मुंबई BMC में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्रों का बढ़ा बैकलॉग, शादी, वीजा और एडमिशन की प्रक्रिया हो रही प्रभावित

Mumbai BMC News: मुंबई बीएमसी में जन्म व मृत्यु प्रमाणपत्रों के भारी बैकलॉग से शादी और वीजा प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं। बीएमसी ने 7 नए जिला रजिस्ट्रार पदों की मंजूरी मांगी है।
Backlog of birth and death certificates rises at Mumbai's BMC
अश्विनी भिडेसोर्स-सोशल मीडिया
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BMC Mumbai Birth Certificate Delay: बीएमसी में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों के लंबित मामलों का संकट अब आम नागरिकों के लिए गंभीर समस्या बनता जा रहा है।

प्रमाणपत्रों में सुधार और पुराने रिकॉर्ड के सत्यापन में हो रही देरी के कारण लोगों की शादी का पंजीकरण, विदेश जाने के लिए वीजा, विश्वविद्यालयों में प्रवेश और विदेशी नागरिकता अथवा स्थायी निवास से जुड़ी प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं।

बीएमसी ने भी स्वीकार किया है कि जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्रों के निस्तारण में बड़ा बैकलॉग बन चुका है और इसे दूर करने के लिए अतिरिक्त जिला रजिस्ट्रार नियुक्त करने की मंजूरी मांगी गई है।

बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े ने हाल ही में भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त को पत्र लिखकर सात अतिरिक्त जिला रजिस्ट्रार नियुक्त करने की अनुमति मांगी है।

बीएमसी का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था पर काम का अत्यधिक दबाव है, जिसके कारण वर्षों पुराने रिकॉर्ड के सत्यापन और अनुमोदन में लंबा समय लग रहा है।

बीएमसी के अनुसार मुंबई में जन्म और मृत्यु से जुड़े लगभग एक करोड़ पुराने रिकॉर्ड अब भी डिजिटाइज किए जाने बाकी हैं। हर दिन विभिन्न जिला रजिस्ट्रार कार्यालयों में 200 से 400 ऐड ओल्ड इवेंट आवेदन पहुंचते हैं, जबकि लगभग 1,000 आवेदन मंजूरी की प्रतीक्षा में लंबित हैं।

प्रमाणपत्रों में देरी की वजह से बढ़ रही लोगों की समस्याएं

नई नागरिक पंजीकरण प्रणाली (सीआरएस) के तहत प्रत्येक आवेदन के अनुमोदन के लिए आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर भेजे गए वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) की आवश्यकता होती है, जिसकी वैधता केवल 60 सेकंड रहती है।

 मुंबई बीएमसी का कहना है कि सीमित समय में इतनी बड़ी संख्या में आवेदनों का सत्यापन करना व्यावहारिक रूप से बेहद कठिन हो गया है। प्रमाणपत्रों में देरी का असर सीधे नागरिकों के निजी जीवन पर पड़ रहा है।

गोवा की एक महिला को जन्म प्रमाणपत्र में सुधार नहीं होने के कारण उसकी शादी का पंजीकरण टालना पड़ा। बांद्रा के डीसूजा परिवार का कहना है कि उनके रिश्तेदार के नीदरलैंड में स्थायी निवास आवेदन पर संकट खड़ा हो गया है।

क्योंकि डिजिटल जन्म प्रमाणपत्र जारी होने में कई महीने लग सकते हैं। विदेश में पढ़ाई के लिए जाने वाले छात्रों को भी प्रवेश और वीजा की समय-सीमा पूरी करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

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