नागपुर साइबर थान सवालों के घेरे में, बढ़ते ऑनलाइन अपराधों के बीच जांच से ज्यादा 'वसूली तंत्र' की चर्चा तेज

Nagpur Cyber Crime Police Station: नागपुर में बढ़ते साइबर अपराध के बीच विशेष साइबर थाने की कार्यप्रणाली और शिकायतों के निपटारे पर सवाल उठे हैं। जांच, जवाबदेही और कथित साठगांठ को लेकर चर्चा तेज है।
Nagpur Cyber ​​Police Station Under Scrutiny: Amidst Rising Online Crimes, Talk of an 'Extortion Racket' Gains Momentum Over Actual Investigations.
नागपुर साइबर क्राइम थाना,(प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur Online Fraud Investigation: नागपुर शहर की आबादी के साथ ही साइबर क्राइम के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ठगी की इन वारदातों पर काबू पाना मुश्किल है। साइबर क्राइम पुलिस के लिए बड़ी चुनौती साबित हो रहे हैं। यही कारण था कि क्राइम ब्रांच की साइबर सेल को थाने का रूप दिया गया। ऐसे मामलों के निपटारे के लिए स्वतंत्र पुलिस थाना बनाया गया। उम्मीद थी कि इससे साइबर क्राइम से जुड़े प्रकरणों की जांच को गति मिलेगी। हुआ भी कुछ ऐसा ही।

पहले की तुलना में प्रकरणों की जांच में तेजी आई और थाने में शिकायतों का तांता लगने लगा। आए दिन दर्जनों शिकायतें सामने आने लगीं। सिटी पुलिस का यह थाना 'सोने का अंडा' देने वाली मुर्गी बन गया।

यहां आने वाले साइबर क्राइम से जुड़े मामलों में साठगांठ होने लगी, काम कम और वसूली तंत्र बढ़ गया। काम का बोझ बढ़ता जा रहा था और सीपी रवींद्रकुमार सिंगल को कार्यप्रणाली से जुड़ीं शिकायतें भी मिलने लगीं। पहले इस थाने में अधिकारी का एकछत्र राज था क्योंकि थानेदार भी एक ही था। एक ही अधिकारी के नेतृत्व में सारा काम किया जा रहा था।

ऐसे में सीपी ने साइबर पुलिस थाने को 2 हिस्सों में बांटने का निर्णय लिया। एक साइबर उत्तर विभाग और दूसरा साइबर दक्षिण विभाग। दोनों ही विभागों के लिए थानेदार (इंचार्ज) नियुक्त किए गए। जब से साइबर पुलिस स्टेशन का विभाजन हुआ है तब से वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गई। यहां होने वाली बंदरबांट इसका मुख्य कारण बन गई।

दोनों थानेदारों के अधीन अधिकारी और कर्मचारियों के भी 2 गुट बन गए। जो लोग एक साथ मिलकर काम कर रहे थे वो ही एक दूसरे के दुश्मन बन गए। रंजिश इतनी बढ़ गई कि एक दूसरे को नुकसान पहुंचाने के लिए नई मुहिम शुरू हो गई। प्रकरणों की जांच एक तरफ रह गई और सभी दूसरों की जांच की खामियां ढूंढने लगे।

आला अधिकारी भी परेशान वैसे बताया जाता है कि थाने में आने वाली शिकायतों की तुलना में साइबर पुलिस थाने में स्टाफ की काफी कमी है। शिकायतों की संख्या बढ़ती जा रही है लेकिन इन शिकायतों की तुलना में मैनपावर कम है। उस पर भी आपसी राजश के कारण काम प्रभावित हो रहा है। पहले एक थाना और एक विभाग था।

ऐसे में डीसीपी लोहित मतानी को सभी गतिविधियों की निगरानी का जिम्मा सौंपा गया लेकिन साइबर के अलावा उन पर शहर की यातायात व्यवस्था की भी जिम्मेदारी है। ऐसे में 2 विभाग बन गए और डीसीपी जोन-1 एस। ऋषिकेश रेड्डी को साउथ विभाग की जिम्मेदारी दी गई। बताया जाता है कि अब दोनों ही यहां होने वाली गतिविधियों से परेशान हैं।

चर्चा का विषय बना 500 रुपये का केस

पिछले दिनों साउथ विभाग के थाने में दर्ज हुई एक शिकायत को लेकर तो मानो दोनों गुटों में युद्ध छिड़ गया। थाने में 500 रुपये की धोखाधड़ी के एक मामले में एफआईआर दर्ज हुई। यह मामला भी अपने आप में चौंकाने वाला था। प्रकरण दर्ज होते ही टीम पुणे रवाना हुई क्योंकि लिंक मिली थी एक व्यवसायी की। क्रिकेट सट्टा सहित विभिन्न ऑनलाइन गेम के इस फ्रॉड में टीम ने व्यापारी को घेरा, इस प्रकरण में लाखों की वसूली हुई। अधिकारियों को गुमराह किया गया और 'लक्ष्मी दर्शन' करके टीम नागपुर लौट आई। जैसे ही दूसरे गुट को इसकी जानकारी मिली तो खबर जंगल में आग की तरह फैलने लगी। इस प्रकरण की जानकारी बेहद खुफिया तरीके से मीडिया तक भी पहुंचाई गई। जांच अधिकारी ने दूसरे गुट के सिपाही को लपेट लिया। अपने कार्यालय में बुलाकर बंधक बनाकर पीटा। मोबाइल की जांच करवाने के लिए दबाव डाला गया। सिपाही वहां से भागा और फिर लौटा ही नहीं। मारपीट के बाद सिपाही के लापता होने की खबर से आला अधिकारियों का भी पसीना छूट गया। बाद में सिपाही के वापस लौटने के चाद प्रकरण शांत हुआ।

एक दूसरे के काम में कर रहे हैं दखलंदाजी

दोनों गुट आंख मूंदकर दूध पीने का काम कर रहे हैं लेकिन इससे नुकसान सामान्य लोगों का हो रहा है जी अपनी शिकायतों को लेकर थाने के चक्कर काट रहे है। बताया जाता है कि थानों में पीड़ित लोगों को भी परेशान किया जाता है। जो पहले ही लुट गया हो उससे वसूली करना कहां तक जायज है।

हालांकि इस अनियमितता की शिकायत मिलने के बाद सीपी सिगल ने एक एसओपी ही तैयार कर दी है लेकिन गुटबाजी इतनी भयानक है कि एक दूसरे के दस्तावेज और प्रकरणों से भी छेडछाड की जा रही है। एक दूसरे को जानकारी दिए बगैर ही खाते फ्रीज और अनाज किए जा रहे हैं। भले ही कार्यप्रणाली बदल गई हो लेकिन सीसीटीएनएस में साइबर थाना एक ही है। यदि 2 थाने हैं तो दोनों की अलग एंट्री और स्टेशन डायरी भी स्वतंत्र होनी चाहिए।

-नवभारत लाइव के लिए नागपुर से अभिषेक तिवारी की रिपोर्ट

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