चंद्रपुर में ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ केमिस्टों का जोरदार प्रदर्शन, जिलेभर में बंद रहे मेडिकल स्टोर्स
Chandrapur Chemist Strike: ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में चंद्रपुर जिले के सभी मेडिकल स्टोर बंद रहे। केमिस्टों ने जटपुरा गेट पर धरना देकर सरकार से विवादित नियम वापस लेने की मांग की।
- Written By: रूपम सिंह
दवा बिक्री के विरोध (सोर्स: नवभारत फाइल फोटो)
Chandrapur Chemist Strike Online Medicine Sale: “दवा कोई सामान्य वस्तु नहीं है, यह सीधे मरीज की जिंदगी से जुड़ा मामला है। ऑनलाइन दवा बिक्री के नाम पर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।” इसी आरोप के साथ बुधवार को चंद्रपुर जिले के दवा विक्रेता सड़कों पर उतर आए और जोरदार आंदोलन किया।
अखिल भारतीय औषधि विक्रेता संघ तथा महाराष्ट्र स्टेट केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के देशव्यापी बंद के आह्वान को जिलेभर में व्यापक समर्थन मिला। जिले की सभी 15 तहसीलों में मेडिकल स्टोर्स बंद रखे गए। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक इस आंदोलन का असर दिखाई दिया।
चंद्रपुर जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन की ओर से जटपुरा गेट स्थित गांधी प्रतिमा परिसर में धरना आंदोलन और शक्ति प्रदर्शन किया गया। आंदोलन में जिलेभर से सैकड़ों केमिस्ट, फार्मासिस्ट, दवा विक्रेता और संगठन पदाधिकारी शामिल हुए।
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इनमें बंटी घाटे, जितू राजा, सचिन चिंतावार, प्रशांत जाऊ, अशोक येरगुडे, उमेश वासलवार, अनुप येगीनवार, प्रशांत गोठी, जयंत दांडेकर, अनिल काले, रणजीत दांडेकर, आशीष गौरकार, वैशाली पवार और थे। प्रियांका इखार प्रमुख रूप से उपस्थित ऑनलाइन दवा बिक्री से कारोबार पर असरः प्रदर्शनकारियों ने “ऑनलाइन दवा बिक्री बंद करो”, “मरीजों की जिंदगी से
खिलवाड़ बंद करो”, “स्थानीय मेडिकल बचाओ” और “जीएसआर 217 और 220 रद्द करो” जैसे नारे लगाए। आंदोलनकारियों ने कहा कि ऑनलाइन माध्यम से कई बार बिना डॉक्टर की पर्ची के दवाएं बेची जा रही हैं, जिससे गलत दवा मरीज तक पहुंचने का खतरा बढ़ गया है। नकली और घटिया दवाओं की बिक्री बढ़ने की आशंका भी जताई गई। आंदोलन के दौरान संगठन के अध्यक्ष बंटी घाटे ने सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि दवा कोई सामान्य व्यापारिक वस्तु नहीं है।
गलत दवा किसी की जान ले सकती है। स्थानीय केमिस्ट केवल दुकानदार नहीं बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो मरीजों को सही दवा और आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने कहा कि जीएसआर 217 और 220 जैसे नियमों से छोटे और मध्यम स्तर के मेडिकल व्यवसायियों पर अन्याय हो रहा है। पहले से ही बढ़ती प्रतिस्पर्धा, ऑनलाइन कंपनियों का दबाव और आर्थिक संकट के कारण हजारों मेडिकल व्यवसायी परेशान हैं।
दवाओं के लिए – भटकना पड़ा
मेडिकल स्टोर्स बंद रहने के कारण कई मरीजों को आवश्यक दवाएं लेने के लिए शहरभर में भटकना पड़ा। मधुमेह, ब्लड प्रेशर, दमा, हृदय रोग और बुजुर्ग मरीजों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोगों ने घंटों इंतजार के बाद भी दवाएं नहीं मिलने की शिकायत की।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों को हुई परेशानी
तहसील और ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश मेडिकल स्टोर्स पूरी तरह बंद रहे। कई मरीजों को दवा लेने शहर का रुख करना पड़ा। आपातकालीन दवाओं के लिए लोगों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ा। कई जगह छोटे बच्चों और बुजुर्गों के परिजन चिंतित दिखाई दिए।
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राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने ऑनलाइन दवा बिक्री पर कठोर नियंत्रण नहीं लगाया और विवादित नियम वापस नहीं लिए, तो राज्यव्यापी और देशव्यापी आंदोलन और तेज किया जाएगा। हालांकि संगठन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि आवश्यक सेवाएं पूरी तरह प्रभावित न हों, इसके लिए कुछ स्थानों पर आपातकालीन दवा सेवाएं चालू रखी गई थीं। बावजूद इसके कई मरीजों को दवाओं के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ी। आंदोलन के दौरान पुलिस बंदोबस्त भी तैनात किया गया था।
