
Water Resources Development (सोर्सः सोशल मीडिया)
Chandrapur Environment: चंद्रपुर जिला प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है। ताडोबा टाइगर प्रोजेक्ट, कोयला खनिज, वनसंपदा, नदियां, नाले और तालाबों के कारण यहां जैव विविधता प्रचुर मात्रा में पाई जाती है। बदलते समय के साथ आर्द्रभूमि (वेटलैंड) विकास के माध्यम से इन प्राकृतिक संपत्तियों का संरक्षण आवश्यक हो गया है। इसी कड़ी में पूर्व मालगुजारी तालाबों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। जिले में ऐसे कुल 1681 ‘मामा’ तालाब हैं, जिनमें से कई तालाब आज भी गहरीकरण की प्रतीक्षा में हैं।
पर्यावरण का लगातार हो रहा ह्रास मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण के लिए शासन के साथ-साथ नागरिकों की सहभागिता भी जरूरी है। आर्द्रभूमि क्षेत्र में नदियां, नाले, तालाब, बांध और कुएं जैसे सभी जलस्रोत शामिल होते हैं। इन जलस्रोतों का विकास तथा जलस्तर में वृद्धि समय की आवश्यकता बन चुकी है। खेती और उद्योगों में बढ़ते जल उपयोग के कारण जलस्रोतों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में आर्द्रभूमियों का संरक्षण और संवर्धन अत्यंत आवश्यक हो गया है।
जिले में घोड़ाझरी, आसोला-मेंढा जैसे बड़े तालाब तथा इरई, वैनगंगा सहित अन्य नदियां हैं, जिनके आधार पर खेती, वनसंपदा, पशु-पक्षी और मानव जीवन निर्भर है। पूर्व मालगुजारी तालाबों की संख्या अधिक होने के बावजूद उनका अपेक्षित विकास नहीं हो पाया है। कई तालाब गर्मी के मौसम में पूरी तरह सूख जाते हैं, जिससे इन पर निर्भर जैव विविधता संकट में पड़ जाती है। इसलिए इन तालाबों का गहरीकरण, सफाई और सौंदर्यीकरण कर आर्द्रभूमि विकास को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है, अन्यथा प्राकृतिक धरोहर के नष्ट होने का खतरा बढ़ सकता है।
आर्द्रभूमि वह क्षेत्र होता है, जहां किसी जलस्रोत के आधार पर जैव विविधता का संरक्षण होता है। किसी तालाब के आसपास पशु, पक्षी, जीव-जंतु, मानव बस्ती और खेती विकसित होती है। यह पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, इसलिए इसका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।
चंद्रपुर जिले के 11,443 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 85 सिंचाई तालाब, 1681 पूर्व मालगुजारी तालाब, 665 कोल्हापुरी बांध तथा लगभग 24 हजार सिंचाई कुएं हैं। ये सभी जलस्रोत मिलकर जिले की आर्द्रभूमि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। हालांकि, इनके विकास की ओर अपेक्षित ध्यान न दिए जाने से भविष्य में जलग्रहण क्षेत्र पर संकट की आशंका बढ़ रही है। समय रहते इन जलस्रोतों के समुचित विकास की आवश्यकता है।






