

Chhatrapati Sambhajinagar Certificate Delay: छत्रपति संभाजीनगर जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने में हो रही देरी को लेकर मंगलवार को महानगरपालिका की स्थायी समिति की बैठक में प्रशासन और नगरसेवकों के बीच तीखी बहस हुई। नगरसेवकों ने अधिकारियों पर जानबूझकर फाइलें रोकने और नागरिकों को महीनों तक कार्यालयों के चक्कर लगाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि प्रमाणपत्र समय पर नहीं मिलने के कारण नागरिक दलालों के चंगुल में फंस रहे हैं।
वहीं, सभी जोन अधिकारियों ने आंकड़ों के साथ सफाई देते हुए कहा कि हजारों आवेदकों को ऑनलाइन शुल्क जमा करने के लिए लिंक भेजी गई थी, लेकिन उन्होंने निर्धारित शुल्क का भुगतान ही नहीं किया। प्रशासन की इस सफाई के बाद नगरसेवक भी कुछ मामलों में पसोपेश में नजर आए।
बैठक में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक 1 अप्रैल से 17 अगस्त के बीच महानगरपालिका के 10 जोन कार्यालयों में जन्म प्रमाणपत्र के लिए 19,444 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 10,102 प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं, जबकि 9,342 आवेदन अब भी लंबित हैं।
इसी अवधि में मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए 2,701 आवेदन आए। इनमें से 1,244 प्रमाणपत्र जारी किए गए, जबकि 1,457 मामले लंबित हैं। इतनी बड़ी संख्या में आवेदन लंबित रहने पर नगरसेवकों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
नगरसेवक राजगौरव वानखेडे ने मुद्दा उठाते हुए कहा कि समय पर प्रमाणपत्र नहीं मिलने से नागरिक दलालों की तलाश करने लगते हैं। उन्होंने उस घटना का भी उल्लेख किया, जिसमें 5 हजार रुपये की रिश्वत लेते एक पूर्व कर्मचारी को भ्रष्टाचार निरोधक विभाग ने पकड़ा था। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से महानगरपालिका की छवि खराब हो रही है।
उन्होंने प्रत्येक जोन में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए तैनात कर्मचारियों की संख्या, स्थायी और ठेका पद्धति पर कार्यरत कर्मचारियों का अलग-अलग विवरण मांगा। साथ ही करीब नौ हजार आवेदन लंबित रहने का कारण स्पष्ट करने को कहा।
नगरसेवक सुरेंद्र कुलकर्णी ने सवाल किया कि जब नागरिक दो से तीन महीने तक प्रमाणपत्र के लिए कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है। अर्चना नीलकंठ ने जोन क्रमांक 1, 3 और 7 में बड़ी संख्या में प्रमाणपत्र लंबित होने का मुद्दा उठाया।
नगरसेवकों के आरोपों के जवाब में सभी जोन अधिकारियों ने लगभग एक जैसा स्पष्टीकरण दिया। अधिकारियों के अनुसार, कई आवेदनों में प्रमाणपत्र जारी करने के लिए निर्धारित शुल्क ऑनलाइन जमा करना आवश्यक है। जिन आवेदकों ने शुल्क जमा नहीं किया, उन्हें भुगतान के लिए ऑनलाइन लिंक भेजी गई। लेकिन लिंक भेजे जाने के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों ने भुगतान नहीं किया। इसी वजह से उन आवेदनों पर प्रमाणपत्र जारी नहीं किए जा सके।
अधिकारियों ने बताया कि 2,137 आवेदन फिलहाल प्रक्रिया में हैं, जबकि 3,239 आवेदन रद्द किए गए हैं। इसके अलावा 4,930 आवेदकों को शुल्क भुगतान के लिए लिंक भेजी गई है। हालांकि, जब नगरसेवकों ने अधिकारियों से पूछा कि आवेदन रद्द करने का वास्तविक कारण क्या है और ‘प्रक्रिया में’ होने का मतलब क्या है, तो अधिकारी स्पष्ट जवाब नहीं दे सके।
बैठक में हुई चर्चा से यह स्पष्ट हुआ कि जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्रों के लंबित रहने के लिए हर मामले में केवल महानगरपालिका को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कई आवेदकों की ओर से आवश्यक शुल्क ऑनलाइन जमा नहीं किए जाने के कारण भी प्रमाणपत्र जारी नहीं हो पाए हैं। दूसरी ओर, नगरसेवकों का आरोप है कि शुल्क जमा करने वाले और सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने वाले नागरिकों के प्रमाणपत्र भी समय पर नहीं मिल रहे।
इस तरह प्रमाणपत्र की पूरी प्रक्रिया में प्रशासनिक देरी के साथ आवेदकों की ओर से प्रक्रिया पूरी नहीं करने का मुद्दा भी सामने आया। अब जरूरत इस बात की है कि महानगरपालिका प्रत्येक लंबित आवेदन की अलग-अलग जांच कर यह स्पष्ट करें कि देरी प्रशासन की वजह से है या आवेदक की ओर से प्रक्रिया पूरी नहीं करने के कारण।
स्थायी समिति के सभापति अनिल मकरिये ने सभी जोन अधिकारियों से लंबित प्रमाणपत्रों के कारणों की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को सभी लंबित मामलों का निपटारा सात दिनों में करने के निर्देश दिए।
अतिरिक्त आयुक्त कल्पिता पिंपले ने कहा कि जिन आवेदकों ने शुल्क जमा नहीं किया और आवेदन को 60 दिन हो चुके हैं, उनके आवेदन रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारियों को बार-बार निर्देश देने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अब सात दिनों के भीतर प्रमाणपत्र जारी नहीं करने वाले संबंधित अधिकारी पर प्रत्येक प्रमाणपत्र के लिए 100 रुपये का दंड लगाया जाएगा।
नगरसेविका एड.माधुरी अदवंत ने चेताया कि स्थायी समिति के दबाव में अधिकारी जल्दबाजी में बिना दस्तावेजों की जांच किए प्रमाणपत्र जारी न करें। उन्होंने कहा कि जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज हैं। इसलिए समयबद्धता के साथ दस्तावेजों की जांच भी उतनी ही जरूरी है।