चंद्रपुर. चंद्रपुर जिला मुख्यालय होने से यहां के बस स्टैंड को हवाईअड्डे की तर्ज बनाने की संकल्पना को साकार करने के लिए तत्कालीन वित्तमंत्री सुधीर मुनगंटीवार के प्रयासों से 12,07,68,766 रुपए की निधि मंजूर कर डी.वी. पटेल एंड कंपनी नागपुर को बस स्टैंड को साकार करने का काम सौंपा था. किंतु 21 नवंबर 2018 तक पूरा होने वाले बस स्टैंड का काम आज तीन वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी पूरा नहीं हुआ है. इसकी वजह से दीपावली के त्योहार पर यात्रियों के साथ लंबी दूरी से आने वाले चालक परिचालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
तत्कालीन वित्तमंत्री ने जिले के अनेक बस स्टैंड को आधुनिक और सर्वसुविधायुक्त बनाने का बीडा उठाया और इस कडी में बल्लारपुर और पोंभूर्णा बस स्टैंड बनकर तैयार हो गया है. किंतु मूल और चंद्रपुर बस स्टैंड का काम आज भी रेंग रहा है. चंद्रपुर जिला मुख्यालय होने की वजह से इस बस स्टैंड की अहमियत अधिक है. किंतु कुछ कारणों से बस स्टैंड के काम में विलंब होने पर अतिरिक्त 6 महीने का समय कंपनी को दिया था.
पटेल कंपनी द्वारा बस स्टैंड के काम की शुरुआत की गई किंतु बीच में रेतघाट से रेत मिलना बंद हो गया, कोरोना, एसटी हडताल, फंड की कमी की वजह से काम में विलंब होता रहा और इसकी मियाद बढाकर 30 अगस्त 2020 तक कर दी थी. इसके बावजूद आज तक काम पूरा नहीं हुआ है. नतीजा यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
काम का समय बढाकर दिए जाने के बावजूद आज तक काम पूरा न होने पर पटेल एंड कंपनी पर निगम की ओर से 7 जून 2021 से प्रतिदिन 100 रुपए जुर्माना लगाया जा रहा है. करोडों के काम में महज 100 रुपए प्रतिदिन का जुर्माना लगाकर कही अधिकारी जानबुझकर ठेका कंपनी को शह देकर नागरिकों को दिक्कतों का तोहफा तो नहीं दे रहे है.
महाविकास आघाडी सरकार के कार्यकाल में हो रहे बस स्टैंड के काम विलंब को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने बस स्टैंड गेट के सामने जोरदार प्रदर्शन कर सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास किया था. किंतु तख्तपलट के साथ शिंदे और फडणवीस सरकार आने के बाद ऐसा प्रतीत होता है कि भाजपा भी बस स्टैंड के काम को भूल चुकी है.
कोरोना समाप्ती के बाद डी.वी. पटेल एंड कंपनी नागपुर ने जुलाई 2022 तक काम समाप्त कर हस्थानांतरित करने का आश्वासन दिया था. किंतु जुलाई में काम न होने पर वनमंत्री सुधीर मुनगंटीवार के हाथों 15 अगस्त की योजना बनायी गई थी. किंतु उस समय पर भी काम अधूरा रहा और अब दीपावली तक भी काम पूरा होने की संभावना कम ही है. जिससे कंपनी तारीख पर तारीख पर दे रही है.
12.07 करोड रुपए की लागत से साकार होने वाले बस स्टैंड के साथ 7 करोड़ रुपए लागत से 24 कर्मचारी और 12 अधिकारियों के लिए कुल 36 क्वार्टर का निर्माण कंपनी ने किया है. कर्मचारियों के क्वार्टर अलाटमेंट का ड्रा हाल ही में निकाला गया है. किंतु 1 बीएचके क्वार्टरों के बाथरुम के डिजाईन को लेकर कर्मचारियों ने आपत्ती उठायी है. क्योंकि टायलेट को बाथरुम के बीच में बनाया गया है. इसकी वजह से कर्मचारियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पडेगा.
चंद्रपुर जिला मुख्यालय होने की वजह से यहां पर लंबी दूरी शेगांव, दर्यापुर, रिसोड की बसेस चंद्रपुर तक आती है. किंतु यह पर निवास की सुविधा न होने की वजह से इन बसों को बल्लारशाह भेजा जाता है. किंतु कई बार इन बसों में इक्का दुक्का ही यात्री होते है. जिससे उनके डीजल तक का खर्चा नहीं निकल रहा है. यदि समय पर बस स्टैंड साकार हो जाता तो निगम के डीजल का खर्च और कर्मचारियों की दिक्कत से छुटकारा मिल जाता.
इस संबंध में बस स्टैंड के इंजीनियर राहुल मोडक ने कहा कि राज्य परिवहन निगम की आर्थिक स्थिति बेहद नाजुक है. इसकी वजह से अनेक कंपनिया निगम के कामों के ठेका रद्द करने की विनंती कर रहे है. चंद्रपुर बस स्टैंड के लिए वनमंत्री सुधीर मुनगंटीवार से विशेष रुप से प्रयास किए जा रहे है. इसके चलते संभावना है कि जनवरी फरवरी तक काम पूरा हो सकेगा.निजी पेट्रोल पंपों के डीजल के लाखों के बिल बकाया होने की वजह से पंप वाले बार बार तकाजा कर डीजल देने से इंकार कर रहे है. उसी प्रकार एमआरएफ टायर कंपनी और स्पेयर पार्ट के बकाया होने से पार्टस मिलना मुश्किल हो रहा है. वहीं चंद्रपुर बस स्टैंड का काम देख रहे कंपनी के अमित पटेल ने फोन नहीं उठाया है.