मनपा चुनाव: टिकट कटने से नाराज दिग्गज निर्दलीय मैदान में, आज नामांकन वापसी का आखिरी दिन

Municipal Election:  टिकट कटने से नाराज BJP व कांग्रेस के बागियों ने वरिष्ठ नेताओं की नींद उड़ा दी है। आज नामांकन वापसी का अंतिम दिन है; क्या रूठों को मनाकर पार्टियां अपनी चुनावी नैया पार लगा पाएंगी?
Municipal elections: Disgruntled senior leaders, denied tickets, enter the fray as independent candidates; today is the last day for withdrawal of nominations
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Chandrapur Local Body Election Party Conflict: चंद्रपुर में महानगरपालिका चुनाव का रोमांच अपने चरम पर है। शुक्रवार को नामांकन वापसी की अंतिम समय-सीमा है, जो यह तय करेगी कि चुनावी रण में कौन टिकेगा और कौन पीछे हटेगा।

इस बार के चुनाव में सबसे बड़ी चुनौती राजनीतिक दलों के सामने 'अपनों' से ही मिल रही है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों में टिकट वितरण को लेकर मची अफरातफरी ने वरिष्ठ नेताओं का तनाव बढ़ा दिया है।

कांग्रेस का दांव: 63 प्रत्याशी और 3 पर गठबंधन

66 सदस्यीय इस महानगरपालिका में कांग्रेस ने अपनी रणनीति के तहत 63 सीटों पर अधिकृत प्रत्याशी उतारे हैं। शेष 3 सीटों पर पार्टी ने स्थानीय संगठन 'जनविकास सेना' को अपना समर्थन घोषित किया है।

हालांकि, पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। कांग्रेस ने करीब एक दर्जन ऐसे सक्रिय कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर दिया है, जो वर्षों से स्थानीय राजनीति में सक्रिय थे।

इनमें नंदू नागरकर, सुनीता लोढ़िया, प्रवीण पडवेकर, सकीना अंसारी और प्रशांत दानव जैसे कद्दावर नाम शामिल हैं, जिनका पत्ता साफ होने से कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष है।

भाजपा में भी 'छंटनी' से मचा घमासान

कांग्रेस की ही तरह भाजपा में भी अनुभवी और सक्रिय कार्यकर्ताओं के नाम प्रत्याशी सूची से गायब मिले। भाजपा ने ऐन वक्त पर अजय सरकार, रवि आसवानी, विशाल निम्बालकर, मुग्धा खाड़े और सोहम बुटले जैसे चेहरों की छंटनी कर दी। टिकट न मिलने से नाराज इन नेताओं ने अब निर्दलीय या अन्य दलों के माध्यम से नामांकन दाखिल कर पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। रवि जोगी, सुनील डोंगरे और माया उइके जैसे सक्रिय कार्यकर्ताओं की बगावत भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगा सकती है।

वरिष्ठ नेताओं की 'डैमेज कंट्रोल' टीम सक्रिय

बागियों की फौज दोनों ही दलों के लिए बड़ा सिरदर्द बन गई है। वरिष्ठ नेताओं को इस बात का भली-भांति एहसास है कि यदि इन बागियों ने नाम वापस नहीं लिए, तो चुनावी नैया पार लगाना नामुमकिन होगा। गुरुवार देर रात तक दोनों पार्टियों के वरिष्ठ नेता नाराज कार्यकर्ताओं के घर जाकर उन्हें मनाने और भविष्य में उचित पद देने का आश्वासन देते नजर आए। पार्टी आलाकमान का पूरा ध्यान इस बात पर है कि वोटों का बिखराव रोका जा सके।

आज नामांकन वापसी का अंतिम दिन

शुक्रवार दोपहर तक नामांकन वापस लेने की प्रक्रिया चलेगी। इसके बाद 3 जनवरी को चुनाव मैदान में डटे अंतिम प्रत्याशियों की अधिकृत सूची जारी की जाएगी।

शहर की जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कितने बागी नेता अपनी पार्टी के प्रति वफादारी दिखाते हुए पीछे हटते हैं और कितने 'आर-पार' की लड़ाई के मूड में रहते हैं।

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