नई जलापूर्ति योजना अंतिम चरण में, संभाजीनगर को मार्च अंत तक मिलेगा 200 MLD अतिरिक्त पानी
Sambhajinagar Urban Water Management: छत्रपति संभाजीनगर की नई जलापूर्ति परियोजना अंतिम चरण में पहुंच गई है। मार्च 2026 तक शहर को रोजाना 200 एमएलडी अतिरिक्त पानी मिलने का दावा प्रशासन ने किया है।
- Written By: अंकिता पटेल
Chhatrapati Sambhajinagar Water Supply Project ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Chhatrapati Sambhajinagar Water Supply Project: छत्रपति संभाजीनगर शहर की बहुप्रतीक्षित नई जलापूर्ति परियोजना अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। प्रशासन ने पाडवा के अवसर पर पहला पंप चालू करने की तैयारी तेज कर दी है। दावा किया जा रहा है कि मार्च 2026 के अंत तक शहर को प्रतिदिन 200 एमएलडी अतिरिक्त पानी मिलना शुरू हो जाएगा।
हालांकि परियोजना से जुड़े तकनीकी मुद्दों पर उच्च न्यायालय की निगरानी भी जारी है। मंगलवार को मनपा आयुक्त जी। श्रीकांत और महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण की मुख्य अभियंता मनीषा पलांडे ने संयुक्त रूप से परियोजना स्थलों का निरीक्षण कर प्रगति की समीक्षा की। अधिकारियों ने ठेकेदार कंपनी को निर्देश दिए कि शेष छोटे व बड़े सभी कार्य 15 दिनों में पूर्ण किए जाएं।
8 स्लैब को तोड़कर हो दोबारा निर्माण कार्य शुरू किया गया
नाथसागर जलाशय क्षेत्र में जल उपसा कुएं तक बनाई गई पुल संरचना पर पाइपलाइन की सहारा देने के लिए तैयार किए गए कुछ स्लैब गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे, निरीक्षण में कई स्थानों पर स्लैब और पाइप के बीच अंतर पाया गया।
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ऐसे आठ स्लैब तोड़कर दोबारा निर्माण कार्य शुरू किया गया है। निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि सफाई के बावजूद कुछ स्थानों पर स्लैब की लोहे की सरिया खुली हुई है और सेंट्रिग लटकी हुई है।
पलाडे ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी स्थान पर निर्माण सामग्री खुली नहीं छोड़ी जाए, मनपा के अग्निशमन विभाग की सहायता से अतिरिक्त सफाई कराने के निर्देश भी जारी किए गए।
आठ जलाशयों के निर्माण पर खर्च होंगे 10 करोड़ रुपए
परियोजना के अंतर्गत प्रस्तावित अवठ जलाशयों के निमर्माण से ठेकेदार कंपनी ने इंकार कर दिया है। इसके चलते इन कार्यों के लिए नई निविदा प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए है।
जिन कार्यों की प्रारंभिक लागत लगभग सात करोड़ रुपये आकी गई थी, अब उनकी लागत बढ़कर करीब दस करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को सुदृढ बनाने वाली यह परियोजना अंतिम चरण में जरूर है, लेकिन गुणवत्ता और तकनीकी खामियों के कारण प्रशासन पर दवाव बना हुआ है।
अदालत की निगरानी और समय सीमा के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मार्च 2026 तक शहरवासियों को वादा किया गया अतिरिक्त पानी वास्तव में मिल पाता है या नहीं।
2,740 करोड़ रुपये की योजना
करीब 2740 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी योजना की शहर की जल समस्या का स्थायी समाधान माना जा रहा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी परियोजना के लिए मार्च 2026 की समय सीमा निर्धारित की है।
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हालांकि इस परियोजना को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान कई तकनीकी त्रुटियां उजागर हुई थी। न्यायालय ने मनपा आयुक्त को स्वतंत्र शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह शपथ पत्र गुरुवार को प्रस्तुत किया जाएगा,
पाइप लाइन की चरणबद्ध सफाई के बाद ही जलापूर्ति
- अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पंप शुरू होने के तुरंत बाद जलापूर्ति शुरू नहीं की जाएगी।
- नई पाइप लाइन की चरणबद्ध सफाई की जाएगी। पांच-पांच किलोमीटर के खंडों में वाल्व के माध्यम से मिट्टी और अन्य अवशेष बाहर निकाले जाएंगे।
- इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम एक माह का समय लगेगा। ऐसे में पंप चालू होने के बाद भी नागरिकों को नियमित जलापूर्ति के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ेगी।
