

Chandrapur Gram Panchayat Election: चंद्रपुर जिले के चिमूर तहसील के साथ ही जिले की विविध ग्रामपंचायतों की समयसीमा खत्म हो गई है। प्रशासकिय समयावधि भी पूरा हो गया है। ऐसे में ग्रामपंचायत चुनाव की प्रतीक्षा हो रही है। चुनाव आखीर कब होंगे? ऐसा सवाल ग्रामीणों के साथ संबंधित नेताओं को भी सता रहा है। ग्रामपंचायत ग्रामीण लोकतंत्र की सबसे बुनियादी इकाई और गांव के विकास की प्रमुख धुरी मानी जाती है।
लेकिन ग्रामपंचायतों की निर्वाचित अवधि समाप्त होने के बाद भी समय पर चुनाव नहीं होने से ग्रामीण क्षेत्रों में जनप्रतिनिधित्व का सवाल गंभीर होता जा रहा है। निर्वाचित ग्रामपंचायतों की मियाद पूरी होने के बाद पुराने सरपंचों को छह महीने के लिए प्रशासकीय जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब यह छह महीने का प्रशासकीय कार्यकाल भी पूरा हो चुका है।
इसके बावजूद चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं होने से गांवों में सवाल उठ रहा है कि आखिर अब स्थानीय जनता की आवाज कौन उठाएगा ? सामाजिक कार्यकर्ता अशोक चौधरी ने कहा कि प्रशासकीय व्यवस्था मूल रूप से अस्थायी होती है। इसका उद्देश्य चुनाव होने तक ग्रामपंचायत का कामकाज चलाना है। लेकिन प्रशासकीय अवधि भी समाप्त होने के बाद चुनाव की स्पष्ट समयसीमा नहीं होना ग्रामीण लोकतंत्र के लिए गंभीर विषय है। उन्होंने मांग की कि गांवों को प्रशासक नहीं, बल्कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि दिए जाएं।
प्रशासक के माध्यम से प्रशासनिक कामकाज चलाया जा सकता है, लेकिन लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की भरपाई नहीं की जा सकती। ग्रामीण नागरिकों को अपने प्रतिनिधि चुनने और उनके माध्यम से गांव के विकास से जुड़े निर्णयों में भाग लेने का संवैधानिक अधिकार है। इसलिए चुनाव को अनिश्चितकाल तक टालना उचित नहीं है। अवधि समाप्त हो चुकी ग्रामपंचायतों के चुनाव कार्यक्रम तत्काल घोषित किए जाएं, चुनाव की स्पष्ट समयसीमा ग्रामीण जनता को बताई जाए तथा ग्रामसभा और नागरिकों की स्थानीय विकास में भागीदारी को पुनः मजबूत किया जाए।
ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल, सड़क, नालियां, स्वच्छता, स्ट्रीट लाइट, स्वास्थ्य सुविधाएं, सरकारी योजनाओं का लाभ और स्थानीय विकास कार्य जैसे मुद्दे सीधे ग्रामपंचायत से जुड़े हैं। बारिश के दिनों में जलनिकासी, खराब सड़कों की मरम्मत, पेयजल व्यवस्था तथा स्वच्छता जैसी समस्याओं को लेकर ग्रामीणों को लगातार प्रशासन का दरवाजा खटखटाना पड़ता है। ऐसे में निर्वाचित प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति से इन समस्याओं का स्थानीय स्तर पर प्रभावी ढंग से उठाया जाना प्रभावित हो सकता है।
ग्रामपंचायत के माध्यम से होने वाले विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने, नागरिकों की समस्याएं ग्रामसभा में रखने और संबंधित विभागों से काम का फॉलोअप करने में जनप्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जनप्रतिनिधि नहीं होने पर ग्रामीण जनता के सवालों के लिए जवाबदेही तय करने का माध्यम भी कमजोर पड़ता है, यही चौधरी का कहना है।
ग्रामपंचायत केवल विकास कार्य कराने वाली संस्था नहीं, बल्कि ग्रामीण लोकतंत्र का महत्वपूर्ण मंच है। ग्रामसभा के माध्यम से नागरिक स्थानीय समस्याओं, विकास योजनाओं और सार्वजनिक सुविधाओं पर अपनी बात रखते हैं। चुनाव लगातार टलने से नागरिकों की प्रत्यक्ष भागीदारी, ग्रामसभा की प्रभावी भूमिका और स्थानीय स्तर पर जवाबदेही पर असर पड़ने की आशंका है।