प्रशासनिक विकेंद्रीकरण के लिए ‘ब्रह्मपुरी’ जिला बनना जरूरी, बालकृष्ण शेलके ने उठाई मांग
Bramhapuri District Demand: ब्रह्मपुरी को नया जिला बनाने की मांग तेज हो गई है, जहां सात तहसीलों के प्रस्ताव और प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए क्षेत्र में जनआंदोलन की तैयारी शुरू हो गई है।
- Written By: आंचल लोखंडे
Brahmapuri new district Maharashtra (सोर्सः सोशल मीडिया)
Bramhapuri Development News: ब्रह्मपुरी को जिले का दर्जा देने की मांग अब तेज हो गई है। इसके लिए तीन नई तहसीलें गठित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। मौजूदा चार तहसीलों को मिलाकर कुल सात तहसीलों वाला प्रस्तावित ‘ब्रह्मपुरी जिला’ बनाया जा सकता है।
सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. बालकृष्ण शेलके ने बताया कि प्रस्ताव के अनुसार वर्तमान चार तहसील-ब्रह्मपुरी, नागभीड़, सिंदेवाही और चिमूर-के साथ तीन नई तहसीलें बनाने का सुझाव है। इन प्रस्तावित तहसीलों में नवरगांव, तलोधी (बा.) और मेंडकी/मुडझा का समावेश किया जा सकता है।
चिमूर ऐतिहासिक क्रांति भूमि
ब्रह्मपुरी में जिला मुख्यालय के लिए आवश्यक अधिकांश सुविधाएं उपलब्ध हैं। नागभीड़ में रेल जंक्शन और घोड़ाझरी पर्यटन क्षेत्र है। सिंदेवाही में कृषि अनुसंधान और वन संपदा प्रचुर मात्रा में है। चिमूर ऐतिहासिक क्रांति भूमि होने के साथ-साथ ताडोबा-अंधारी बाघ परियोजना से जुड़ी तहसील है।
सम्बंधित ख़बरें
सीएम देवेंद्र फडणवीस की किसानों को डबल सौगात, कर्जमाफी के बाद 48 हजार करोड़ के बिजली बिल भी माफ
OnePlus N6x की भारत में एंट्री तय, Amazon पर लाइव हुई माइक्रोसाइट, दमदार बैटरी के साथ जल्द होगा लॉन्च
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का भाई शालिग्राम गर्ग गिरफ्तार, न्यायालय ने भेजा जेल; फायरिंग का है मामला
यश की ‘टॉक्सिक’ के चलते बदल सकती है श्रद्धा कपूर की ‘ईठा’ की रिलीज, मेकर्स कर रहे नई तारीख पर विचार
नवरगांव जिले का प्रमुख शैक्षणिक केंद्र
नवरगांव जिले का प्रमुख शैक्षणिक केंद्र माना जाता है और यहां की सांस्कृतिक लोक परंपरा भी समृद्ध है। तलोधी (बा.) व्यापार और परिवहन की दृष्टि से अहम है तथा यह विशेष रूप से धान निर्यात क्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध है। मेंडकी/मुडझा ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों के प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।
यहां बफर पर्यटन और कृषि पर्यटन को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। डॉ. बालकृष्ण शेलके ने कहा कि ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, प्रशासनिक आधारभूत संरचना और भौगोलिक आवश्यकताओं को देखते हुए ब्रह्मपुरी जिला निर्माण का दावा मजबूत है।
चंद्रपुर जाना महंगा साबित हो रहा
ब्रह्मपुरी ब्रिटिश काल से ही प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। वर्तमान में नागरिकों को जिला मुख्यालय चंद्रपुर तक 100 से 130 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में प्रशासनिक विकेंद्रीकरण के लिए ब्रह्मपुरी को जिला बनाना समय की मांग है।
ये भी पढ़े: PMFME योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली नई रफ्तार, 27.45 करोड़ निवेश, 10.52 करोड़ अनुदान से बदली तस्वीर
ब्रह्मपुरी जिला बनने से वैनगंगा नदी क्षेत्र की सिंचाई योजनाओं और गोसीखुर्द परियोजना जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्थानीय स्तर पर त्वरित निर्णय संभव हो सकेंगे। इससे कृषि उत्पादकता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। डॉ. शेलके के अनुसार, ब्रह्मपुरी जिला निर्माण की मांग को लेकर क्षेत्र में जनआंदोलन की रूपरेखा भी तैयार की जा रही है।
