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बुलढाना जिले के 3,36,825 पात्र किसान परिवारों के बैंक खातों में पीएम किसान योजना की 24वीं किस्त जमा की गई।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत जिले के किसानों को कुल 67 करोड़ 36 लाख रुपए मिले।
राज्य सरकार की ओर से सूखे जैसी स्थिति और फसल नुकसान को देखते हुए पात्र किसानों को अग्रिम आर्थिक सहायता दी जा रही है।
Buldhana PM Kisan Samman Nidhi: दिवाली के त्योहार से पहले केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को आर्थिक सहायता मिल रही है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त के तहत जिले के 3,36,825 पात्र किसान परिवारों के बैंक खातों में 67 करोड़ 36 लाख रु. सीधे जमा किए गए हैं।
इसके साथ ही राज्य सरकार की ओर से सूखा जैसी स्थिति और फसलों के नुकसान को देखते हुए 5,000 रु. की अग्रिम सहायता दी जा रही है। इस प्रकार पात्र किसानों को दोनों योजनाओं के माध्यम से कुल 7,000 रु. की आर्थिक सहायता उपलब्ध होगी। यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने दी।
डॉ. पीडीकेवी के अंतर्गत बुलढाना स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों योजना की 24वीं किस्त के वितरण कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया गया। इस अवसर पर कृषि क्षेत्र की विभिन्न योजनाओं, आधुनिक तकनीक के उपयोग और आगामी रबी मौसम की तैयारी पर मार्गदर्शन किया गया।
कार्यक्रम में डॉ. पीडीकेवी के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. धनराज उंदीरवाडे, सहयोगी अधिष्ठाता डॉ. प्रमोद वाकले, जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी संतोष डाबरे, कृषि तकनीकी विद्यालय बुलढाना के प्राचार्य डॉ. सतीश जाधव, कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अमोल झापे, ओमसिंग राजपूत, अनुजा सावले, एड. गायकवाड़ सहित किसान, महिला स्वयं सहायता समूहों की प्रतिनिधि उपस्थित थे।
आगामी समय में पानी की संभावित कमी को देखते हुए उपलब्ध जल का सावधानीपूर्वक उपयोग करने की आवश्यकता जताई गई। किसानों से पीने के पानी की जरूरत और पशुओं गुओं के लिए चारे की उपलब्धता को ध्यान में रखकर रबी मौसम की योजना बनाने की अपील की गई। इसके तहत चना, ज्वार और चारा फसलों की खेती को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया गया। चारा उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार की ओर से समर्थन मूल्य पर चारा खरीदने के संबंध में भी जानकारी दी गई।
प्रतापराव जाधव ने किसानों से बदलते मौसम और अल नीनो के संभावित प्रभाव से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए आधुनिक तकनीक अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसान एंड्रॉयड मोबाइल और डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर फसलों पर लगने वाले रोगों तथा कीटों की तस्वीरे अपलोड करके उनके निदान और उचित मार्गदर्शन की सुविधा का लाभ उठाएं। उन्होंने मिट्टी परीक्षण की रिपोर्ट किसानों को सरल भाषा में उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया। रिपोर्ट में मिट्टी के नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश (एनपीके) की मात्रा स्पष्ट रूप से समझ में आए, ऐसी व्यवस्था करने के निर्देश संबंधित तंत्र को दिए गए।