कब थमेगा किसानों का आर्तनाद, किसी को ज्यादा तो किसी को कम वर्षा ने किया प्रभावित
भंडारा तथा मोहाडी इन दोनों तहसीलों के अलावा पवनी तहसील में भी मिर्ची का उत्पादन बहुत ज्यादा होता है
- Written By: नवभारत डेस्क
File Photo
- कपास तथा मिर्ची उत्पादक किसानों का बढ़ा संकट
भंडारा. अन्नदाता किसान की परेशानी न जाने कब खत्म होगी. फसल की बुवाई से लेकर उसकी कटाई तक वह लगातार परेशान रहता है. बुवाई से लेकर कटाई तक उसकी समस्या का समाधान कोई नहीं कर पाता. वर्षा से उसकी न जाने कौन सी दुश्मनी है कि वह ज्यादातर किसानों को रूलाती ही है.
जब जरूरत होती है तो गायव हो जाती है और जब जरूरत नहीं होती तो जमकर बरसती है. पहले धान को नुकसान पहुंचाने के बाद अब वर्षा कपास और मिर्च पर कहर बरपा रही है. मोहाडी तहसील में विगत दिनों हुई बरसात के कारण वहां खेतों में लगी कपास की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है.
इस वर्ष मोहाड़ी तहसील में भारी वर्षा होने की वजह से बड़ी मात्रा में फसले प्रभावित हुईं. 20 सितंबर को सुबह से शुरु हुई बरसात कुछ समय तक विराम लेकर फिर बरसना शुरु किया और यह बरसात काफी देर तक होती रही. वर्षा के कारण कपास की फसल पर बहुत ज्यादा असर पड़ा है.
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बोंड आली कीड़े पर नियंत्रण पाने के लिए किसान महंगे से महंगे कीटनाशक खरीदने में किसी भी तरह का संकोच नहीं कर रहा है. वह कीड़ों का मारने के लिए कीटनाशकों का छिड़काव भी कर रहा है. मोहाडी तहसील के कांद्री, जांब, हिवरा, वासेरा, पांजरा, धूसाला,घोरपड में किसान कपास का उत्पादन ज्यादा पैमाने पर करने में रूचि दिखाते हैं. कपास की तरह ही भारी वर्षा के कारण मिर्ची की खेती पर भी व्यापक स्तर पर असर पड़ा है.
भंडारा तथा मोहाडी इन दोनों तहसीलों के अलावा पवनी तहसील में भी मिर्ची का उत्पादन बहुत ज्यादा होता है. भंडारा की उक्त तीन तहसीलों के अलावा अन्य तहसीलों के किसान भी मिर्ची के उत्पादन में रूचि दिखा रहे हैं, लेकिन मिर्ची के उत्पादन में बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं पड़ती है.
मिर्ची पर फुलोरा आने के समय कीड़े लगने से फसल पर असर पड़ा. भंडारा जिले के भंडारा तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जवाहरनगर, खरबी के साथ-साथ पवनी तहसील के अतंर्गत आने वाले कई क्षेत्रों में मिर्ची की फसल ली गई थी. मिर्ची की फसल के लिए बदरीला मौसम बहुत ही नुकसानदायक होता है, मिर्ची की फसल पर कीड़ों का आक्रमण होने पर मिर्ची के पौधे की पत्तियां पीली होकर नीचे गिरती है. मिर्ची भी पीली पड़ जाती है. आरंभ में किसानो को इस बात का भरोसा था कि मिर्ची की पैदावार अच्छी होगी, लेकिन बदरीला वातावरण शुरु होते ही मिर्ची की फसल पर कीड़ों का कब्जा हो गया.
कोरोना महामारी के फैलाव में खराब मौसम के कारण मिर्ची की फसल बर्बाद होने से किसानों के चेहरों पर मायूसी स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है. जहां एक ओर कम वर्षा होने से धान, तुवर उत्पादक किसानों को भारी नुकसान सहना पड़ा है, वहीं दूसरी ओर ज्यादा वर्षा ने कपास तथा मिर्ची की फसल को भी बर्बाद कर दिया है.
