मराठवाड़ा के किसानों के साथ खड़े होने की अपील, जस्टिस वराले बोले- कानून सिर्फ पेशा नहीं, न्याय का माध्यम है

Justice Prasanna Varale Law Students: सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति प्रसन्ना वराले ने अधिवक्ताओं से संविधान की रक्षा, सत्य का पक्ष लेने और वंचितों को न्याय दिलाने को अपना दायित्व बनाने की अपील की।
Justice Prasanna Varale Law Students Constitution Social Justice
न्यायमूर्ति प्रसन्ना वराले व अन्य(फोटो नवभारत)
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Law Students Constitution Social Justice: छत्रपति संभाजीनगर। कानून केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव स्वतंत्रता, सम्मान और सामाजिक न्याय का प्रभावी माध्यम है। भावी अधिवक्ताओं को संविधान की रक्षा, सत्य का पक्ष रखने और वंचित वर्गों को न्याय दिलाने को अपना दायित्व मानना चाहिए।

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति प्रसन्ना वराले ने यह बात शनिवार को कही। उन्होंने मराठवाड़ा के किसानों की मौजूदा कठिन परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में समाज के प्रत्येक वर्ग को किसानों के साथ खड़ा होकर उन्हें मानसिक और सामाजिक सहारा देना चाहिए।

माणिकचंद पहाड़े विधि महाविद्यालय की ओर से तापड़िया सभागार में ‘हाल के विधिक परिवर्तन और न्यायिक निर्णय’ विषय पर आयोजित कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर न्यायमूर्ति वराले संबोधित कर रहे थे।

किसानों के साथ खड़ा होने का आह्वान

कार्यक्रम में मराठवाड़ा लीगल एंड जनरल एजुकेशन सोसायटी की अध्यक्ष अधिवक्ता डॉ. कल्पलता पाटील-भारस्वाडकर, प्राचार्य डॉ. अपर्णा कोत्तापल्ले, समन्वयक अभय जाधव, कार्यक्रम समन्वयक अमृता कौर जोहर, प्रबंधन एवं प्रशासनिक परिषद के सदस्य, प्राध्यापक, आमंत्रित अतिथि और विद्यार्थी उपस्थित थे।

न्यायमूर्ति वराले ने कहा कि मराठवाड़ा के किसान वर्तमान में कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं। इसका प्रभाव केवल किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके परिवारों और शहरों में शिक्षा प्राप्त कर रहे बच्चों पर भी पड़ रहा है। ऐसे समय में समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार योगदान देना चाहिए। किसानों को संकट से उबरने का भरोसा और मानसिक सहारा देना आवश्यक है।

संविधान बदलते समय के साथ विकसित होने वाला जीवंत दस्तावेज

न्यायमूर्ति वराले ने कहा कि विधि के अध्ययन के दौरान बौद्धिक जिज्ञासा, नैतिक साहस, अनुशासन, ईमानदारी और कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना आवश्यक है। भारतीय संविधान की शक्ति केवल उसकी व्यवस्थाओं में नहीं, बल्कि उन्हें लागू करने वाले नागरिकों, न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं और लोक अधिकारियों की निष्ठा में भी निहित है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान बदलते समय के साथ विकसित होने वाला जीवंत दस्तावेज है। इसलिए सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी बदलावों को ध्यान में रखकर उसकी व्याख्या की जानी चाहिए। संविधान द्वारा दिए गए समानता और न्याय के मूल्यों को वास्तविक जीवन में लागू करने की जिम्मेदारी समाज के प्रत्येक व्यक्ति की है।

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नए आपराधिक कानूनों में तकनीक पर जोर

न्यायमूर्ति वराले ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों के लागू होने से न्याय प्रक्रिया में समय का महत्व और बढ़ गया है। तकनीक के माध्यम से जांच और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है। भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम में पीड़ितों को न्याय दिलाने, जांच में पारदर्शिता लाने और न्यायिक प्रक्रिया को गति देने पर विशेष जोर दिया गया है।

उन्होंने बताया कि तलाशी और जब्ती की वीडियो रिकॉर्डिंग, इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख तथा न्याय वैज्ञानिक जांच जैसी व्यवस्थाओं से आपराधिक न्याय प्रक्रिया में तकनीक का उपयोग बढ़ रहा है।

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विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत जरूरी

न्यायमूर्ति वराले ने विधि विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन के लिए नियमित अध्ययन और व्यापक पठन को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने मानिकचंद पहाड़े विधि महाविद्यालय के समृद्ध पुस्तकालय की सराहना की। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के पुस्तकों के प्रति प्रेम का उल्लेख करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से विधि की पुस्तकों के साथ अन्य विषयों का भी अध्ययन करने का आह्वान किया।

अधिवक्ता डॉ. कल्पलता पाटील-भारस्वाडकर ने विद्यार्थियों से संविधान का सम्मान करने, न्यायालयीन कार्यवाही का निरीक्षण करने और विधि का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने की अपील की। उन्होंने भाषा पर अधिकार, विधिक शोध और समाजसेवा के साथ तकनीक तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विवेकपूर्ण उपयोग करने की सलाह दी।

कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. अपर्णा कोत्तापल्ले और अभय जाधव ने भी विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर तीन वर्षीय विधि पाठ्यक्रम के 71वें और पांच वर्षीय विधि पाठ्यक्रम के 43वें बैच के विद्यार्थियों का स्वागत किया गया। ‘आविष्कार’ प्रतियोगिता में उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाले तेजल हिलगे और यश वरकड़ का न्यायमूर्ति वराले के हाथों सम्मान किया गया।

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