महाराष्ट्र की राजनीति में महाभूकंप! शरद पवार के सांसद छोड़ेंगे साथ, अजित की NCP में भी बड़ी फूट की आहट

Maharashtra NCP Politics: महाराष्ट्र में राजनीतिक हलचल तेज। प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे द्वारा राकां शरद पवार गुट के सांसदों को तोड़ने और बीजेपी नीत एनडीए को समर्थन देने की चर्चाएं गरम।
Major political shifts brewing in Maharashtra as senior NCP leaders reportedly plan a breakaway faction to support the NDA. Internal rifts over Sunetra Pawar widen.
शरद पवार (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
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Maharashtra Political NCP Sharad Pawar: महाराष्ट्र के बदलते राजनीतिक घटनाक्रम में एक महाभूकंप की तैयारी चल रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दो सीनियर नेता एक सीक्रेट ऑपरेशन के तहत एनसीपी शरद पवार गुट के सांसदों को तोड़ने के अलावा दिवंगत पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की पार्टी को फोड़ने की तैयारी में जुटे हैं। इसके बाद एनसीपी के एक नए गुट का गठन कर बीजेपी की अगुवाई में बनी एनडीए को समर्थन देने का प्लान है। दरअसल बीजेपी, लोकसभा में अपना बहुमत मजबूत करना चाहती है।

अपने मास्टर प्लान के तहत उनका लक्ष्य देश की नई जनगणना के आधार पर लोस और विस क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्गठन करना है, जिससे आने वाले समय में सांसदों और विधायकों की सीटों की संख्या बढ़ सके। इसके लिए लोस में पर्याप्त बहुमत जुटाना बेहद आवश्यक है।

इसके तहत डीसीएम एकनाथ शिंदे ने उद्धव गुट के 6 सांसदों को तोड़ कर अपने गुट में शामिल कर लिया है। इस वजह से लोस में बीजेपी की ताकत बढ़ी है। अगले मिशन के तहत राकां सुनेत्रा पवार गुट के 2 सीनियर नेता भी शरद गुट के सांसदों को तोड़ कर अपने साथ करना चाहते हैं, ताकि बीजेपी की ताकत बढ़े और अप्रत्यक्ष रूप से उन्हें इसका लाभ मिल सके।

सुनेत्रा व पार्थ से नाराज

अजित पवार के निधन के बाद से NCP में सुनेत्रा पवार व उनके पुत्र पार्थ का दखल काफी बढ़ गया है। इस वजह से पार्टी के सीनियर नेता नाराज है। कुछ महीने पहले सुनेत्रा पवार ने केंद्रीय चुनाव आयोग को पार्टी पदाधिकारियों की सूची भेजी थी। इसमें प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे जैसे सीनियर नेताओं के नाम और पद गायब थे। इसके बाद से ही इन दोनों नेताओं की तल्खी कायम है।

तावड़े-खड़से की मुलाकात

इन तमाम घटनाक्रम के बीच बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े एक्टिव हो गए है। उन्होंने शरद गुट के विप सदस्य एकनाथ खडसे से मुलाकात की है। इसके बाद कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, खडसे ने इसे महज शिष्टाचार भेंट बताया और इसके किसी भी राजनीतिक महत्व को खारिज किया।

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