चंद्रपुर मनपा कांग्रेस गुटनेता विवाद खत्म: अडूर की नियुक्ति रद्द, अड़बाले बने नए ग्रुप लीडर
Chandrapur Congress Group Leader: चंद्रपुर मनपा में कांग्रेस गुटनेता पद के विवाद पर संभागीय आयुक्त ने अंतिम फैसला सुनाया। राजेश अडूर की नियुक्ति रद्द कर सुरेंद्र अड़बाले को नया गुटनेता घोषित किया।
- Written By: रूपम सिंह
चंद्रपुर मनपा (सोर्स-सोशल मीडिया
Chandrapur Municipal Corporation Congress Dispute: चंद्रपुर मनपा में कांग्रेस गुटनेता पद पर चल रहे विवाद पर अंततः नागपुर संभागीय आयुक्त ने सुरेंद्र अड़बाले के नाम पर अंतिम मुहर लगा दी है। आयुक्त ने बुधवार को यह अंतिम फैसला देते हुए इस पद पर इसके पहले की गई राजेश अडूर की नियुक्ति को रद्द करार दिया है।
संभागीय आयुक्त के इस फैसले से जिले में कांग्रेस में सांसद प्रतिभा धानोरकर और विजय वडेटटीवार के बीच चल रहे अंतर्कलह में फिर एक बार वडेटटीवार गुट की धानोरकर गुट ने मात दी है। नागपुर संभागीय आयुक्त विजयलक्ष्मी बिदरी ने उच्च न्यायालय के ऐसे मुद्दों पर पिछले दिए गए फैसलों के आधार पर यह फैसला सुनाया है।
विवादों में फंसी थी गुटनेता नियुक्ति
गौरतलब है कि चंद्रपुर मनपा का आम चुनाव विगत 15 जनवरी को संपन्न हुआ था। जिसमें कांग्रेस के कुल 27 पार्षद निर्वाचित हुए थे। कांगेस के कुछ निर्वाचित पार्षदों ने मिलकर मनपा में पार्टी के गुटनेता के तौर पर कांग्रेस पार्षद राजेश अडूर का नाम घोषित किया था। किंतु कांग्रेस के दूसरे गुट के पार्षदों ने इस नाम पर आपत्ति जताते हुए नागपुर संभागीय आयुक्त के पास एक याचिका दायर करते हुए राजेश अडूर की नियुक्ति रदद् कर उनकी जगह पर सुरेंद्र अड़बाले को नियुक्त करने की मांग की थी।
सम्बंधित ख़बरें
संभाजीनगर राजमार्ग पर पसरा मातम: तीन अलग-अलग दुर्घटनाओं में महिला समेत 3 की मौत, 9 लोग गंभीर रूप से घायल!
यवतमाल में छात्रावास घोटाला: CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, फर्जी छात्र संख्या और बिना टेंडर खरीद का बड़ा खेल
745 करोड़ की सीवरेज योजना की सुस्त रफ्तार: संभाजीनगर में खोदी सड़कें बनीं जी का जंजाल, कीचड़ से नागरिक बेहाल!
NEET पेपर लीक मामले में CBI को मिला नया सुराग, लातूर के प्रोफेसर से 6 घंटे पूछताछ, मोबाइल में मिला प्रश्नपत्र!
उक्त पार्षदों का तर्क यह था कि, मनपा में कांग्रेस के 27 में से कुल 16 पार्षद उनके साथ है, अतः बहुमत के आधार पर यह नियुक्ति घोषित होनी चाहिए। कांग्रेस की पार्षद संगीता भोयर समेत 16 पार्षदों की ओर से संयुक्त रूप से दायर की गई इस याचिका पर निर्णय लेते हुए संभागीय आयुक्त ने गत 17 जून को मनपा में कांग्रेस गुटनेता पद पर बहुमत के आधार पर निर्णय लेते हुए सुरेंद्र अड़बाले की नियुक्ति घोषित की थी तथा इस पद पर राजेश अडूर की पहले की नियुक्ति को रदद् घोषित किया था।
अडूर ने दी थी अड़बाले की नियुक्ति को चुनौती
कांग्रेस गुटनेता पद पर सुरेंद्र अड़बाले की नियुक्ति करने के संभागीय आयुक्त के फैसले को राजेश अडूर ने उच्च न्यायालय के नागपुर खंडपीठ में चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने कांग्रेस गुटनेता की नियुक्ति के संदर्भ में संभागीय आयुक्त द्वारा 17 जून को दिए गए निर्णय को रद्द कर दिया था
तथा इस पद पर नियुक्ति को लेकर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अंतिम निर्णय लेने के निर्देश न्यायालय ने दिए थे। कोर्ट के इस फैसले के बाद गुटनेता पद पर राजेश अडूर की नियुक्ति की पुनर्बहाली हुई थी और सुरेंद्र अड़बाले की नियुक्ति रदद् हुई थी।
अडबाले के नाम पर मुहर
संभागीय आयुक्त विजयलक्ष्मी बिदरी ने आखिरकार अपना फैसला सुनाते हुए 6 फरवरी, 2026 को राजेश अडूर के कांग्रेस ग्रुप लीडर का पंजीयन रदद कर दिया। इसकी जगह, 21 जुलाई, 2026 से सुरेंद्र अडबाले को मनपा में कांग्रेस गुटनेता के तौर पर अधिकृत रूप से नियुक्त करार देते हुए अपना अंतिम निर्णय दिया है।
यह भी पढ़ें:- NEET पेपर लीक मामले में CBI को मिला नया सुराग, लातूर के प्रोफेसर से 6 घंटे पूछताछ, मोबाइल में मिला प्रश्नपत्र!
बहुमत के आधार पर फैसला
हाई कोर्ट के निर्देशों पर नागपुर संभागीय आयुक्त ने चंद्रपुर मनपा में कांग्रेस गुटनेता पद पर चल रहे विवाद पर पुनः एक बार सुनवाई शुरू की थी। इस सुनवाई के दौरान आयुक्त के सामने कांग्रेस के दोनों गुटों के पार्षदों ने अपनी हाजिरी लगाई, यह सुनवाई 9 और 13 जुलाई को हुई।
सुनवाई में राजेश अडूर की तरफ से दावा किया गया कि ग्रुप लीडर बदलने का फैसला नहीं लिया जाना चाहिए क्योंकि ग्रुप के 16 सदस्यों के खिलाफ डिसक्वालिफिकेशन की कार्रवाई पेडिग है, और ग्रुप लीडर बदलने का प्रस्ताव गैर-कानूनी है। उन्होंने यह भी तर्क दिया गया कि चूंकि ग्रुप लीडर को बिना किसी सहमति के चुना गया था, इसलिए बदलाव भी बिना किसी सहमति के किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का आधार
इस विवाद पर अपना अंतिम फैसला देते हुए संभागीय आयुक्त ने सुनील हरिभाऊ काले बनाम अविनाश मार्डीकर केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए साफ किया है कि, स्थानीय निकायों में ग्रुप लीडर का चुनाव या बदलाव संबंधित म्युनिसिपल काउंसिल पार्टी या ग्रुप द्वारा लोकतांत्रिक तरीके से किया जाना चाहिए। ऑर्डर में यह भी कहा गया है कि, ग्रुप लीडर की नियुक्ति को बहुमत से लिए गए फैसले को सही मानने का कानूनी आधार है।
