महिला सुरक्षा सुशासन की कसौटी, अपराध पर शून्य सहनशीलता जरूरी, विजया रहाटकर ने पुलिस को दिए निर्देश

National Commission For Women: राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने महिला सुरक्षा को सुशासन की कसौटी बताया। साइबर अपराध और AI ठगी से निपटने पुलिस की तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया।
vijaya rahatkar women safety cyber crime police training
विजया रहाटकर(सोर्सः सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Cyber Crime Craining For Police: महिलाओं की सुरक्षा केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि सुशासन की महत्वपूर्ण कसौटी है। अपराध के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति अपनाते हुए पीड़ित महिलाओं के प्रति अधिकतम संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए। पीड़िता की बात बिना किसी पूर्वाग्रह के धैर्यपूर्वक सुनना और उसके सम्मान की रक्षा करना प्रभावी पुलिस व्यवस्था का मूल सूत्र होना चाहिए, ऐसा प्रतिपादन राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने किया।

राष्ट्रीय महिला आयोग और महाराष्ट्र पुलिस की ओर से ‘शक्ति व सुरक्षा’ कार्यक्रम के तहत साइबर अपराधों के खिलाफ पुलिस की क्षमता बढ़ाने के लिए आयोजित कार्यशाला में रहाटकर बोल रही थीं। इस अवसर पर राष्ट्रीय महिला आयोग के सदस्य सचिव सुदीप जैन, मुंबई उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायमूर्ति साधना जाधव, महिला अपराध प्रतिबंधक विभाग की विशेष पुलिस महानिरीक्षक शारदा राऊत, पुलिस आयुक्त प्रवीण पवार, पुलिस अधीक्षक प्रकाश जाधव, राज्य महिला आयोग की सदस्य सचिव नंदिनी आवाडे, पुलिस उपायुक्त पंकज अतुलकर सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

केवल शिकायत या प्राथमिकी दर्ज करना पर्याप्त नहीं

रहाटकर ने कहा कि महिला की शिकायत स्वीकार करने या प्राथमिकी दर्ज करने के बाद पुलिस की जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती। पीड़िता को एकल खिड़की केंद्र, संरक्षण अधिकारी और नि:शुल्क कानूनी सहायता की जानकारी देकर संबंधित व्यवस्था से जोड़ना जरूरी है। पुलिस, संरक्षण अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा अन्य विभागों के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीड़िता के प्रति किसी प्रकार का पूर्वाग्रह नहीं होना चाहिए। उसे पर्याप्त समय देकर बिना बीच में रोके उसकी बात सुननी चाहिए। घटना के आघात के कारण महिला को घटनाक्रम बताने में कठिनाई हो सकती है। ऐसे में जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने से बचना चाहिए। सम्मानजनक व्यवहार से पुलिस के प्रति पीड़िता का विश्वास मजबूत होता है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता से होने वाले अपराध भी चुनौती

बदलते समय के साथ अपराधों का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। साइबर अपराध, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से होने वाली ठगी, फर्जी वीडियो और डिजिटल आर्थिक धोखाधड़ी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए पुलिस को तकनीक, सूचना और वैज्ञानिक तरीकों का प्रभावी उपयोग करना होगा। महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी देना भी आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से लेने तथा निष्पक्ष और समयबद्ध जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ‘सुरक्षित महिला, सक्षम समाज और सक्षम समाज, सक्षम राष्ट्र’ के सूत्र को ध्यान में रखते हुए सभी विभागों को मिलकर काम करना चाहिए।

पुलिस महिलाओं के लिए सरकार का पहला द्वार

राष्ट्रीय महिला आयोग के सदस्य सचिव सुदीप जैन ने कहा कि जब कोई पीड़ित महिला पुलिस थाने पहुंचती है तो पुलिस उसके लिए सरकार का पहला द्वार होती है। इसलिए उसकी बात संवेदनशीलता और बिना पूर्वाग्रह के सुनी जानी चाहिए। शिकायत में देरी को लेकर पीड़िता से सवाल नहीं किए जाने चाहिए और उस पर जबरन समझौते का दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मामले में मजबूत साक्ष्य जुटाकर कानूनी जिम्मेदारी पूरी करनी चाहिए। साथ ही पीड़िता के सम्मान की रक्षा करते हुए उसे आवश्यक सहायता उपलब्ध करानी चाहिए। संवेदनशील पुलिस व्यवहार पीड़िता के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

साइबर अपराधों की जांच में तकनीकी दक्षता जरूरी

पुलिस आयुक्त प्रवीण पवार ने कहा कि डिजिटल युग में साइबर अपराध लगातार जटिल होते जा रहे हैं। इन अपराधों की प्रभावी जांच के लिए पुलिस की तकनीकी क्षमता बढ़ाना जरूरी है। दोषसिद्धि का प्रमाण बढ़ाने के लिए जांच की आधुनिक पद्धतियों का प्रभावी इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध पीड़ितों को तत्काल सहायता देने के लिए सक्षम और त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था विकसित करना आवश्यक है। तकनीकी दक्षता के साथ पीड़ितों से संवेदनशील संवाद भी उतना ही महत्वपूर्ण है। पुलिस को पीड़ित-केंद्रित कार्यप्रणाली अपनानी चाहिए।

vijaya rahatkar women safety cyber crime police training
छत्रपती संभाजीनगर में स्वच्छता के लिए सड़क पर उतरे अमोल येडगे, धूम्रपान करते मिले मनपा कर्मचारी को थमाया नोटिस

350 पुलिसकर्मियों ने लिया प्रशिक्षण

विशेष पुलिस महानिरीक्षक शारदा राऊत ने बताया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बढ़ते साइबर अपराधों की प्रभावी तकनीकी जांच और दोषसिद्धि का प्रमाण बढ़ाना है। साथ ही पुलिस में पीड़ित-केंद्रित संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित कर सक्षम और त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था तैयार करने पर जोर दिया गया।

कार्यशाला में छत्रपति संभाजीनगर शहर एवं ग्रामीण, जालना, धाराशिव, बीड, हिंगोली, परभणी, नांदेड, लातूर तथा रेलवे पुलिस दल के अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। साइबर पुलिस थानों, अपराध शाखा और महिला सहायता कक्ष के 150 पुलिस अधिकारी तथा 200 पुलिसकर्मियों, यानी कुल 350 पुलिसकर्मियों ने प्रशिक्षण में हिस्सा लिया।

Navbharat Live
navbharatlive.com