चंद्रपुर में सियासी घमासान (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Chandrapur Municipal Corporation Politics: चंद्रपुर शहर महानगर पालिका की राजनीति में महापौर और स्थायी समिति सभापति पद के चुनाव बाद अब ‘प्रभाग कमेटी’ सभापति के चुनाव को लेकर माहौल गरमा गया है। 17 अप्रैल को होने वाले इस चुनाव के लिए आंकडों का तालमेल शुरू हो गया है। सत्ताधारी और विपक्षी गुटों के इच्छुकों ने नेताओं के पास अपना दमखम व जुगाड़ लगाना शुरु किया हैं।
बताया जाता है कि सत्ताधारी व विपक्षी नेताओं की चिंता यह है कि जिन लोगों को स्थायी समिति में जगह नहीं मिली, उन्हें ज़ोन सभापति पद पर बैठाएं तो कैसे? नेताओं की इस चिंता पर पार्टी अंतर्गत गुटबाजी हावी होने से वास्तव में 17 अप्रैल को क्या नतीजे आते है? इसे लेकर तरह तरह की चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में हो रही है।
चंद्रपुर (Chandrapur) शहर मनपा में 1, 2, 3 ऐसे तीन ज़ोन है। दलीय बलाबल देखें तो ज़ोन 1 और 3 में भले ही भाजपा-शिवसेना गठबंधन का दबदबा है, लेकिन असली संघर्ष गुटबाजी को लेकर होने की प्रबल संभावना है। भाजपा में सुधीर मुनगंटीवार और जोरगेवार गुटों व्दारा अपने समर्थकों के पीछे ताकत झोंकने का काम शुरु हैं। ज़ोन नंबर 2 में भले ही कांग्रेस का दबदबा है, लेकिन विजय वडेट्टीवार और प्रतिभा धानोरकर गुटों में ‘तू तू-मैं मैं’ थमी नहीं है, जिससे यहां वर्चस्व की लड़ाई होने के आसार है।
सत्ताधारी भाजपा यूबीटी गठबंधन की मानें तो उनके पास ज़ोन 1 और 3 में संख्या बराबर है, लेकिन सवाल यह खडा हो रहा है कि सभापति पद का प्रत्याशी भाजपा के कौनसे गुट का नेता तय करेंगा? शिंदे सेना और उद्धव सेना की तरफ से भी दबाव बढ़ाया जा रहा है।
कांग्रेस में भी अंदरूनी गुटबाजी की संभावना को नकारा नहीं जा सकता है। अब देखना यह है कि कौन सा गुट चुनाव जीतेगा, किसका राजनीतिक पुनर्वास होगा। इसमें भी पार्टी के बड़े नेताओं के सामने अचानक किसी भी तरह की गड़बड़ी या बगावत को रोकने की बड़ी चुनौती रह सकती है, ऐसा राजनितिक जानकार मान रहे है।
चंद्रपुर (Chandrapur) शहर मनपा की कुल 66 सीटों में से ज़ोन निहाय समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं। शिंदे सेना और उद्धव सेना भाजपा के मित्र गुट के तहत लॉबिंग कर रहे हैं, बताया जा रहा है कि कांग्रेस के साथ समर्थक रही जनविकास सेना भी ज़ोन सभापति पद की आस लगाए बैठी है।
इन हालातों में अब जोन सभापति पद की लॉटरी किसे लगती है? इसी को लेकर राजनितिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। उल्लेखनिय है कि मनपा की निर्णय प्रक्रिया में जोन सभापतियों की भूमिका बहुत अहम मानी जाती है।
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जोन नंबर 1 में प्रभाग नंबर 1, 5, 7, 8 और 9 शामिल हैं, जिसमें भाजपा के 6, युबीटी के 5, कांग्रेस के 6 और भाशेकाप के 3 पार्षद हैं। चूंकि भाजपा उद्धव सेना के साथ गठबंधन में है, इसलिए 11 पार्षदों के दम पर सभापति का पद सत्ताधारी गुट के पास जानेवाला है। जोन नंबर 2 में प्रभाग नंबर 10, 11, 12, 14, 15 और 16 शामिल हैं।
इस जोन में कांग्रेस के 14 सदस्य हैं। वहीं भाजपा के पास 5, निर्दलीय 2, युबीटी 1 और AIMIM 1 इस तरह बलाबल है। ज़ोन 2 में कांग्रेस को साफ़ बहुमत है। ज़ोन नंबर 3 में प्रभाग नंबर 2, 3, 4, 6, 13 और 17 का समावेश हैं। इस ज़ोन में भाजपा के पास 12, कांग्रेस 7, वंचित बहुजन अघाड़ी 2, बीएसपी 1 और शिंदे सेना 1 ऐसा संख्याबल है।
शिंदे सेना BJP के साथ है। साथ ही, उद्धव सेना गुट में वंचित बहुजन अघाड़ी है और ये सभी सत्ताधारी गुट का हिस्सा हैं। संख्या बल की देखते तो इस ज़ोन में भाजपा का पलड़ा भारी दिख रहा है।