चंद्रपुर में नोटिफिकेशन के बरसों बाद भी अधर में घोड़ाझरी और कन्हालगांव अभयारण्य, वन्यजीव प्रबंधन पर उठे सवाल
Chandrapur Wildlife News: चंद्रपुर में घोड़ाझरी और कन्हालगांव अभयारण्यों का वाइल्डलाइफ विभाग को हस्तांतरण 8 वर्षों से लंबित है। पदों की रिक्ति और मैनपावर की कमी के कारण शिकार का खतरा बढ़ गया है।
- Written By: रूपम सिंह
चंद्रपुर घोड़ाझरी (फोटो-सोशल मीडिया)
Chandrapur Forest Department News: चंद्रपुर जिले में वन्यजीव संरक्षण के लिए ज़रूरी घोड़ाझरी और कन्हालगांव के दोनों अभयारण्य के प्रस्ताव 8 वर्ष बाद भी जस के तस अटके हुए है। दोनों अभयारण्यों के सरकारी नोटिफिकेशन जारी हुए हुए कई वर्ष बीत गए हैं, लेकिन वे अभी तक पूरी तरह से वाइल्डलाइफ डिपार्टमेंट को ट्रांसफर नहीं हुए हैं। जिससे वन्यजीव संरक्षण एवं प्रबंधन का प्रश्न गंभीर हो गया है। गौरतलब है कि, प्रस्तावित घोड़ाझरी सैंक्चुअरी का नोटिफिकेशन 23 मार्च, 2018 को जारी किया गया था, जबकि कन्हालगांव का नोटिफिकेशन 21 मार्च, 2021 को जारी हुआ था।
लेकिन नोटिफिकेशन जारी हुए इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी, उपरोक्त्त वनक्षेत्रों का परिसर अभी तक क्षेत्रीय वन विभाग और एफडीसीएम डिपार्टमेंट से वाइल्डलाइफ डिपार्टमेंट को ट्रांसफर नहीं हुआ है। यह भी उल्लेखनीय है कि, इन सैंक्चुअरी के लिए अलगअलग ऑफिसर और कर्मियों के पद मंजूर होने के बावजूद, उनकी नियुक्ति नहीं हुई है।
कन्हालगांव सैंक्चुअरी के लिए पदों की ज़रूरत होने के बावजूद भी अभी तक मैनपावर नियुक्त नहीं किया गया है। मनुष्यबल की कमी से जंगल खतरे में। पर्यावरणविदों के अनुसार दोनों प्रस्तावित अभयारण्यों के लिए मैनपावर की कमी के कारण, सैंक्चुअरी में जंगली जानवरों के गैरकानूनी शिकार और जंगलों की कटाई का खतरा निरंतर बना हुआ है।
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ज्ञात रहे कि, हाल ही में लगी आग में कन्हालगांव सैंक्चुअरी का एक बड़ा इलाका जलकर खाक हो गया, जिसे वन विभाग तथा प्रबंधन नियंत्रित नहीं कर पाया था। इस बारे में संस्था इकोप्रो के अध्यक्ष बंडू धोतरे ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक को एक पत्र भेजकर अपनी नाराजगी जताई है।
उन्होंने आगाह करते हुए बताया है कि, चंद्रपुर ज़िला इस समय मनुष्य एवं वन्यजीव संघर्ष की चपेट में है। अगर सैंक्चुअरी का मैनेजमेंट वाइल्डलाइफ डिपार्टमेंट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो तकनीकी विशेषज्ञों के ज़रिए इस टकराव को कम करना मुमकिन हो सकता है।
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शीघ्र रिक्त पदों पर नियुक्ति करें
बंडू धोतरे ने सैंक्चुअरी के लिए ज़रूरी सभी पद तुरंत भरने का भी आग्रह किया है। साथ ही इस इलाके को लोगों पर आधारित टूरिज़्म मॉडल के तौर पर विकसित कर स्थानीय स्तर पर गांवों का विकास करने की बात कही है।
इस संदर्भ में संस्था ने शीघ्र ही एक बड़ा आंदोलन खड़ा करने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि, इसी मांग के चलते इससे पहले, दिसंबर 2023 में मानव श्रृंखला सत्याग्रह और मार्च 2026 में अन्नत्याग सत्याग्रह किया गया था।
मानव एवं वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को कम करने की दिशा में किये गए उक्त आंदोलनों में 16 मांगें शामिल थी। धोतरे ने चेतावनी दी है कि, अगर सरकार इस मांग पर ध्यान नहीं देती है, तो इकोप्रो एक बार फिर आंदोलन का रास्ता अपनाएगा।
