किडनी कांड: SIT को मिला 'THOTA' का ब्रह्मास्त्र, किडनी तस्करी के 'दिल्ली कनेक्शन' पर पुलिस ने कसा शिकंजा

Kidney Trafficking Racket India: किडनी कांड में शामिल डॉ. रवींद्रपाल सिंह की जमानत पर 24 फरवरी को सुनवाई। पुलिस लगाएगी असहयोग का आरोप। THOTA कानून के तहत SIT को मिली बड़ी कानूनी शक्ति।
Kidney Racket: Nagpur Police to oppose Dr. Ravinderpal Singh's bail on Feb 24, citing non-cooperation.
डॉ. रवींद्रपाल सिंह की जमानत पर सुनवाई (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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Dr. Ravinderpal Singh Bail: देशभर में चर्चित कथित किडनी तस्करी प्रकरण की जांच अभी जारी है। इस मामले के दिल्ली स्थित महत्वपूर्ण आरोपी डॉ. रवींद्रपाल सिंह की जमानत याचिका पर अब मंगलवार (24 फरवरी) को अंतिम सुनवाई होगी। पूर्व में मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने डॉ. सिंह को अंतरिम राहत देते समय जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए थे।

उनके जमानत आवेदन पर बुधवार (18 फरवरी) को अंतिम सुनवाई प्रस्तावित थी, जिसे अब आगे बढ़ा दिया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तारी से बचने के लिए डॉ. सिंह ने 11 से 16 फरवरी के बीच जांच अधिकारी के समक्ष हाजिरी लगाई, लेकिन जांच में कोई ठोस सहयोग नहीं किया। पुलिस का दावा है कि पूछताछ के दौरान उनका जवाब अधिकतर “आई डोंट रिमेम्बर” ही रहा।

SIT को मिला 'THOTA' का ब्रह्मास्त्र

पुलिस अब अदालत में उनके कथित असहयोग का मुद्दा उठाने की तैयारी में है। इस बीच महाराष्ट्र शासन ने ‘मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम’ (ट्रांसप्लांटेशन ऑफ ह्यूमन ऑर्गन एंड टिश्यू एक्ट-THOTA), 1994 के तहत जांच और कार्रवाई के लिए अधिकृत स्वीकृति दे दी है, जिससे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।

नागभीड़ निवासी रोशन कुले से जुड़े इस कथित रैकेट में तिरुचिरापल्ली के एक निजी अस्पताल में अवैध किडनी प्रत्यारोपण किए जाने का खुलासा हुआ है। आरोप है कि दिल्ली से आकर सर्जरी करने के लिए डॉ. सिंह ने 35 लाख रुपये लिए। इस रकम के बंटवारे और रैकेट के नेटवर्क के संबंध में उन्होंने संतोषजनक जानकारी नहीं दी है। ऐसे में पुलिस डॉ. सिंह की पुलिस हिरासत मांगने की तैयारी में है। अब मंगलवार की सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।

SIT प्रमुख को प्राधिकृत अधिकारी नियुक्त

पुलिस अधीक्षक मुमक्का सुदर्शन के प्रयासों के बाद राज्य सरकार ने एसआईटी प्रमुख ईश्वर कातकड़े को प्राधिकृत अधिकारी नियुक्त किया है। इससे जांच को कानूनी मजबूती मिलने की उम्मीद है। एसआईटी को स्टार किम्स हॉस्पिटल (तिरुचिरापल्ली) में किडनी प्रत्यारोपण सर्जरी के ठोस प्रमाण मिले हैं।

जांच में सामने आया है कि डॉ. राजरत्नम गोविंदसामी और डॉ. रवींद्रपाल सिंह ने मिलकर यह सर्जरी की। इसके बाद आरोपियों की ओर से THOTA कानून की तकनीकी आपत्तियां उठाकर जांच अधिकार पर सवाल खड़े किए गए थे।

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