिन्होंने अपनी जिंदगी के बेशकीमती 19 साल सलाखों के पीछे गुजार दिए।
महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीति पर टिप्पणी करते हुए ओवैसी ने उपमुख्यमंत्री अजित पवार को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने अजित पवार के अपने चाचा शरद पवार से अलग होने के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो व्यक्ति अपने ही परिवार और चाचा के सामने खड़ा नहीं हो सका, उसके पीछे आंख बंद करके चलने वाले समर्थकों का क्या भविष्य होगा। ओवैसी ने एक बड़ी भविष्यवाणी करते हुए दावा किया कि आने वाले पांच सालों में जब फिर से चुनाव होंगे, तब न तो एकनाथ शिंदे राजनीति के केंद्र में रहेंगे और न ही अजित पवार। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उस समय केवल असदुद्दीन ओवैसी की ‘जमात’ (पार्टी) ही मैदान में मजबूती से डटी रहेगी।
एआईएमआईएम प्रमुख ने संसद में अपने संघर्षों को याद करते हुए खुद को जनता की असली आवाज बताया। उन्होंने जिक्र किया कि संसद में जब बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान के खिलाफ कुछ कानून लाए गए थे, तब उन्होंने विरोध स्वरूप उन कानूनों की प्रति फाड़कर सदन के फर्श पर फेंक दी थी। अजित पवार पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने सवाल किया कि क्या उनमें ऐसा कदम उठाने का साहस है?
ओवैसी ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी जनता के अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों के लिए लड़ती रहेगी। एक अनुशासित विचारधारा किसी मजबूत बरगद के पेड़ की तरह होती है, जो मौसम बदलने पर भी अपनी जगह टिकी रहती है, जबकि स्वार्थ पर आधारित गठबंधन उन मौसमी पौधों की तरह होते हैं जो अगली बारिश तक अपनी पहचान खो देते हैं।