Broom Business:चंद्रपुर जिले (सोर्सः सोशल मीडिया)
Chandrapur Broom Cutting: चंद्रपुर जिले में खरीफ का मौसम समाप्त होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को पर्याप्त रोजगार नहीं मिल पाता। विशेषकर आदिवासी बहुल इलाकों में रोजगार के सीमित साधनों के कारण महिलाएं अब झाड़ीदार जंगलों में जाकर झाड़ू की कटाई कर अपनी आजीविका अर्जित कर रही हैं। इसी वजह से इन दिनों जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के बीच झाड़ू कटाई को लेकर खासा उत्साह और व्यस्तता देखी जा रही है।
ग्रामीण इलाकों की महिलाएं घने जंगलों में जाकर एक विशेष प्रकार की घास की कटाई करती हैं, जिससे झाड़ू तैयार की जाती है। महिलाएं झाड़ू के छोटे-छोटे बंडल बनाकर उन्हें 20 से 25 रुपये में ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी बाजारों में भी बेचती हैं। यह व्यवसाय वे पिछले कई वर्षों से करती आ रही हैं।
हर वर्ष जनवरी और फरवरी माह में झाड़ू कटाई का कार्य तेज हो जाता है। खेती का काम समाप्त होने के बाद महिलाओं के पास कोई अन्य रोजगार नहीं बचता, इसलिए वे झाड़ू कटाई के माध्यम से अपने परिवार की आजीविका चलाती हैं। आदिवासी और पेसा गांवों में रोजगार के अवसरों की कमी के चलते महिलाओं को आजीविका के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
जान जोखिम में डालकर जंगल से झाड़ू काटकर लाना और उसे बेचकर सप्ताहभर की सब्जी, कपड़े तथा अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था करना उनकी मजबूरी बन गई है। वहीं, महिलाओं के साथ-साथ जिले के पुरुष और युवा वर्ग भी रोजगार की तलाश में पड़ोसी तेलंगाना राज्य में निर्माण कार्यों के लिए पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।
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जिले में पिछले कुछ वर्षों से मानव-वन्यजीव संघर्ष लगातार बढ़ रहा है। किसानों के साथ-साथ जंगल में झाड़ू काटने जाने वाली महिलाओं पर भी बाघ और तेंदुए के हमले हो चुके हैं, जिनमें कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। इसके चलते महिलाओं में जंगल जाने को लेकर भय का माहौल बना हुआ है। हालांकि जान का खतरा होने के बावजूद पेट की भूख मिटाने के लिए कई महिलाएं मजबूरी में जंगलों में झाड़ू काटने जाती हैं। इस प्रकार उन्हें वन्यप्राणियों के डर के साए में यह रोजगार करना पड़ रहा है।