

Maharashtra SIR Controversy: चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठाने के बजाय राजनीतिक दलों को उपलब्ध प्रक्रिया में सहभागी बनकर मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने की दिशा में काम करना चाहिए। यह बात राज्य की पशुपालन तथा पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री पंकजा मुंडे ने आयोजित पत्रकार वार्ता में कही।
पंकजा मुंडे ने कहा कि तीनों चुनाव आयुक्तों की हालिया पत्रकार वार्ता से यह स्पष्ट हुआ है कि विशेष गहन पुनरीक्षण सहित चुनाव संबंधी प्रक्रिया पर आयोग के भीतर सहमति रही है। ऐसे में राहुल गांधी और उनके सहयोगियों की ओर से खड़ा किया गया कथित भ्रामक प्रचार तथ्यों की कसौटी पर खरा नहीं उतरता।
चुनाव आयोग के तीनों आयुक्तों ने प्रक्रिया में किसी प्रकार के मतभेद से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर पैदा किए गए भ्रम से जनता का संवैधानिक संस्थाओं पर विश्वास कमजोर होता है। पंकजा मुंडे ने स्पष्ट किया कि संविधान का सम्मान करने का अर्थ संविधान द्वारा बनाई गई संस्थाओं का सम्मान करना भी है। चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के प्रति जनता का विश्वास बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। हालिया विवाद के बीच आयोग ने भी कहा है कि विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे।
पंकजा मुंडे ने मंत्रिमंडल सचिव को भेजे गए पत्र को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि यह पत्र किसी नीतिगत अथवा महत्वपूर्ण राजनीतिक निर्णय से संबंधित नहीं था। यह प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत एक अधिकारी की नियुक्ति से संबंधित पत्र था। पंकजा मुंडे ने कहा कि इस सामान्य प्रशासनिक पत्र को चुनाव आयोग के भीतर मतभेद का आधार बताना उचित नहीं है।
पंकजा मुंडे ने इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीनों को लेकर बार-बार लगाए जा रहे आरोपों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि ईवीएम के संबंध में उच्चतम न्यायालय का निर्णय पहले ही सामने आ चुका है और चुनाव आयोग की ओर से ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर चुनौती का भी उल्लेख किया गया है। इसके बावजूद बार-बार इसी विषय को उठाकर चुनाव आयोग पर निशाना साधने का प्रयास जनता में अनावश्यक भ्रम पैदा करता है। पंकजा मुंडे ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया पर प्रश्न उठाने के बजाय यदि किसी दल के पास ठोस प्रमाण हैं, तो उन्हें निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से सामने रखना चाहिए।
पंकजा मुंडे ने कहा कि प्रत्येक चुनाव में जीत और हार होती है। किसी राजनीतिक दल की हार का पूरा दोष चुनाव आयोग पर डालना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि जनता किसी दल या उम्मीदवार को स्वीकार नहीं करती, तो उसके निर्णय को समझना और उसके आधार पर काम करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। पंकजा मुंडे ने कहा कि लोकतंत्र में जनता के निर्णय को स्वीकार करना और उसका सम्मान करना आवश्यक है।
पंकजा मुंडे ने पश्चिम बंगाल के 15 विधानसभा क्षेत्रों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कम होने का दावा किया जाता है, लेकिन जिन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की बात कही गई, वहां तृणमूल कांग्रेस को जीत मिली। पंकजा मुंडे ने सवाल उठाया कि यदि हटाए गए मतदाता मुख्य रूप से भाजपा समर्थक थे, जैसा दावा किया जा रहा है, तो इन क्षेत्रों में तृणमूल कांग्रेस की जीत को किस आधार पर समझाया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे विषयों का राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय तथ्य और आंकड़ों के आधार पर परीक्षण होना चाहिए।
पंकजा मुंडे ने कहा कि मतदाता सूची का नियमित अद्यतन आवश्यक है। वर्ष 2004 के विशेष गहन पुनरीक्षण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि समय के साथ लोगों के स्थानांतरण के कारण मतदाता सूची में परिवर्तन स्वाभाविक है। ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरों में बड़े पैमाने पर लोगों का स्थानांतरण होता है। कई नागरिकों के नाम पुराने गांव और नए शहर, दोनों स्थानों पर दर्ज होने की संभावना रहती है। इसलिए मतदाता सूची के नियमित शुद्धीकरण की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है।
पंकजा मुंडे ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए। प्रत्येक दल को अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से बूथ स्तर पर मतदाता सूची की जांच में सहयोग करना चाहिए। यदि किसी नाम अथवा विवरण में त्रुटि दिखाई देती है, तो उसके प्रमाण संबंधित निर्वाचन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए जाने चाहिए।
पंकजा मुंडे ने राजनीतिक दलों से अपील की कि चुनाव आयोग पर आरोप लगाने के बजाय उपलब्ध प्रक्रिया में सहभागी बनें। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में किसी प्रकार की त्रुटि होने पर संबंधित दस्तावेजों और प्रमाणों के साथ उसे निर्वाचन तंत्र के सामने रखना चाहिए। पंकजा मुंडे ने कहा कि जनता के निर्णय का सम्मान, आत्ममंथन और संवैधानिक संस्थाओं में विश्वास बनाए रखना लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है। इस वक्त राज्य के ओबीसी विकास मंत्री अतुल सावे, महापौर समीर राजूरकर, विधायक प्रशांत बंब,भाजपा शहर जिल्हाध्यक्ष किशोर शितोले, सभापती अनिल मकरीये आदि उपस्थित थे।