छत्रपति संभाजीनगर: 42 घंटे मलबे में दबा रहा मजदूर, घर लौटा सिर्फ शव स्लैब हादसे में गई जान; पीछे छूटे दो बच्चे

Chikalthana Building Slab Collapse: छत्रपति संभाजीनगर के चिकलथाना में निर्माणाधीन इमारत का स्लैब गिरने से मजदूर ज्ञानेश्वर विटनोर की मौत हो गई। 42 घंटे बाद शव मिला, जमीन मालिक समेत चार पर केस दर्ज।
Sambhajinagar Chikalthana Building Slab Collapse Worker Death
प्रतीकात्मक तस्वीरसोर्स: सोशल मीडिया
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Highlights

  • चिकलथाना में निर्माणाधीन व्यावसायिक इमारत का स्लैब गिरने से हुआ हादसा।

  • 33 वर्षीय मजदूर ज्ञानेश्वर विटनोर का शव 42 घंटे बाद मलबे से निकाला गया।

  • मृतक के परिवार में बुजुर्ग माता-पिता, पत्नी और दो बच्चे हैं।

  • जमीन मालिक रजा खान समेत चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज।

  • निर्माण अनुमति और मनपा की निरीक्षण व्यवस्था पर उठे सवाल।

Sambhajinagar Chikalthana Building Slab Collapse Worker Death: छत्रपति संभाजीनगर के चिकलथाना में निर्माणाधीन व्यावसायिक इमारत का स्लैब गिरने से मलबे में दबे 33 वर्षीय मजदूर ज्ञानेश्वर विटनोर का शव 42 घंटे बाद बरामद हुआ। हादसे के मामले में जमीन मालिक समेत चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। निर्माण बिना अनुमति कराए जाने के आरोप के बाद मनपा की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।

42 घंटे बाद मलबे से निकला मजदूर का शव

छत्रपति संभाजीनगर, परिवार का पेट पालने के लिए रोज मेहनत-मजदूरी करने वाले 33 वर्षीय ज्ञानेश्वर विटनोर की जिंदगी एक निर्माणाधीन इमारत के मलबे में खत्म हो गई। चिकलथाना क्षेत्र में व्यावसायिक इमारत का स्लैब गिरने से वह मलबे में दब गए थे। करीब 42 घंटे तक चले बचाव अभियान के बाद शनिवार सुबह उनका शव बरामद किया गया। दो दिनों तक परिवार की निगाहें बचाव दल के प्रयासों पर टिकी रहीं, लेकिन अंत में घर में खुशियों की जगह मातम छा गया।

जालना रोड स्थित चिकलथाना क्षेत्र में करीब 4 हजार वर्गफुट जमीन पर व्यावसायिक इमारत का निर्माण किया जा रहा था। गुरुवार को अचानक निर्माणाधीन इमारत का स्लैब ढह गया। उस समय ज्ञानेश्वर वहां सेंटिंग का काम कर रहे थे। हादसे में वह मलबे के नीचे दब गए, जबकि तीन अन्य मजदूर किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहे।

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पीछे छूट गए बुजुर्ग माता-पिता और दो बच्चे

गारखेडा क्षेत्र के साईनगर निवासी ज्ञानेश्वर परिवार के इकलौते बेटे थे। उनके परिवार में बुजुर्ग माता-पिता, पत्नी, 11 वर्षीय बेटी निकिता और 9 वर्षीय बेटा देवा हैं। सेंटिंग का काम करके मिलने वाली रोजाना की मजदूरी से ही परिवार का गुजारा चलता था।

बच्चों को शुरुआत में पिता की मौत की जानकारी नहीं दी गई थी। शनिवार शाम करीब 5.30 बजे जब उनका पार्थिव शरीर घर पहुंचा, तो बेटी निकिता खुद को संभाल नहीं सकी। पिता का चेहरा देखते ही वह रोते हुए उन्हें उठाने और बात करने की गुहार लगाती रही। उसकी हालत देखकर छोटा भाई देवा भी फूट-फूटकर रोने लगा।

बुजुर्ग माता-पिता के लिए भी यह गहरा सदमा था। जिस बेटे के सहारे बुढ़ापे की जिंदगी बिताने की उम्मीद थी, उसी की अर्थी को कंधा देना पड़ा। शनिवार शाम करीब 6.30 बजे कैलासनगर श्मशानभूमि में गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया।

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जमीन मालिक समेत चार लोगों पर मामला दर्ज

मनपा के पावदे क्षेत्रीय कार्यालय के निरीक्षक राजेश जाधव की शिकायत पर एमआईडीसी सिडको पुलिस थाने में चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

शिकायत के अनुसार, जमीन मालिक रजा खान पर बिना अनुमति व्यावसायिक संकुल का निर्माण कराने का आरोप है। इस मामले में वास्तुकार हारिस सिद्दीकी, अभियंता फैजुद्दीन और ठेकेदार अशोक हरी राठौड़ की भूमिका भी बताई गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

मनपा की निर्माण निगरानी व्यवस्था पर सवाल

हादसे के बाद मनपा की निर्माण अनुमति और निरीक्षण व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। यदि निर्माण बिना अनुमति किया जा रहा था, तो संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली? क्षेत्र में तैनात इमारत निरीक्षक और सहायक आयुक्त ने कितने निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया था? अवैध निर्माणों के खिलाफ कितनी कार्रवाई की गई?

सड़क पर रेत रखने जैसे मामलों में जुर्माना लगाने वाली मनपा की व्यवस्था पर अब यह सवाल उठ रहा है कि कथित अवैध निर्माण को रोकने के लिए समय रहते कदम क्यों नहीं उठाए गए। हादसे के बाद इन सवालों के जवाब और जिम्मेदारी तय करने की मांग उठ रही है।