1,983 गांवों के सर्वे में खुलासा, यवतमाल के 14 जलस्रोत प्रदूषण के उच्च खतरे में
Pre Monsoon Water Inspection: यवतमाल के 1,983 गांवों में सर्वे से पता चला कि 14 जलस्रोत 'हाई रिस्क' पर हैं। नेर के घुई गांव को रेड और 654 पंचायतों को येलो कार्ड देकर सुधार के निर्देश दिए।
- Written By: केतकी मोडक
पानी प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मिडिया)
Yavatmal Drinking Water Survey: ग्रामीण नागरिकों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जलसुरक्षक तथा स्वास्थ्य विभाग द्वारा वर्ष में दो बार जलस्रोतों की जांच की जाती है। इसी क्रम में अप्रैल 2026 में किए गए प्री-मानसून जलस्त्रोत स्वच्छता सर्वेक्षण की रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार जिले में 14 पेयजल स्रोत उच्च जोखिम (हाई रिस्क) श्रेणी में पाए गए हैं।
इनमें नेर तहसील के घुई गांव को रेड कार्ड जारी किया गया है, जबकि 654 ग्राम पंचायतों को येलो कार्ड और 552 ग्राम पंचायतों को ग्रीन कार्ड प्रदान किए गए हैं। जिला परिषद यवतमाल के जल एवं स्वच्छता विभाग ने 1 से 30 अप्रैल 2026 के दौरान जिले की 1207 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत आने वाले 1,983 गांवों में कुल 7,389 जलस्रोतों का सर्वेक्षण किया।
इसमें 1,783 कुएं, 3,940 हैंडपंप तथा 1,666 अन्य जलस्रोतों की जांच की गई, सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार 14 जलस्रोत उच्च जोखिम, 3,986 मध्यम जोखिम तथा 3,389 कम जोखिम श्रेणी में पाए गए। सबसे चिंताजनक स्थिति नेर तहसील के घुई गांव की रही, जहां जलस्रोतों की स्थिति को देखते हुए ग्राम पंचायत को रेड कार्ड जारी किया गया।
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कार्ड जारी करने की प्रक्रिया
जलस्रोतों को तीव्र (हाई), मध्यम (मीडियम) और अल्प (लो) जोखिम श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। यदि किसी ग्राम पंचायत के 70 प्रतिशत से अधिक जलस्रोत उच्च जोखिम श्रेणी में आते हैं, तो उसे रेड कार्ड दिया जाता है। 70 प्रतिशत से अधिक जलस्रोत मध्यम जोखिम वाले होने पर येलो कार्ड जारी किया जाता है। जबकि अधिकांश जलस्रोत कम जोखिम वाले होने पर ग्राम पंचायत को ग्रीन कार्ड प्रदान किया जाता है।
यवतमाल जिप प्रशासन ने रेड और येलो कार्ड प्राप्त ग्राम पंचायतों को एक माह के भीतर पेयजल व्यवस्था की सभी कमियां दूर करने के निर्देश दिए हैं। सुधारात्मक कार्यवाही के बाद संबंधित पंचायतों को ग्रीन कार्ड श्रेणी में लाने का लक्ष्य रखा गया है। कार्रवाई की रिपोर्ट जिप को सौंपना भी अनिवार्य किया गया है।
विशेष अभियान चलाया जाएगा
सभी गटविकास अधिकारियों और तहसील स्वास्थ्य अधिकारियों को इस संबंध में विशेष निर्देश जारी किए गए हैं, पेयजल स्रोतों की स्वच्छता, संरक्षण व्यवस्था तथा प्रदूषण के खतरे को ध्यान में रखकर जोखिम श्रेणी निर्धारित की गई है।
सर्वेक्षण के निष्कर्षों के आधार पर ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए आगामी माह विशेष अभियान चलाया जाएगा, स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मानसून के दौरान जलजनित बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है।
ऐसे में जलस्रोतों की नियमित निगरानी, स्वच्छता और संरक्षण अत्यंत आवश्यक है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।
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जिले की तहसीलवार स्थिति
| तहसील | कुल स्रोत | हाई रिस्क (उच्च जोखिम) | मीडियम रिस्क (मध्यम जोखिम) | लो रिस्क (कम जोखिम) |
| आर्णी | 413 | 0 | 179 | 234 |
| बाभुलगांव | 481 | 3 | 82 | 396 |
| दारव्हा | 401 | 0 | 141 | 260 |
| दिग्रस | 240 | 2 | 65 | 173 |
| घाटजी | 472 | 0 | 407 | 65 |
| कलंब | 462 | 0 | 210 | 252 |
| महागाव | 459 | 0 | 203 | 256 |
| मारेगांव | 299 | 0 | 45 | 254 |
| नेर | 586 | 3 | 556 | 27 |
| पांढरकवडा | 575 | 3 | 321 | 251 |
| पुसद | 483 | 0 | 405 | 78 |
| रालेगांव | 372 | 0 | 262 | 110 |
| उमरखेड | 472 | 3 | 375 | 94 |
| वणी | 537 | 0 | 262 | 275 |
| झरी-जामनी | 268 | 0 | 189 | 79 |
| यवतमाल | 369 | 0 | 284 | 85 |
| कुल (Total) | 7,389 | 14 | 3,986 | 3,389 |
