चंद्रपुर की आदिवासी माताओं के लिए ‘संजीवनी’ बनी यह योजना! 2213 महिलाओं के बैंक खातों में पहुंची सरकारी मदद
Maternity Grant Scheme Chandrapur: चंद्रपुर की 2213 आदिवासी माताओं को मिला मातृत्व अनुदान। 3 साल में 9213 महिलाओं तक पहुँचा लाभ। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की बड़ी पहल।
- Written By: प्रिया जैस
मातृत्व अनुदान (फाइल फोटो)
Navsanjivani Yojana Maharashtra: ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा संचालित मातृत्व अनुदान योजना के तहत चंद्रपुर जिले में वर्ष 2025–26 के दौरान 2213 आदिवासी गर्भवती महिलाओं को लाभ दिया गया है। वहीं पिछले तीन वर्षों में कुल 9213 आदिवासी गर्भवती महिलाओं को इस योजना का लाभ मिल चुका है।
यह योजना वर्ष 2004–05 से जिले में लागू है और इसे नवसंजीवनी योजना के अंतर्गत आदिवासी गर्भवती महिलाओं के लिए संचालित किया जाता है। योजना के तहत प्रत्येक पात्र गर्भवती महिला को 400 रुपये नकद अनुदान तथा 400 रुपये मूल्य की औषधीय सहायता प्रदान की जाती है। वर्ष 2025–26 में 2213 गर्भवती आदिवासी माताओं को कुल 8 लाख 85 हजार 200 रुपये की सहायता दी गई है।
प्रसवपूर्व पंजीकरण कराना जरूरी
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वर्ष 2025 में जिले में मातृ मृत्यु के 2 और शिशु मृत्यु के 18 मामले दर्ज किए गए हैं। योजना का उद्देश्य आदिवासी क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता देकर उन्हें प्रसव पूर्व देखभाल के लिए प्रोत्साहित करना है। योजना का लाभ लेने के लिए पात्र गर्भवती महिला को निकटतम शासकीय स्वास्थ्य केंद्र में जाकर स्वास्थ्य सेविका के पास प्रसवपूर्व पंजीकरण कराना होता है।
सम्बंधित ख़बरें
कल्याण कोर्ट का बड़ा फैसला, दिव्यांग नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को 20 साल की सजा
बीएमसी अधिकारी पर दुष्कर्म का आरोप, शादी के झांसे में 3 साल तक शोषण
ठाणे मनपा के उपायुक्त उमेश बिरारी निलंबित, राजस्व गड़बड़ी मामले में बड़ा एक्शन
पुणे के ILS लॉ कॉलेज में रैगिंग का मामला, डेक्कन पुलिस ने 5 छात्रों पर किया केस दर्ज
इसके लिए अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाणपत्र, ग्राम पंचायत अथवा निवास प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज आवश्यक होते हैं। यदि ये दस्तावेज उपलब्ध न हों तो ग्राम पंचायत द्वारा जारी प्रमाणपत्र भी मान्य होता है। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए महिला की आयु कम से कम 19 वर्ष होना जरूरी है और यह लाभ तीन जीवित संतानों तक दिया जाता है।
कुपोषण पर नियंत्रण के लिए प्रयास
जिले में कुपोषण कम करने के लिए ग्राम बाल विकास केंद्र, ग्रामीण अस्पताल, उपजिला अस्पतालों में बाल उपचार केंद्र तथा जिला स्तर पर पोषण पुनर्वसन केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों में कुपोषित बच्चों को भर्ती कर उन्हें पोषक आहार और आवश्यक उपचार दिया जाता है। साथ ही अभिभावकों को मजदूरी भी दी जाती है, जिससे शिशु मृत्यु दर कम करने में मदद मिलती है।
यह भी पढ़ें – पहले पद, अब गाड़ियां…अधिकारियों की ‘क्लास’ और बहुमत की ‘धौंस’! नागपुर मनपा में सभापति की बड़ी मांग
तहसील अनुसार लाभार्थियों की संख्या
बल्लारपुर – 34
चंद्रपुर – 84
भद्रावती – 145
वरोरा – 147
चिमूर – 477
नागभीड – 78
ब्रह्मपुरी – 31
सिंदेवाही – 306
सावली – 142
मूल – 124
पोंभुर्णा – 32
गोंडपिपरी – 97
राजुरा – 165
कोरपना – 291
जिवती – 60
कुल – 2213
मातृ स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण योजना
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक कटारे ने बताया कि आदिवासी क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए मातृत्व अनुदान योजना महत्वपूर्ण साबित हो रही है। इस योजना के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खाते में दी जाती है, जिससे उन्हें प्रसव पूर्व देखभाल में मदद मिलती है। वर्ष 2025–26 में जिले की 2213 गर्भवती महिलाओं को इसका लाभ दिया गया है, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुधारने में मदद मिल रही।
