गोंडवाना विश्वविद्यालय में शिक्षकों के कार्यभार को लेकर उठे सवाल, त्रुटियां दूर करने की मांग
Young Teachers Organization: गोंडवाना विश्वविद्यालय यंग टीचर्स संगठन ने शिक्षकों के कार्यभार निर्धारण और पदमान्यता प्रक्रिया में मौजूद त्रुटियों को दूर करने की मांग की है।
- Written By: आंचल लोखंडे
Gondwana University (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
Chandrapur Gondwana University: गोंडवाना विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2024-25 से स्नातक स्तर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन शुरू किया गया है। इस नीति के अंतर्गत विद्यार्थियों को कौशल आधारित उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है तथा प्रत्येक सत्र की संरचना में पूरक कौशल विकसित करने वाले अनेक पाठ्यक्रम शामिल किए गए हैं।
हालांकि, इस नीति के प्रभावी और सफल क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त एवं कुशल मानव संसाधन आवश्यक है। लेकिन 1 अक्टूबर 2025 की छात्र संख्या के आधार पर प्राध्यापकों का कार्यभार निर्धारित करते समय उच्च शिक्षा विभाग, नागपुर के सहसंचालक द्वारा अनेक प्राध्यापकों को संरक्षित श्रेणी में रखा गया है तथा विभिन्न महाविद्यालयों की कई रिक्त पदों को स्थगित (फ्रीज) कर दिया गया है। इसके कारण सत्र 2026-27 में कई महाविद्यालयों को शासन की ओर से तासिका आधार (घंटे के आधार) पर भी प्राध्यापक मंजूर नहीं किए गए हैं। इससे शिक्षक कार्यभार और पदमान्यता को लेकर अनेक समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं।
कार्यभार निर्धारण में सुधार की मांग
इसी संदर्भ में गोंडवाना विश्वविद्यालय यंग टीचर्स संगठन के अध्यक्ष डॉ. संजय गोरे तथा सचिव डॉ. विवेक गोरलावर ने विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. प्रशांत बोकारे एवं प्र-कुलगुरु डॉ. श्रीराम कावले को ज्ञापन सौंपा। इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. श्रीराम गहाणे भी उपस्थित थे। कुलगुरु ने आश्वासन दिया कि इस समस्या को शासन के समक्ष रखा जाएगा।
सम्बंधित ख़बरें
आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने, बनाएं एकीकृत योजना, मंत्री आशीष शेलार ने दिए रेलवे, मनपा और बेस्ट को निर्देश
भंडारा में पीएम सूर्यघर योजना का असर, 9,533 उपभोक्ताओं का बिजली बिल हुआ शून्य
पुणे: ऑनलाइन गेमिंग से लाखों की ठगी करने वाले बड़े रैकेट का पर्दाफाश, दो गिरफ्तार, दुबई से जुड़ा है मास्टरमाइं
महाराष्ट्र में लुटेरी दुल्हन का सनसनीखेज कांड, शादी के एक महीने बाद पति को चूना लगा लाखों के जेवर लेकर फरार
ये भी पढ़े: नासिक गोदावरी में छोड़ा जा रहा ड्रेनेज का गंदा पानी, दोषी अधिकारियों पर केस दर्ज करने की मांग
संगठन ने यह भी कहा कि वाणिज्य एवं विज्ञान संकाय में कार्यभार बढ़ने के बावजूद प्राध्यापकों के पद कम कर दिए गए हैं। मानविकी संकाय में पहले अंग्रेजी विषय के लिए प्रति वर्ग 4 घंटे तथा प्रत्येक 20 विद्यार्थियों के एक बैच के आधार पर ट्यूटोरियल प्रणाली लागू थी, जिससे 120 विद्यार्थियों पर 9 पीरियड का कार्यभार निर्धारित होता था। इस प्रकार अंग्रेजी विषय के प्राध्यापकों का कुल कार्यभार 27 पीरियड तथा मराठी भाषा के लिए प्रति वर्ग 4 के अनुसार 12 पीरियड था।
महाविद्यालयों में भ्रम की स्थिति
संगठन ने कहा कि पदमान्यता के लिए अपनाए गए मानदंड स्पष्ट नहीं होने के कारण सभी महाविद्यालयों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। यदि अनुदानित विषयों के अध्यापन के लिए शासन पदमान्यता नहीं देता है तो आदिवासी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा प्रभावित हो सकती है तथा अनेक विद्यार्थी उच्च शिक्षा से वंचित रह सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए संगठन ने मांग की है कि विश्वविद्यालय स्तर पर महाविद्यालयों के शिक्षकों का कार्यभार स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाए तथा पदमान्यता प्रक्रिया में मौजूद त्रुटियों को शासन के समक्ष रखकर तत्काल दूर किया जाए।
