सुधीर मुनगंटीवार (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Chandrapur Municipal Corporation Election: विगत दो टर्म से स्थानीय मनपा में सत्ता भोगने के बाद अब हाल ही में हुए चुनाव के परिणामों से भाजपा को सत्ता हाथ से फिसलने का डर लग रहा है। चुनाव में बहुमत प्राप्त नहीं होने के बावजूद अब भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने हाथ से फिसलती सता को बचाने के लिए कवायद शुरू करते हुए जोड़तोड़ की राजनीति शुरू कर दी है। हाल ही में हुए चंद्रपुर शहर मनपा चुनाव में मतदाताओं ने किसी भी राजनीतिक दल को स्पष्ट रूप से बहुमत नहीं दिया है।
इस चुनाव में सर्वाधिक 27 सीटें प्राप्त कर कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। कांग्रेस समर्थित शेतकरी कामगार पार्टी के 3 निर्वाचित सदस्यों को मिलाकर कांग्रेस गठबंधन 30 सीटों तक पहुंच चुका है। किन्तु कांग्रेस गठबंधन अब भी कुल 66 सदस्यीय इस मनपा में सत्ता स्थापित करने के लिए बहुमत के जादुई आंकड़े से 4 पार्षदों की संख्या से दूर है।
वहीं दूसरी ओर पिछले दो टर्म से स्थानीय मनपा में सत्तारूढ़ रही भाजपा इस चुनाव के बाद मनपा में दूसरे क्रमांक की पार्टी बन गयी है। भाजपा को चुनाव में महज 23 सीटें हासिल हुई है। भाजपा का सहयोगी दल शिंदे शिवसेना का एक पार्षद चुनाव में विजयी हुआ है। दोनों दलों को मिलाकर भाजपा गठबंधन के पास फिलहाल 24 का संख्याबल है।
अतः भाजपा इस मनपा में सत्ता स्थापन करने के लिए बहुमत के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए कांग्रेस गठबंधन की तुलना में काफी दूर है। इसके बावजूद भी भाजपा के स्थानीय वरिष्ठ नेताओं ने इस जादुई आंकड़े तक पहुंचने की मंशा से जोड़तोड़ की राजनीति अपनाने की कवायद प्रारंभ कर दी है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता सुधीर मुनगंटीवार ने चुनाव परिणामों के बाद मनपा में सत्ता प्राप्त करने की भाजपा की मंशा को स्पष्ट भी कर दिया है। उन्होंने कहा है कि, इस चुनाव में किसी भी राजनीतिक पार्टी या गठबंधन को स्पष्ट रूप से बहुमत प्राप्त नहीं हुआ है, इसका स्पष्ट अर्थ यह भी है कि,भाजपा को भी इस मनपा में सत्ता प्राप्त करने का अवसर मिला है।
मुनगंटीवार के वक्तव्य से अब कांग्रेस गठबंधन के नवनिर्वाचित पार्षदों तथा वरिष्ठ नेताओं में हलचल शुरू हो गयी है। कांग्रेस के सामने अब अपने समर्थित नवनिर्वाचित पार्षदों को एकजुट रखने की बड़ी चुनौती है। यह भी बता दे कि, चंद्रपुर मनपा में सत्ता स्थापित करने के लिए कांग्रेस गठबंधन की सारी नजरें शिवसेना (यूबीटी) के नवनिर्वाचित 6 पार्षदों के अलावा कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय के तौर पर चुनाव जीतने वाले नंदू नागरकर एवं प्रशांत दानव पर है।
इसके साथ ही बसपा, वंचित बहुजन आघाडी एवं एआईएमआईएम के क्रमशः एक एक निर्वाचित पार्षदों को मिलाकर कांग्रेस गठबंधन 41 के पार पहंचने की उम्मीद कर रहा है। यह बात कांग्रेस नेता विजय वडेटटीवार ने भी स्पष्ट रूप से कहा है।
सूत्रों की मानों तो भाजपा ने भी अब मनपा में सत्ता हासिल करने की दृष्टि से शिवसेना (यूबीटी) के कुछ नवनिर्वाचित सदस्यों को अपनी ओर आकृष्ट करने पर सोचविचार शुरू किया है। भाजपा नेताओं की नजर उन दो नवनिर्वाचित पार्षदों पर भी है, जो निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर विजयी हुए है। भाजपा ने बसपा की एक प्रत्याशी को भी अपनी ओर आकृष्ट करने की दिशा में प्रयास शुरू किए है। वंचित बहुजन आघाडी के 2 विजयी पार्षदों पर भी भाजपा की नजर है।
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कुल मिलाकर इस मनपा में सत्ता की चाबी अब शिवसेना (यूबीटी) के 6 सदस्यों के हाथ है। इनके बगैर कांग्रेस गठबंधन या भाजपा गठबंधन किसी को भी सत्ता हासिल करना असंभव है। शिवसेना (यूबीटी) को साथ लिए बगैर कांग्रेस गठबंधन बहुमत के जादुई आंकड़े तक पहुंच सकती है, इसके लिए कांग्रेस को बागी निर्दलीय 2 पार्षदों तथा वंचित आघाडी, बसपा और एआईएमआईएम के क्रमशः एक एक प्रत्याशियों को साथ लाना होगा, लेकिन इसके बाद कांग्रेस गठबंधन के पास 35 का संख्याबल ही होगा जो जोखिम भरा साबित हो सकता है।
कांग्रेस ऐसे में किसी भी जोखिम को उठाने को तैयार नहीं है। चंद्रपुर मनपा में किसी भी राजनीतिक पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने से अब यहां शिवसेना (यूबीटी), निर्दलीय तथा अन्य छोटे दलों के पार्षदों की बारगेनिंग पावर बढ गयी है। यह बारगेनिंग पावर आगे क्या गुल खिलाती है, इस ओर ही अब सबकी निगाहें लगी है।
| पार्टी | सीटें |
|---|---|
| कांग्रेस | 27 |
| कांग्रेस समर्थित जविआ | 3 |
| भाजपा | 23 |
| शिवसेना (उबाठा) | 6 |
| शिवसेना (शिंदे गुट) | 1 |
| वंचित बहुजन आघाड़ी | 2 |
| एआईएमआईएम | 1 |
| बसपा | 1 |
| निर्दलीय | 2 |
| कुल सीटें | 66 |