सड़क सुरक्षा अभियान 2026: "दुर्घटनाएं मानव निर्मित, बचाव संभव", जिलाधिकारी का सुरक्षा मूलमंत्र

Road Safety Campaign: चंद्रपुर में सड़क सुरक्षा अभियान 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। जिलाधिकारी ने दुर्घटनाओं को कम करने के लिए सामूहिक संकल्प और यातायात नियमों के पालन पर जोर दिया।
Road Safety Campaign 2026: "Accidents are man-made, prevention is possible," the District Magistrate's safety mantra.
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Traffic Rules Awareness Maharashtra: चंद्रपुर जिले में बढ़ते शहरीकरण और वाहनों की भारी संख्या के बीच सड़क सुरक्षा अब केवल एक सरकारी औपचारिकता नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन की मांग कर रही है।

इसी उद्देश्य के साथ चंद्रपुर जिले में 'सड़क सुरक्षा अभियान 2026' का विधिवत शुभारंभ किया गया। जनता महाविद्यालय में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में जिले के आला अधिकारियों ने हिस्सा लिया और सड़क दुर्घटनाओं के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए नियमों के पालन की शपथ दिलाई।

दुर्घटनाओं को शून्य करना सामूहिक जिम्मेदारी

जिलाधिकारी समारोह के मुख्य अतिथि जिलाधिकारी विनय गौड़ा जी.सी. ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि सड़क दुर्घटनाएं दैवीय आपदा नहीं, बल्कि मानव निर्मित गलतियों का परिणाम हैं।

उन्होंने कहा, "आज सड़कों का जाल बिछा है और वाहनों की संख्या लाखों में है। भारत में प्रति वर्ष डेढ़ लाख से अधिक लोग सड़क हादसों में जान गंवाते हैं।

इन मौतों को निश्चित रूप से रोका जा सकता है, यदि प्रशासन, समाज और सरकार मिलकर संकल्प लें।" उन्होंने नागरिकों से यातायात के संकेतों और गति सीमा का कड़ाई से पालन करने का आह्वान किया।

बीमारियों से अधिक दुर्घटनाओं में मौतें

मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुलकित सिंह ने एक गंभीर पहलू की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कई गंभीर बीमारियों की तुलना में सड़क हादसों में मरने वालों का आंकड़ा अधिक है। सुरक्षित वाहन चलाना केवल चालक की नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक की प्राथमिक जिम्मेदारी है। वहीं, मनपा आयुक्त अकुनुरी नरेश ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए जनभागीदारी को अनिवार्य बताया।

चंद्रपुर के आंकड़ों में सुधार

7 प्रतिशत की आई कमी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ईश्वर कातकाडे ने राहत भरे आंकड़े पेश करते हुए बताया कि निरंतर प्रयासों के कारण वर्ष 2024 की तुलना में 2025 में सड़क दुर्घटनाओं और मौतों की संख्या में 7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। उन्होंने सुझाव दिया कि आत्म-अनुशासन ही सबसे बड़ा रक्षक है। उन्होंने आपातकालीन स्थिति के लिए टोल-फ्री नंबर 108 या 112 का त्वरित उपयोग करने की सलाह दी।

एस.टी. टिकट में छिपा है 10 लाख का सुरक्षा कवच

एस.टी. महामंडल की विभागीय नियंत्रक स्मिता सुतवणे ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि राज्य परिवहन की बस में लिया गया एक टिकट यात्री के लिए 10 लाख रुपये के बीमा के समान है।

दुर्घटना के कारण विकलांगता आने पर विभाग की ओर से 75 हजार से 5 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता का प्रावधान है। उन्होंने जनता से अपील की कि सुरक्षित और वैध यात्रा के लिए हमेशा टिकट जरूर लें।

विद्यार्थियों को सामाजिक आंदोलन से जोड़ने की अपील

प्रादेशिक परिवहन अधिकारी (RTO) किरण मोरे ने छात्र समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि आज के विद्यार्थी ही कल के जिम्मेदार चालक हैं। प्रशासन पूरे वर्ष जागरूकता कार्यक्रम चलाता है, लेकिन जब तक सड़क सुरक्षा एक 'सामाजिक आंदोलन' नहीं बनेगा, तब तक पूर्ण सफलता संभव नहीं है। कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. आशिष महातळे ने भी छात्रों को सड़क सुरक्षा के नैतिक मूल्यों की जानकारी दी।

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