

Chandrapur Municipal Corporation GST Irregularity: चंद्रपुर महानगरपालिका अधिकारियों के भ्रष्टाचार की पोल समय समय पर खुलती रही है। अब महानगरपालिका की ऑडिट रिपोर्ट में ही एक धांधली स्पष्ट हुई है। परंतु इसपर जांच कौन करेगा और कार्रवाई कौन करेगा ? होगी भी तो क्या कार्रवाई होगी? इन सवालों को लेकर यहां चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
अब की बार जो धांधली सामने आयी है। वह जीएसटी को लेकर है। रिपोर्ट की माने तो कंसल्टेंसी व सुपरविजन करनेवाली संस्था और व्यक्तियों के भुगतान में टीडीएस व जीएसटी कांटी नहीं गई।
निजी संस्थाओं के कामकाज पर पहले भी आपत्तियां उठने के बावजूद संबंधित मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से महानगरपालिका के अधिकारियों और निजी संस्थाओं के बीच कथित मिलीभगत को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
चंद्रपुर जिले के महानगरपालिका की विभिन्न निर्माण योजनाओं में कंसल्टेंसी और सुपरविजन के नाम पर निजी संस्थाओं को लाखों रुपये भुगतान किए गए, लेकिन इन भुगतानों पर नियमानुसार जीएसटी और टीडीएस की कटौती नहीं किए जाने का यह गंभीर मामला है।
2018-19 से 2020-21 के लेखा निरीक्षण में करीब 23 लाख 60 हजार 407 रुपये के कंसल्टेंसी शुल्क पर 18 प्रतिशत की दर से 4 लाख 24 हजार 873 रुपये जीएसटी नहीं काटे जाने का खुलासा हुआ है।
चंद्रपूर शहर महानगरपालिका 23.60 लाख कंसल्टेंसी शुल्क 18% लागू जीएसटी 4.25 लाख जीएसटी कटौती इससे सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचने पर लेखा परीक्षण विभाग ने मनपा प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
चंद्रपुर महानगरपालिका लेखा परीक्षण के दौरान नागरी दलित बस्ती सुधार योजना, सड़क निर्माण योजना तथा महाराष्ट्र सुवर्ण जयंती नगरोत्थान महाअभियान के प्रमाणकों और रोकड़ पुस्तकों की जांच की गई। इसमें कंसल्टेंसी एवं सुपरविजन शुल्क के भुगतान में बड़ी अनियमितताएं सामने आने की बात रिपोर्ट में कही गई है।