(प्रतीकात्मक तस्वीर)
Chandrapur Illegal Mining: चंद्रपुर जिले के गडचांदूर मंडल के अंतर्गत धुनकी खेत परिसर में सर्वे क्रमांक 27 व 28 के समीप वर्षों से पड़ी, घास व झाड़ियों से आच्छादित शासकीय भूमि पर बिना किसी सरकारी अनुमति के बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन और गिट्टी निर्माण का मामला सामने आया है। खास बात यह है कि घटनास्थल पर तलाठी मौजूद होने के बावजूद पूरी कार्रवाई न होने से राजस्व प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। 17 जनवरी 2026 की सुबह उक्त स्थान पर जेसीबी मशीन से जमीन खोदकर बड़े पत्थर निकाले जा रहे थे।
इसके बाद मजदूरों की मदद से पत्थर तोड़कर गिट्टी बनाई जा रही थी और ट्रैक्टरों के माध्यम से उसका परिवहन किया जा रहा था।इस काम में एक जेसीबी और दो ट्रैक्टरों का उपयोग किया जा रहा था। सूचना मिलने पर तलाठी सतीश राजने और मदन पवार ने मौके का निरीक्षण किया, लेकिन अवैध कार्य स्पष्ट रूप से दिखने के बावजूद केवल एक ट्रैक्टर की जब्ती दिखाई गई, जबकि जेसीबी और दूसरा ट्रैक्टर छोड़ दिए गए, ऐसा स्थानीय नागरिकों का आरोप है।
इस संबंध में तलाठी सतीश राजने से फोन पर संपर्क करने पर उन्होंने जेसीबी से काम होने की बात स्वीकार की, लेकिन यह कहते हुए कार्रवाई नहीं की गई कि संबंधित किसानों ने जेसीबी “पड़ित खेती सुधारने” के लिए लाई है। हालांकि मौके पर जमीन की खुदाई, बड़े पत्थरों का अलग किया जाना और गिट्टी निर्माण स्पष्ट दिखाई देने से यह स्पष्टीकरण संदिग्ध माना जा रहा है।
स्थानीय किसानों के अनुसार यह शासकीय जमीन है और उत्खनन के लिए किसी भी प्रकार की अधिकारिक अनुमति राजस्व विभाग में दर्ज नहीं है।फोटो व वीडियो के रूप में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी उपलब्ध हैं, जिनमें जेसीबी, ट्रैक्टर, मजदूर और गिट्टी तोड़ने का कार्य साफ नजर आता है। वहीं 19 जनवरी 2026 को संबंधित किसान द्वारा तहसीलदार से पत्थर निकालने की अनुमति मांगे जाने की जानकारी सामने आने से पहले से चल रहे कार्य के अवैध होने की आशंका और गहरी हो गई है।
नागरिकों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, भूमि शासकीय है या निजी, इसकी नापजोख भूमि अभिलेख विभाग से कराई जाए, तथा जेसीबी और ट्रैक्टर छोड़ने के कारणों की जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
यह भी पढ़ें:- संकट में लोणार सरोवर: बढ़ते जल स्तर से डूब रही प्राचीन विरासत, हाई कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान
धुनकी शिवार में सर्वे नंबर 27 व 28 के पास वर्षों से झाड़ीदार व घासयुक्त पड़ी जमीन को बिना किसी सरकारी अनुमति के जेसीबी व ट्रैक्टर से खोदा गया। तहसीलदार जांच की बात कर रहे हैं, जबकि तलाठी इसे निजी जमीन बता रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह शासकीय भूमि है और बिना नापजोख किए ही निजी बताकर अवैध उत्खनन करने वालों को संरक्षण दिया जा रहा है। इस पूरे मामले को लेकर जल्द ही जिलाधिकारी के समक्ष शिकायत करने की बात कही गई है।