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प्रदूषण से मुक्ति मगर अब बेरोजगारी का संकट; चंद्रपुर की कोल वॉशरी बंद होने से 700 मजदूर परिवारों परेशानी में

Coal Washery: विधानसभा में प्रदूषण का मुद्दा उठने के बाद प्रशासन ने महामाया कोल वॉशरी को बंद करने का आदेश दिया है। इस कार्रवाई से 700 से अधिक मजदूरो का रोजगार छिन गया है, जिससे भारी आक्रोश है।

  • Written By: केतकी मोडक
Updated On: Jul 02, 2026 | 01:42 PM

महामाया कोल वॉशरी (सोर्स- फोटो नवभारत)

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Chandrapur Mahamaya Coal Washery Closer Order: चंद्रपुर क्षेत्र में कोल वाशरियाें से फैल रहे प्रदूषण का मुद्दा पिछले कुछ समय से जोरदार तरीके से उठाया जा रहा था। प्रशासन पर सवाल खड़े करते हुए सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा था कि क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण के कारण स्थानीय लोगों का स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। विधानसभा में यह गंभीर मामला उठने के बाद प्रशासन तुरंत हरकत में आया और प्रदूषण नियंत्रण मंडल (पीसीबी) ने महामाया कोल वाशरी को बंद करने का कड़ा आदेश जारी कर दिया।

सैकड़ों लोगों का छिन गया रोजगार

लेकिन इस प्रशासनिक कार्रवाई का सबसे बड़ा और सीधा असर उन गरीब मजदूर परिवारों पर पड़ा है, जो वर्षों से इसी वाशरी में काम करके अपने घर का गुजारा चला रहे थे। बेलसनी, मुर्सी और शेणगांव जैसे आसपास के गांवों के करीब 700 से अधिक परिवारों की आजीविका (आय) का मुख्य साधन यही कंपनी थी। अचानक काम बंद हो जाने से इन परिवारों के सामने अब भुखमरी जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है।

कंपनी बंद होने की खबर मिलते ही सैकड़ों मजदूर अपने परिवारों के साथ वाशरी के मुख्य गेट पर पहुंच गए। आंदोलन में शामिल महिलाओं ने अपने छोटे-छोटे बच्चों को गोद में लेकर प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान कई बुजुर्ग मजदूरों की आंखें नम दिखाई दीं। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यदि प्रदूषण की समस्या थी, तो उसे रोकने के लिए कंपनी को कड़े नियमों का पालन करवाया जाना चाहिए था; लेकिन सीधे ताला लगाकर गरीब मजदूरों की जिंदगी को अचानक अंधेरे में धकेल दिया गया, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।

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कंपनी ने जताया एतराज

दूसरी ओर, महामाया कोल वाशरी के प्रबंधन ने बिना पर्याप्त सुनवाई के एकतरफा कार्रवाई किए जाने का गंभीर आरोप लगाया है। प्रबंधन का कहना है कि 23 जून को मुंबई में बुलाई गई उच्च स्तरीय बैठक में कंपनी को अपना तकनीकी पक्ष रखने का उचित अवसर ही नहीं मिला और अगले ही दिन आनन-फानन में ‘क्लोजर नोटिस’ (बंद करने का आदेश) जारी कर दिया गया।

कंपनी का तर्क है कि चंद्रपुर जिले में अन्य कई बड़ी कोल वाशरियाँ भी संचालित हो रही हैं, उन पर कोई कार्रवाई न करते हुए केवल महामाया को ही निशाना क्यों बनाया गया? प्रबंधन के अनुसार, किसी भी औद्योगिक इकाई पर इतनी बड़ी कार्रवाई करने से पहले उसके सुधारात्मक उपायों और तकनीकी स्पष्टीकरण को सुना जाना कानूनन आवश्यक था।

विधायक किशोर जोरगेवार की भूमिका

इसी बीच, स्थानीय विधायक किशोर जोरगेवार ने भी इस पूरे मामले में एक अलग रुख अपनाते हुए प्रशासन से जिले में प्रदूषण को लेकर समान नीति लागू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि चंद्रपुर जिले में कई बड़ी कोल वाशरी, कोल डिपो, औद्योगिक इकाइयां और कोयला खदानें (माइंस) बड़े पैमाने पर प्रदूषण फैला रही हैं। ऐसे में केवल महामाया जैसी अपेक्षाकृत छोटी वाशरी पर ताला लगाना बिल्कुल भी उचित नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि प्रदूषण ही मुख्य मुद्दा है, तो फिर सभी प्रदूषण फैलाने वाले छोटे-बड़े उद्योगों पर समान रूप से कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है?

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मजदूर संगठन भी आक्रामक

स्थानीय मजदूर संगठनों और ग्रामीणों ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है कि जब तक इन 700 परिवारों के रोजगार का कोई स्थायी और ठोस समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक उनका यह आंदोलन उग्र रूप से जारी रहेगा।

फिलहाल पूरे जिले में महामाया कोल वाशरी को लेकर राजनीतिक नेताओं की अलग-अलग भूमिका और प्रभावित मजदूरों का बढ़ता आक्रोश भारी चर्चा का विषय बना हुआ है। अब शासन और प्रशासन मजदूरों के भविष्य तथा पर्यावरण (प्रदूषण) के मुद्दे पर क्या संतुलित निर्णय लेता है, इस पर पूरे क्षेत्र की नजरें टिकी हुई हैं।

Mahamaya coal washery closed pollution workers protest 2026 chandrapur

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Published On: Jul 02, 2026 | 01:42 PM

Topics:  

  • Chandrapur
  • Maharashtra News

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