Chandrapur Wildlife Update: करीब 6 दिन पहले हुई बाघ की मौत! पोंभुर्णा के जंगल में दुर्गंध के बाद सर्च ऑपरेशन
Chandrapur Forest Department: चंद्रपुर के पोंभुर्णा वन क्षेत्र में एक वयस्क बाघ का सड़ा-गला शव मिला है। मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है और अब फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट का इंतजार है।
- Written By: अंकिता पटेल
चंद्रपुर वन विभाग बाघ मृत्यु (सोर्स: नवभारत फाइल फोटो)
Chandrapur Tiger Death: चंद्रपुर जिले के पोंभुर्णा वन परिक्षेत्र के पिपरी दीक्षित गांव के समीप जंगल में एक वयस्क बाघ का शव शनिवार सुबह मिलने से हड़कंप मच गया। अत्यधिक सड़ी-गली अवस्था में मिले इस बाघ की मौत का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। पोस्टमार्टम के बाद भी वन विभाग मृत्यु के कारण का पता नहीं लगा सका है।
अब फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस रहस्यमय मौत से पर्दा उठने की उम्मीद है। शनिवार को जंगल क्षेत्र में दुर्गंध आने की सूचना मिलने पर वनकर्मियों ने खोज अभियान चलाया। इस दौरान पिपरी दीक्षित गांव के तालाब के पास स्थित जंगल में एक वयस्क बाघ का शव मिला।
सड़ी-गली हालत में मिला बाघ, फॉरेंसिक रिपोर्ट से खुलेगा मौत का रहस्य
शव की स्थिति को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि बाघ की मौत लगभग छह दिन पहले हुई होगी। घटना की जानकारी मिलते ही वरिष्ठ वन अधिकारी मौके पर पहुंचे। वन्यजीव पशु चिकित्सक डॉ. कुंदन पोडचलवार ने पशुपालन विभाग के अधिकारियों की सहायता से घटनास्थल पर ही पोस्टमार्टम किया।
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इस दौरान राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के प्रतिनिधि राजू कहीलकर तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक के प्रतिनिधि मुकेश भांदककर भी मौजूद थे। अधिकारियों के अनुसार शव इतनी अधिक सड़-गल चुका था कि न केवल मौत का कारण पता नहीं चल सका, बल्कि बाघ का लिंग तक निर्धारित नहीं किया जा सका।
मध्य चांदा वन मंडल के उपवन संरक्षक योगेश वाघाये ने बताया कि पोस्टमार्टम के दौरान विसरा नमूने एकत्र किए गए हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद ही मृत्यु का वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा।
फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद हो सकेगी पुष्टि
इस बीच जानकारी सामने आई है कि 12 जून को गांव के पास स्थित तालाब क्षेत्र में एक बाघ ने भैंसों के झुंड पर हमला किया था। हमले में कुछ भैंसें घायल हुई थीं, लेकिन झुंड के प्रतिरोध के कारण बाघ को पीछे हटना पड़ा था।
वन विभाग का अनुमान है कि उसी संघर्ष में बाघ गंभीर रूप से घायल हुआ होगा और संभवतः उन्हीं चोटों के कारण उसकी मौत हुई होगी। हालांकि, इस संभावना की पुष्टि भी फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद वन विभाग ने नियमानुसार घटनास्थल पर ही मृत बाघ के अवशेषों का अंतिम संस्कार कर दिया।
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उल्लेखनीय है कि इस वर्ष चंद्रपुर जिले में अब तक दो शावकों सहित कुल 12 बाघों की मौत हो चुकी है। ताजा घटना के बाद वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है।
