

Chemist Strike E Pharmacy Online Medicine: डिजिटल दौर में ई-फार्मेसी और इंस्टेंट डिलीवरी ऐप्स के बढ़ते दखल ने अब देश के पारंपरिक दवा व्यवसाय की रीढ़ पर चोट करना शुरू कर दिया है। इसी के विरोध में बुधवार को 'ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स' के साथ-साथ 'महाराष्ट्र स्टेट केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन' के आह्वान पर राज्य के करीब सवा लाख से अधिक थोक और खुदरा दवा विक्रेताओं ने अपनी दुकानों के शटर गिरा दिए। केमिस्टों का सीधा आरोप है कि बड़ी कॉरपोरेट ऑनलाइन कंपनियां नियमों का उल्लंघन कर प्रिस्क्रिप्शन के बिना भी दवाएं बेच रही हैं, जिससे बाजार में नकली और घटिया जेनेरिक दवाओं की बाढ़ आ गई है।
ठाणे और अमरावती जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर सुबह से ही केमिस्टों की भारी भीड़ जमा होने लगी थी। प्रदर्शनकारियों ने सिर पर काली टोपियां और हाथों पर काले रिबन बांधकर केंद्र सरकार की ऑनलाइन दवा बिक्री नीति के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जलगांव में केमिस्टों ने खानदेश सेंट्रल मॉल से कलेक्ट्रेट तक ढोल बजाकर एक अनोखा प्रतीकात्मक जुलूस निकाला और अपनी मांगों का ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा। दवा दुकानदारों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने कोरोना काल की होम डिलीवरी अधिसूचना को तुरंत रद्द नहीं किया, तो यह सांकेतिक हड़ताल बहुत जल्द अनिश्चितकालीन तालाबंदी में बदल जाएगी।
अचानक हुई केमिस्टों की हड़ताल का सबसे ज्यादा असर पश्चिम महाराष्ट्र और कोंकण पट्टी में देखने को मिला। सांगली जिले में करीब 4,000 और कोल्हापुर-सतारा में 3,200 से अधिक दवा दुकानें बंद रहीं। इसके चलते सांगली के सिविल अस्पताल के पास ग्रामीण क्षेत्रों से आए गरीब मरीजों के परिजनों को जीवन रक्षक दवाएं ढूंढने के लिए भटकना पड़ा। कोंकण संभाग के रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग और रायगढ़ जिलों से लगभग 4,000 दवा विक्रेता इस आंदोलन में शामिल हुए, जिससे अलीबाग, रोहा और महाड जैसे शहरों में पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा।
आईटी हब पुणे के रास्ता पेठ स्थित पावर हाउस चौक पर दवा विक्रेताओं ने एकत्रित होकर ऑनलाइन फार्मेसियों के एकाधिकार को खत्म करने की मांग की। पिंपरी-चिंचवड शहर में भी बंद को 100% सफलता मिली। हालांकि, स्थानीय एसोसिएशन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए गंभीर और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए कुछ आपातकालीन काउंटरों और एम्बुलेंस सेवाओं के लिए आवश्यक दवाओं की आपूर्ति जारी रखी थी, जिससे किसी अप्रिय घटना को टाला जा सका।
उपराजधानी नागपुर के संविधान चौक पर करीब 7,000 खुदरा विक्रेताओं ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। हालांकि, स्थानीय प्रशासन के समन्वय से मेड प्लस, अपोलो फार्मेसी और वेलनेस फॉरएवर जैसे कुछ बड़े ब्रांड्स के चुनिंदा 100 स्टोर्स को खुला रखा गया था ताकि आपातकालीन दवाओं की कमी न हो। छत्रपति संभाजीनगर के हेडगेवार चौक और जालना जिले में भी 2,000 से अधिक मेडिकल स्टोर संचालकों ने स्वेच्छा से दुकानें बंद रखीं। अमरावती और जलगांव के एसोसिएशनों ने मरीजों की सुविधा के लिए सोशल मीडिया पर 88 आपातकालीन संपर्क नंबर जारी किए थे, जिससे लोगों को काफी हद तक राहत मिली।