सुप्रिया सुले (सोर्स: सोशल मीडिया)
Supriya Sule On Foreign Policy: नई दिल्ली: एनसीपी (शरद चंद्र पवार) की वरिष्ठ नेता सुप्रिया सुले ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों लेते हुए अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर संसद में बहस की मांग की है। उन्होंने कहा कि जनता को विदेशी नीतियों और वैश्विक बदलावों के भारत पर पड़ने वाले असर की सटीक जानकारी होनी चाहिए।
सुप्रिया सुले ने मीडिया से संवाद करते हुए वैश्विक स्तर पर हो रही उथल-पुथल की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि दुनिया भर में जो कुछ भी हो रहा है, उसका सीधा असर भारत की विकास दर (Growth Rate) और राज्यों की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। सुले ने मांग की कि सरकार को इन मुद्दों पर देश को अंधेरे में नहीं रखना चाहिए और संसद में विस्तृत चर्चा के जरिए तस्वीर साफ करनी चाहिए।
उनके अनुसार, भारत और अमेरिका तथा चीन जैसे देशों के बीच भविष्य के संबंध कैसे होंगे, इस पर स्पष्ट नीति की आवश्यकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि 11 साल पहले शुरू हुए ‘आत्मनिर्भर भारत’ कार्यक्रम में क्या कोई नीतिगत बदलाव होने जा रहे हैं? विशेष रूप से आयात-निर्यात शुल्क (Tariff) के मामले में सरकार की संवेदनशीलता की उन्होंने मांग की, ताकि किसानों और स्थानीय उद्योगों को नुकसान न हो।
सांसद सुले ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत सरकार के लिए खेती पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि टैरिफ और संवेदनशील क्षेत्रों में सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएगी।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों में स्पष्टता की कमी का फायदा सत्ताधारी दल के लोग उठा रहे हैं, जबकि आम जनता तक सही जानकारी नहीं पहुँच रही है।
गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर सुप्रिया सुले ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए महात्मा गांधी और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों के बलिदान और कड़ी मेहनत की वजह से ही आज भारत मजबूती से खड़ा है। सुले ने जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे देश की अखंडता और सामाजिक सद्भाव के प्रति संवेदनशील रहें, क्योंकि यही भारत की वास्तविक शक्ति है।
महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को पद्म पुरस्कार दिए जाने पर सुप्रिया सुले ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर रहते हुए कोश्यारी ने महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले के बारे में जो विवादित टिप्पणियां की थीं, महाराष्ट्र की जनता उसे भूली नहीं है। सुले ने कहा, “हमारे लिए वे श्रद्धेय हैं और उनके प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति को इतना बड़ा सम्मान मिलना दुखद है। मैं आज भी उनके शब्दों की निंदा करती हूं।”
यह भी पढ़ें:- RSS मुख्यालय में शान से लहराया तिरंगा, नागपुर में राजेश लोया तो मोहन भागवत ने बिहार में मनाया गणतंत्र दिवस
स्थानीय मुद्दों पर बात करते हुए सुले ने पुणे मेट्रो के किराए में कमी करने की अपनी पुरानी मांग को फिर दोहराया। उन्होंने तर्क दिया कि यदि किराया सस्ता होगा, तो मध्यम वर्ग और छात्र अधिक संख्या में इसका उपयोग करेंगे, जिससे सड़क पर ट्रैफिक कम होगा। उन्होंने ‘लास्ट-माइल कनेक्टिविटी’ और सुरक्षित परिवहन ढांचे पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी सरकार के दौरान हिंसा के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ होना चाहिए।
सुले ने अंत में कहा कि महाराष्ट्र की जनता बहुत समझदार है और वह जानती है कि विकास और एकता का महत्व क्या है। आज का समय संकीर्ण राजनीति का नहीं, बल्कि देश और राज्य को विकासोन्मुख बनाने का है।