भंडारा में 2 स्वीकृत सदस्यों की नियुक्ति रद्द, हाईकोर्ट ने 3 हफ्ते में नई चयन प्रक्रिया के दिए निर्देश
Tumsar Nagar Parishad Issue: तुमसर नगर परिषद में दो स्वीकृत सदस्यों की नियुक्ति हाईकोर्ट ने रद्द कर दी है। तीन सप्ताह में नई चयन प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
- Written By: अनन्या तिवारी
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स-AI)
Tumsar Nagar Parishad Nomination Dispute: भंडारा के तुमसर नगर परिषद में स्वीकृत सदस्यों की नियुक्ति को लेकर पिछले लंबे समय से जारी राजनीतिक घमासान और कानूनी दांव-पेंच पर आखिरकार उच्च न्यायालय ने पूरी तरह से विराम लगा दिया है। एक महत्वपूर्ण फैसले में न्यायालय ने संख्या बल के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन करने वाले 2 स्वीकृत सदस्यों की नियुक्ति को अवैध घोषित करते हुए तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है।
वहीं दूसरी ओर, नियमों के दायरे में आने वाले राष्ट्रवादी जनहित विकास आघाड़ी के प्रमोद तितिरमारे के पार्षद चयन को पूरी तरह वैध मानते हुए बरकरार रखा गया है। हाईकोर्ट के इस बड़े फैसले के बाद से तुमसर के राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल और खलबली मच गई है।
संख्या बल के आधार पर सीट आवंटन अनिवार्य
इस संवेदनशील मामले पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जी. एस. कुलकर्णी एवं न्यायमूर्ति आरती साठे की खंडपीठ ने 25 जून को अपना अंतिम फैसला सुनाया। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र नगर परिषद अधिनियम की धारा 63 (2बी) के प्रावधानों के तहत, नगर परिषद में विभिन्न राजनीतिक समूहों की तुलनात्मक संख्या के सटीक अनुपात के आधार पर ही स्वीकृत सदस्य सीटों का आवंटन किया जाना अनिवार्य है। कानून और स्थापित नियमों के खिलाफ जाकर कम सदस्यों वाले किसी भी राजनीतिक समूह या आघाड़ी को अतिरिक्त सीटें देना पूरी तरह से असंवैधानिक और गलत है।
सम्बंधित ख़बरें
नासिक में अंतर-राज्यीय ऑनलाइन सट्टेबाजी का भंडाफोड़, 5 सटोरिये गिरफ्तार, भारी मात्रा में गैजेट्स बरामद
TET पेपर लीक मामले में एक्शन में कांग्रेस, सपकाल-वडेट्टीवार ने सरकार को दिया अल्टीमेटम
भंडारा में टायर चोरी करने वाला गिरोह गिरफ्तार, सूमो वाहन समेत लाखों का सामान जब्त
अमरावती में आधुनिक टोकन मशीन से खरीफ बुआई तेज, बीज और मजदूरी की होगी बचत
यह पूरा विवाद सीटों के आवंटन में हुए गणितीय फेरबदल के कारण उत्पन्न हुआ था। उच्च न्यायालय ने गहन जांच और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शहर विकास आघाड़ी के शैलेश मेश्राम एवं हितेश चोपकर की नियुक्तियों को अवैध पाते हुए उन्हें खारिज कर दिया। इसके विपरीत, तुलनात्मक रूप से सही अनुपात और पात्रता रखने वाले तुमसर राष्ट्रवादी जनहित विकास आघाड़ी के प्रमोद तितिरमारे की सदस्यता को कानूनी रूप से सही ठहराया।
3 सप्ताह में नई चयन प्रक्रिया के निर्देश
इसके साथ ही, न्यायालय ने स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग को बेहद सख्त निर्देश दिए हैं कि रिक्त हुई अन्य 2 सीटों के लिए आगामी 3 सप्ताह के भीतर पूरी तरह से पारदर्शी, निष्पक्ष और नई चयन प्रक्रिया लागू कर योग्य सदस्यों की नियुक्ति की जाए।
यह भी पढ़ें भंडारा में PMFME योजना के तहत 228 नए खाद्य उद्योगों का लक्ष्य, मिलेगा 35% तक अनुदान
बड़ी प्रशासनिक गड़बड़ी और राजनीतिक पक्षपात का मामला
जिलाधिकारी सावन कुमार की ओर से प्रस्तुत सत्यापन और प्रक्रिया रिपोर्ट के अनुसार, तुमसर नगर परिषद में विभिन्न राजनीतिक गुटों का संख्या बल में भाजपा समर्थित समूह 1.26, राष्ट्रवादी नेतृत्व वाली विकास आघाड़ी 0.69, राष्ट्रवादी जनहित विकास आघाड़ी 0.57 और तुमसर शहर विकास आघाड़ी 0.46 का अनुपात था।
नियमों और तय मापदंडों के मुताबिक, सबसे पहले अधिकतम संख्या बल रखने वाले पहले तीन समूहों को क्रमशः 1-1 सीट मिलनी चाहिए थी। इसके विपरीत, नियमों को ताक पर रखकर सबसे कम संख्या बल (0.46) वाले तुमसर शहर विकास आघाड़ी’ को 2 सीटें आवंटित कर दी गई। इस बड़ी प्रशासनिक गड़बड़ी और राजनीतिक पक्षपात के सामने आने के बाद, शहरी विकास विभाग ने संज्ञान लेते हुए 11 फरवरी को ही इस पूरी चयन प्रक्रिया को निरस्त कर दिया। शासन के इसी निरस्तीकरण आदेश को बाद में प्रभावित सदस्यों ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
