Sant Gadge Baba Amravati University (सोर्सः सोशल मीडिया)
Sant Gadge Baba Amravati University: संत गाडगे बाबा अमरावती विश्वविद्यालय ने बाबाजी दाते कला और वाणिज्य महाविद्यालय, यवतमाल के तत्कालीन प्राध्यापक डॉ. विवेक देशमुख के खिलाफ लगाए गए बर्खास्तगी प्रस्ताव को नामंजूर कर उन्हें क्लीन चिट दे दी है। विश्वविद्यालय द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर यह निर्णय लिया गया, जिसमें उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया गया। शुक्रवार को आयोजित पत्रकार परिषद में डॉ. देशमुख ने इस संबंध में जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि महाविद्यालय प्रशासन ने 30 दिसंबर 2024 को उन पर विभिन्न आरोप लगाकर बर्खास्तगी का नोटिस जारी किया था। हालांकि, विश्वविद्यालय की जांच समिति ने विस्तृत जांच के बाद इन आरोपों को खारिज कर दिया। समिति की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि विनायक दाते द्वारा लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत प्रस्तुत नहीं किया गया, सभी आरोप केवल आरोपों के स्तर तक सीमित रहे और उनके समर्थन में कोई दस्तावेज नहीं मिले।
इसके अलावा, समिति ने यह भी पाया कि महाविद्यालय प्रशासन ने कार्रवाई करते समय कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया और स्टैच्यूट 53 के नियमों का उल्लंघन किया। डॉ. देशमुख पर “फर्जी प्राचार्य” के रूप में कार्य करने का आरोप भी निराधार पाया गया समिति के अनुसार, उन्हें विभागीय जांच के तहत विधिवत प्रशासनिक अनुमति के साथ कार्य करने की अनुमति दी गई थी।
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प्राध्यापकों की नियुक्ति से जुड़े आरोप, आर्थिक अनियमितता और पत्रकार परिषद में दिए गए बयानों को भी समिति ने गलत और असत्य बताया। डॉ. देशमुख ने विश्वविद्यालय के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह “सत्य, न्याय और वैधानिक प्रक्रिया की जीत” है। उनका आरोप है कि यह सब उनके खिलाफ दुर्भावना और बदले की भावना से किया गया था। 34 वर्षों की सेवा के बाद उनकी छवि खराब करने का प्रयास किया गया, लेकिन अब उनकी निर्दोषता साबित हो गई है।
विश्वविद्यालय ने 29 मार्च 2026 को जारी पत्र में बताया कि जांच समित्ति ने सभी 11 बिदुओं पर विस्तार से विचार कर आरोपों को खारिज किया है। साथ ही महाविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए गए है कि भविष्य में सभी निर्णय कानूनी प्रक्रिया के तहत ही लिए जाए और डॉ. देशमुख को पूर्ण न्याय दिया जाए। इस फैसले के बाद यवतमाल के शैक्षणिक क्षेत्र में हलचल मच गई है और महाविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए है। अब आगे क्या कार्रवाई होगी, इस पर सभी की नजरें टिकी है।