चंद्रपुर रामाला तालाब में हजारों मछलियों की मौत, सांसद ने प्रशासन को घेरा; 30 करोड़ प्रकल्प पर सवाल

Chandrapur Ramala Lake Fish Deaths: चंद्रपुर के ऐतिहासिक रामाला तालाब में हजारों मछलियों की मौत पर बवाल। 30 करोड़ के अमृत 2.0 प्रकल्प के बावजूद लापरवाही और तकनीकी विफलता पर सवाल उठे।
Thousands of Fish Die in Chandrapur's Ramala Lake; MP Corners Administration, Raising Questions Over ₹30 Crore Project
चंद्रपुर रामाला तालाब मछलियों की मौत,(प्रतिकात्मक तस्वीर सोर्स: सोशल मीडिया)
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Chandrapur Civic Negligence: चंद्रपुर शहर का ऐतिहासिक गहना रामाला तालाब में हजारों मछलियों की सामूहिक मौत सिर्फ एक तकनीकी खराबी नहीं बल्कि प्रशासनिक यंत्रणा की माफ न करने लायक लापरवाही है। इन शब्दों में कांग्रेस सासद प्रतिभा धानोरकर ने शुक्रवार को अपना रोष जाहिर किया है। केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित 'अमृत 2.0' मुहिम के तहत इस तालाब को फिर से जिंदा करने के लिए 30 करोड़ रुपये की निधि की मंजूरी के बावजूद, तालाब की यह बुरी हालत बहुत दर्दनाक है।

धानोरकर ने कहा कि मछलियों की अचानक मौत और इलाके में फैल रही बदबू ने प्रशासनिक दावों को पूरी तरह से कमजोर कर दिया है, और इस घटना ने शहर की ऐतिहासिक विरासत को एक बड़ा धक्का पहुंचाया है।

हालांकि प्रशासन का दावा है कि इस प्रकल्प के तहत सावरकर नगर इलाके में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का काम 90% और सुरक्षा दीवार का काम 80% पूरा हो गया है, लेकिन असल में, तालाब में अभी भी गंदा पानी मिल रहा है।

सांसद धानोरकर ने साफ संदेह जताया है कि तालाब के पानी को साफ करने के लिए ऑक्सीडेशन' और 'एरेशन' प्रणाली सिर्फ कागजों पर लागू किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जमीन पर ऑक्सीजन की कमी से बड़ी संख्या में मछलियां मर गई हैं, और इस तकनीकी गड़बड़ी की पूरी जांच और निधी का इस्तेमाल अब जरूरी हो गया है।

उच्च स्तरीय जांच कमेटी बनाएं

उन्होंने मांग की है कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले और तुरंत एक उच्चस्तरिय जांच कमेटी बनाए। तालाब में मरी हुई मछलियों को युद्ध स्तर पर हटाया जाए, इलाके को तुरंत डिसईफेक्ट किया जाए और इस तबाही के लिए जिम्मेदार ठेकेदार तथा अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। अगर प्रशासन इस मामले को अनदेखा कर दोषियों का साथ देता है, तो यहां जारी विज्ञप्ति में सांसद धानोरकर ने चेतावनी दी है कि वह चंद्रपुर के लोगों के साथ एक व्यापक जनआंदोलन खड़ा करेंगी,

फोरेंसिक ऑडिट की मांग

उन्होंने सवाल उठाया है कि तालाब में कचरा और पानी वाले पौधों को साफ करने के लिए अत्याधुनिक मशीनरी होने के बावजूद रामाला तालाब की यह हालत क्यों है? कड़वी सच्चाई यह सामने आई है कि 18 मई, 2024 को शुरू हुए काम के पूरा होने के बाद भी यह प्रकल्प पानी वाले जानवरों के खत्म होने की ओर झुका हुआ है।

अगर 30 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी तालाब प्रदूषण-मुक्त नहीं हो रहा है, तो यह बड़ी निधि आखिर खर्च कहां हुई? सांसद धानोरकर ने जिला प्रशासन से पूरे मामले का 'फोरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की है।

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