शिरूर में स्वास्थ्य व्यवस्था शर्मसार: अस्पताल ने भर्ती से किया इनकार, गर्भवती ने सड़क पर दिया बच्चे को जन्म
Shirur News: शिरूर में एक गर्भवती महिला को अस्पताल में भर्ती करने से इनकार किया गया, जिसके कारण उसे सड़क पर ही प्रसव करना पड़ा। स्थानीय महिलाओं और नगरसेविकाओं ने मदद की।
Shirur Delivery on Road: एक गर्भवती महिला को ग्रामीण अस्पताल में भर्ती करने से इनकार किए जाने के बाद उसे सड़क पर ही प्रसव करना पड़ा। यह हैरान करने वाली घटना शनिवार को शिरूर शहर में घटी। समय रहते स्थानीय महिलाओं और नगरसेविकाओं ने मौके पर पहुंचकर महिला की मदद की और सुरक्षित प्रसव कराया।
शिरूर के निर्माण प्लाजा परिसर में महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हुई, लेकिन ग्रामीण अस्पताल में भर्ती नहीं किए जाने के कारण उसकी सड़क पर ही डिलीवरी हो गई। इस दौरान रास्ते से गुजर रहे एक व्यक्ति ने घटना की सूचना डॉ. संतोष पोटे को दी।
सूचना मिलते ही शिरूर नगर परिषद की जलापूर्ति समिति की सभापति डॉ. सुनीता पोटे, नगरसेविका पूजा पोटावले और स्थानीय महिलाएं स्मिता पाटिल, प्रियंका गोरे, वृषाली बोरकर, सुवर्णा चिपाडे और तनुजा अवचिते मौके पर पहुंचीं।
सम्बंधित ख़बरें
Nashik News: कावनई में गंगा-गोदावरी पूजन, सिंहस्थ से पहले कपिलधारा के विकास को गति
दिल्ली जाने की अटकलों पर CM देवेंद्र की दो टूक, कहा- मैं मुंबई और महाराष्ट्र में ही रहूंगा
आषाढ़ी वारी: पहली बार एयर एम्बुलेंस की सुविधा, ‘आरोग्यसंपन्न वारी’ ऐप से 1.08 लाख श्रद्धालुओं ने उठाया लाभ
Thane News: बदलापुर के कालू झरने में बड़ा हादसा, तेज बहाव में बहने से दो युवकों की मौत
महिलाओं ने तत्काल आसपास के लोगों की मदद से साड़ियों और स्कार्फ का घेरा बनाकर प्रसूता की गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित की। पास के पडवल परिवार ने साड़ियां उपलब्ध कराईं, जबकि रिक्शा चालकों और मेडिकल दुकानदारों ने भी सहयोग किया। प्रसव के बाद नवजात की नाल काटकर जरूरी प्रक्रिया पूरी की गई।
मां और बच्चे दोनों की हालत स्थिरशुरुआत में बच्चा रो नहीं रहा था, लेकिन डॉ. सुनीता पोटे ने चिकित्सकीय तरीके से उसे रुलाया, जिसके बाद वहां मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली और तालियों की गड़गड़ाहट के साथ नवजात का स्वागत किया।
आपातकाल के दौरान के प्रमुख क्षण
- पास में होने के बावजूद महिला अस्पताल नहीं पहुंच सकी।
- स्थानीय लोगों ने तुरंत डॉ. सुनीता पोटे को सूचित किया।
- तत्काल मूल्यांकन से आगे की गतिविधि की संभावना खारिज हो गई।
- डिलीवरी सड़क पर सुरक्षित रूप से संपन्न हुई।
- निवासियों ने उपलब्ध संसाधनों से सहायता प्रदान की।
घटना के बाद मां और नवजात को मीरा नर्सिंग होम ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार दिया गया। डॉ. सुनीता पोटे ने बताया कि फिलहाल मां और बच्चे दोनों की हालत स्थिर है। ग्रामीण अस्पताल की कार्यप्रणाली पर उठे सवालइस घटना के बाद ग्रामीण अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं संकट की घड़ी में मदद के लिए आगे आने वाली महिलाओं, नगरसेविकाओं और स्थानीय नागरिकों की सराहना की जा रही है।
