महाराष्ट्र में ‘स्कूल बंद’ आंदोलन सफल; चंद्रपुर में भारी बारिश के बीच सड़कों पर उतरे शिक्षक, पेंशन की मांग
Chandrapur Teachers Protest: गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति और पुरानी पेंशन सहित विभिन्न मांगों को लेकर चंद्रपुर में शिक्षकों का 'स्कूल बंद' आंदोलन सफल रहा। भारी बारिश के बावजूद शिक्षक डटे रहे।
- Written By: केतकी मोडक
चंद्रपुर शिक्षक स्कूल बंद आंदोलन करते हुए (सोर्स- फोटो नवभारत)
Chandrapur Teachers School Bandh Protest: गैर-शैक्षणिक कार्यों से शिक्षकों को मुक्त करने, टीईटी (TET) रद्द करने, स्नातक शिक्षकों को समान वेतन श्रेणी देने व एसआईआर (SIR) के कार्यों की सख्ती न बरतने जैसी कई मांगों को लेकर गुरुवार को चंद्रपुर जिला भर के शिक्षक सड़क पर उतरे।
शिक्षा क्षेत्र की लंबित मांगों को लेकर राज्य भर के शिक्षक संगठनों ने निर्णायक आंदोलन गुरुवार को जिलाधिकारी कार्यालय के सामने किया। सरकार द्वारा वर्षों से मांगों की अनदेखी किए जाने और केवल आश्वासन दिए जाने का तीव्र असंतोष इस आंदोलन में दिखाई दे रहा था।
गौरतलब है कि 9 जुलाई को एक ही दिन पूरे महाराष्ट्र राज्य में ‘स्कूल बंद’ आंदोलन हुआ। इस बीच हुई सभा का नेतृत्व मध्यवर्ती शिक्षक संगठन के माध्यम से चानकुमार खोब्रागड़े ने किया। इस समय कालिदास येरगुडे, विपिन धाबेकर, राजू लांजेकर, अशोक राउत, किशोर आनंदवार, सतीश बावने, अरुण खराते, बंडूजी राठौड़, अविनाश जुमड़े, प्रमोद कोरडे, प्रकाश कुमरे, प्रदीप पावड़े, विजय कुमरे, अमोल देठे, सुरेश वासेकर और नंदकिशोर शेरकी मुख्य रूप से उपस्थित थे।
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जोरदार बारिश में डटे रहे आंदोलनकारी
गुरुवार को शिक्षकों के जिलाधिकारी कार्यालय में आंदोलन के दौरान सभा हो रही थी। शिक्षक संगठन पदाधिकारियों के भाषण चल रहे थे, जो सभी में जोश भर रहे थे। इस बीच अचानक शाम के दौरान धुआंधार बारिश शुरू हो गई। बावजूद इसके आंदोलनकारी शिक्षक डटे रहे। शिक्षकों की भारी संख्या के कारण कुछ समय अफरा-तफरी का वातावरण भी बना था। परंतु कुछ ही समय में बारिश रुकी और जोश फिर से भर गया।
संगठन ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था के भविष्य से जुड़ा आंदोलन है। आंदोलन शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से किया गया। शिक्षक संगठन ने कहा कि आंदोलन के कारण अभिभावकों और विद्यार्थियों को कुछ असुविधा हो सकती है, लेकिन शिक्षा व्यवस्था की कमियों को दूर करने और शिक्षकों को न्यायपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराने के लिए यह कदम आवश्यक है।
इन मांगों पर दिया जोर
शिक्षक संगठनों की प्रमुख मांगों में बिना किसी शर्त के सभी शिक्षकों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करना, बिना शर्त टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता समाप्त करना, शिक्षकों को बीएलओ (BLO) तथा स्कूल पोषण आहार जैसी गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियों से मुक्त करना, बिना अनुदानित एवं स्थायी बिना अनुदानित विद्यालयों को नियमानुसार 100 प्रतिशत (100%) अनुदान देना, तथा शिक्षा विभाग में शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों के रिक्त पदों को तत्काल भरना शामिल है।
कोरपना व चिमूर में शिक्षकों से बेबर्ताव
संगठनों ने सभा में बताया कि चिमूर के एसडीओ (SDO) किशोर घाडगे ने शिक्षकों के साथ असंवैधानिक भाषा में बात की। एसआईआर (SIR) कार्यों को लेकर खरी-खोटी सुनाई। उधर कोरपना की तहसीलदार पल्लवी आखरे ने धमकी भरे लहजे में बात की। इस तरह से शिक्षकों पर दबाव बनाया जा रहा है, जबकि नियमों में ऐसा नहीं है। संगठनों ने इसका निषेध किया है।
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महाराष्ट्र पुरोगामी प्राथमिक शिक्षक समिति, अखिल महाराष्ट्र प्राथमिक शिक्षक संघ, महाराष्ट्र राज्य पुरानी पेंशन संगठन, कारट्राइब कल्याण महासंघ, शिक्षक भारती संगठन तथा महाराष्ट्र प्राथमिक शिक्षक समिति सहित विभिन्न शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी आज के आंदोलन में मौजूद थे।
