Middle East Tension Trade Impact( Source: Social Media )
Middle East Tension Trade Impact: धुले अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक उथल-पुथल का सीधा और कड़वा असर अब उत्तर महाराष्ट्र की प्याज मंडियों में दिखने लगा है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच गहराते विवाद के कारण समुद्री माल बुलाई पूरी तरह चरमरा गई है।
इसका सबसे बड़ा खामियाजा प्याज उत्पादक किसानों को भुगतना पड़ रहा है। पिछले 15 दिनों से भारत से होने वाला प्याज का निर्यात लगभग ठप हो गया है, जिससे स्थानीय मंडियों में प्याज की कीमतें औंधे मुंह गिर गई हैं।
समंदर में ‘युद्ध’ के बादल, मंडियों में किसानों के आंसू भारत से प्याज का बड़ा हिस्सा सऊदी अरब, इंडोनेशिया, दुबई, मलेशिया और थाईलैंड जैसे देशों को भेजा जाता है।
वर्तमान में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के रास्तों पर व्यापारिक जहाजों की आवाजाही पर लगे प्रतिबंधों और सुरक्षा कारणों से सप्लाई चेन पूरी तरह टूट चुकी है।
स्थिति इतनी गंभीर है कि निर्यातक जहाजों का दोगुना किराया देने को भी तैयार हैं, लेकिन कोई भी शिपिंग कंपनी इस जोखिम भरे रास्ते पर माल ले जाने का साहस नहीं दिखा रही है।
नासिक, पुणे, गुजरात और इंदौर जैसी बड़ी मंडियों का निर्यात रुका होने के कारण पूरा स्टॉक अब घरेलू बाजारों में डंप हो रहा है। धुले कृषि उपज मंडी समिति और निजी बाजारों में आवक तो भरपूर है, लेकिन खरीदार नदारद हैं।
प्याज की कीमतें फिलहाल 700 से 1100 रुपये प्रति क्विंटल के बीच झूल रही हैं। किसानों का कहना है कि बीज, खाद, बिजली और परिवहन का खर्च जोड़ लिया जाए, तो 1000 रुपये का भाव लागत भी नहीं निकाल पा रहा है। ऐसे में 700 रुपये का दाम उनके लिए काफी नुकसानदायक है।
बाजार विशेषज्ञों और बड़े व्यापारियों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समुद्री गलियारों में शांति बहाल नहीं होती, तब तक यह अनिश्चितता बनी रहेगी।
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कीमतों में सुधार केवल तभी संभव है जब निर्यात की खिड़की दोबारा पूरी तरह खुले। इस बीच, कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे केवल ताजे माल की बिक्री पर निर्भर रहने के बजाय आधुनिक भंडारण और प्रसंस्करण जैसे विकल्पों को अपनाएं ताकि ऐसी वैश्विक आपदाओं के समय भारी नुकसान से बचा जा सके।